भंसाली सर की सराहना मायने रखती है : दिव्या दत्ता

सबसे पहले आपको शुभकामनाएं, हाल में आयी आपकी फिल्म मोनिका से आपको बहुत सराहना मिली।
जवाब: जी शुक्रिया, मैं शुक्रगुजार हूं कि लीड एक्ट्रेस न होते हुए भी अब लोगों की निगाह मुझ पर जा रही है और लोग मेरे काम को सराह रहे हैं।
दिव्या, अब तक आने कई फिल्मों में किरदार निभाया है। कई बड़े कलाकारों के साथ भी काम किया। आपका अपना पसंदीदा किरदