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    अमिताभ से सीखा वक्त की कद्र करना- पृथ्वी सोनी

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    बॉलीवुड के जाने माने पेंटर पृथ्वी सोनी जिनकी पेंटिग सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी मशहूर है, ने फिल्म इंडस्ट्री में 47 साल से भी ज्यादा वक्त बिताया हैं। बतौर पेंटर फिल्मों से जुड़ने वाले पृथ्वी सोनी आज तब पीछे मुड़कर इंडस्ट्री के अपने सफर को देखते हैं तो उन्हें इस बात की खुशी होती है कि उन्हें बॉलीवुड के सभी बडे से बड़े एक्टर, डायरेक्टर्स का प्यार और साथ मिला है। राज कपूर से लेकर अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार, शाहरुख खान, सुभाष घई, राजकुमार संतोषी जैसे बडे़ बडे़ सेलिब्रिटी के साथ काम करे चुके पृथ्वी सोनी को आज भी अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना से जुड़ी की ऐसी बातें याद हैं जिन्हें सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। सोनी के साथ वन इंडिया की रिपोर्टर सोनिका मिश्रा की हुई बातचीत की कुछ अंश यहां पेश हैं।

    फिल्म इंडस्ट्री में अपने शुरुआती सफर के बारे में कुछ बताइये।

    शुरुआत मेंरी फिल्म् बैनर पेंटर हुई। दिल्ली के एक जाने माने स्टूडियो में मुझे फर्स्ट टाइम राजकपूर की फिल्म संगम में चांस मिला। सहगल ब्रदर्स ने मेरे स्केच देखकर कहा कि तुम हमारी फिल्म संगम के लिए स्केच करो और इसके लिए उन्होंने हमे एक पेंटिग के लिए एक रुपये दिये। राम और श्याम, आरजू, वक्त, काजल जैसी बड़ी बडी़ फिल्मों में हमे फिल्म बैनर बनाने का मौका मिला। तिलक राज जी मेरे गुरु थे इन्हे्ं देखकर ही हमें प्रोत्साहन मिलता था। 1969 में हम मुंबई आए। उस समय यहां रामकुमार जी एक बहुत बड़े आर्टिस्ट थे जो कि फिल्मीस्तान की सभी फिल्मों का आर्ट डायरेक्शन करते थे। रामकुमार जी से मैं मिला और रामकुमार जी के साथ ज्योत जले फिल्म में मैंने काम किया। उन्हें मेरा काम बहुत अच्छा लगा। उसके बाद हमने तिलक जी के साथ खिलौना, गीत आदी फिल्में की।

    कुछ समय बाद शोले फिल्म आई जो कि बहुत हिट रही। शोले फिल्म के हिट होने के बाद रघुनंदन जी ने एक फिल्म बनाई 'चंबल की रानी' जिसमें अमजद खान मुख्य किरदार निभा रहे थे। उस फिल्म का आर्ट डायरेक्टर मुझे करने को कहा गया। चूंकि मैं मुंबई में आर्ट डायरेक्टर एसोसिएशन का मेंबर नहीं था और मुझे भी आर्ट डायरेक्शन नहीं आता था। इसलिए मै दिल्ली वापस जाने लगा लेकिन रघुनंदन जी ने कहा कि आप मुंबई मत जाइये आपकी आवाज अच्छी है और आपकी पर्सनैलिटी भी अच्छी है। आप फिल्म में एक्टिंग करिये। उसके बाद मैंने कई फिल्में की, सीरियल की। मैंन दिलीप साहब के साथ कई फिल्में की। जिनमें कालिंदा शामिल थी। कालिंदा का मैंने आर्ट डायरेक्शन किया था।

    दिलीप कुमार जी ने आपकी पहली प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था। इसके बारे में कुछ बताइये।

    दिलीप साहब बहुत ही आर्टिस्टिक थे। वो हमेशा मुझे प्रोत्साहित करते थे कि आपकी आर्ट बेहतरीन है। आप कोई एक्सीबीशन क्यों नहीं लगाते। उसी समय मुझे एक चांस मिला एयरपोर्ट के पास एक होटल में अपनी एक्सीबीशन लगाने का। उन्होंने कहा कि आप हमारी गैलरी में शो कर सकते हैं लेकिन आपको किसी बड़े चीफ गेस्ट को बुलाना पड़ेगा। तब मैंने दिलीप कुमार को कहा कि मुझे एक मौका मिला है लेकिन आपको उसका इनोग्रेशन करना होगा। दिलीप जी ने खुशी खुशी उस गैलरी का इनोग्रेशन किया और तभी से मेरी आर्ट हिट होने लगी। उसके बाद पूरे वर्ल्ड में मेरे शो हिट हुए। हमारी आर्ट से पहले मॉर्डन आर्ट का जमाना चल रहा था। हमने अपनी पेटिंग्स में मॉर्ड्न और फाइऩ आर्ट का मिक्स किया जिसे देश भर में लोगों ने सराहा। और आज हर बडे़ से लेकर छोटी गैलरी तक पृथ्वी सोनी नाम फेमस है।

    कहा जाता है कि अमिताभ से लेकर शाहरुख खान तक जो काम करते हैं उसमें दिलीप कुमार की झलक होती है। इस बारे में आपका क्या सोचना है?

    हर किसी का एक आदर्श होता है। जबतक आपका कोई गुरु नहीं होगा तब तक कोई कुछ नहीं सीख सकता। दिलीप कुमार ने इतना नाम कमाया। राजेंद्र कुमार, अमिताभ बच्चन, मनोज कुमार ने अपनी बेहतरीन एक्टिगं से लोगों का मनोरंजन किया। इसलिए आज भी जो एक्टर अच्छा काम करता है उसमें इनका एक टच आ जाता है। अशोक कुमार जी जो की काफी सीनियर थे, उसके बाद राज कपूर साहब, देव आनंद, राजेंद्र कुमार सभी ने अपने ढंग से खुद को स्टैबलिश किया। इन्हीं लोगों से आज के हीरो प्रोत्साहन पा रहे हैं। तो जाहिर है कि आज के एक्टरों में इन एक्टरों का कुछ प्रभाव तो हमेशा ही नज़र आएगा।

    आज के एक्टर्स में आपको कौन से एक्टर में सबसे ज्यादा पोटेंशियंल दिखता है?

    शाहरुख खान आज के समय के एक बेहतरीन एक्टर हैं। बाकी भी सभी अच्चे आर्टिस्ट हैं।

    आपका परिवार भी इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ है। अपने परिवार के बारे में कुछ बताइये।

    पेटिंग के साथ मुझे सिंगिंग का भी शॉक था। मैंन कई प्रोग्राम भी अटैंड की। जल्द ही मेरी एक गीत और गजल की एलबम रिलीज होने वाली है। मेरी बेटी भी प्रोफेशनल सिंगर है। मेरा बेटा और बेटी पेंटिंग भी करते हैं। मेरी पत्नी भी पेंटिंग करते हैं।

    अमिताभ से सीखा वक्त की कद्र करना

    अमिताभ से सीखा वक्त की कद्र करना

    अमिताभ जी के साथ मैं जब देवा फिल्म कर रहा था तो मैंने देखा कि वो इतने बड़े आर्टिस्ट हैं। वो टाइम के इतने पंकचुअल हैं और वो लाइफ को एकदम लाइवली जीते हैं वो एक सेकेंड भी वेस्ट नहीं करते। वो सुपरस्टार हैं लेकिन वो कभी भी रेस्ट नहीं करते या फिर अफने दोस्तों को साथ टाइम वेस्ट नहीं करते। वो कभी भी टाइम वेस्ट नहीं होने देते। ये उनसे सीखने वाली बात है।

    राजेश खन्ना करते थे दरवाजे पर इंतजार

    राजेश खन्ना करते थे दरवाजे पर इंतजार

    राजेश खन्ना जी मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त थे। वो हमारे फैमिली मेंबर जैसे थे। राजेश खन्ना जी एक रियल आर्टिस्ट थे। जो कि उनकी फिल्मों में उनके किरदारों से साफ जाहिर होता है।वो बहुत ही इमोशऩल इंसान थे। मुझे वो बहुत प्यारकरते थे। जब हम उनसे मिलने जाते थे तो वो हर एक मिनट फोन करके पूछते थे कि अभी कहां हो कितना टाइम लगेगा। और जब मैं घर पहुंचता था तो वो दरवाजे पर हमारा इंतजार करते मिलते थे। उनके जाने का बहुत दुख है। उनका पूरा परिवार हमारे बेहद करीब है।

    राजुकमार संतोषी को चाहिए परफैक्शन

    राजुकमार संतोषी को चाहिए परफैक्शन

    राजकुमार संतोषी जी ने जब दामिनी फिल्म बनाई तो उन्होंने पूरी फिल्म को कंप्लीट कर दिया था लेकिन जब टाइटल बना तो संतोषी जी ने कहा कि उन्हें फिल्म के आर्ट में परफैक्शन चाहिए। उन्होंने कहा कि ये मीनाक्षी शेषाद्री के करियर की बेस्ट फिल्म होगी और इसका आर्ट वो सोनी जी से कराएंगे। वो मेरे साथ एक महीना बैठते थे और वहीं पर बैठकर वो अपनी फिल्म का काम भी कराते थे। उन्हें अपनी फिल्म में परफैक्शन चाहिये था। राजकुमार संतोषी जी के अंदर एक लगन थी।

    माला सिन्हा की अद्भुत पेंटिग

    माला सिन्हा की अद्भुत पेंटिग

    माला सिन्हा की आंखे फिल्म में एक पोस्टर बनाया था। उस पोस्टर में 17-18 फीट का फेस था। उसे हमने प्लाइवुड लेकर बनाया था और उस पोस्टर को लेकर काफी तारीफें भी मिली। गेटअप भी बनाये हमने जैसे अमरीश पुरी जी का मोगैम्बो और खलनायक फिल्म में संजय दत्त और तूफान में अमित जी का।

    आज इमोशनल नहीं टेक्निकल फिल्में बनती हैं

    आज इमोशनल नहीं टेक्निकल फिल्में बनती हैं

    पहले के जमाने में लोग इंतजार करते थे अच्छी फिल्म के रिलीज का आज हर रोज एक नयी फिल्म बनती है लोगों को भी थोड़े वक्त के लिए ही कोई गाना या फिल्म पसंद आती है। आजकल की फिल्में और गाने थोडे समय के लिेए होती हैं। पहले फिल्में गोल्डन चुबली डायमंड जुबली बानाती थी लेकिन आजकल वैसी फिल्में नहीं बनतीं। हालांकि सुभाष घई, यश राज की फिल्में आज भी बॉक्स ऑफिस पर लंबे समय तक चलती हैं। आजकल टेक्निकल फिल्में आती हैं। हम हॉलीवुड फिल्मों की बराबरी करते हैं। नये डायरेक्टर, नये प्रोड्यूसर हैं नये एक्टर हैं जो कि काफी टेक्निकली बेहतरीन फिल्में करते हैं।

    जब यश चोपड़ा ने किया रील का इंतजार

    जब यश चोपड़ा ने किया रील का इंतजार

    यश चोपड़ा जी के साथ हमने कई फिल्में की हैं। एक बार नेहरु सेंटर में मेरा एक शो था। हमने यश जी को भी इन्वीटेशन भेजा था। यश जी अचानक दूसरे दिन शो में आ गये। उस वक्त वहां कोई कैमरामैन नहीं था। हमने यश जी को कहा कि सर हम एक कैमरे की रील मंगा रहे हैं कैमरे में रील ख्तम हो गयी है। यश जी ने कहा कि हम तो तु्म्हाराशो देखने आये हैं तब तक तुम रील मंगा लोग हमे पेटिंग्स देखते हैं। तभी बाहर हमें एक कैमरामैन मिल गया और हमने उसे कहा कि हमारी कुछ तस्वीरें ले लें। तब तक हमें कैमरे की रील भी मिल गयी।

    English summary
    Amitabh Bachchan never wasted his single minute says Bollywood well-known Painter Prithvi Soni. Prithvi Soni made movie banners for many hit films. Prithvi Soni share close relationship with Rajesh Khanna, Dharmendra, Amitabh Bcahchan family.
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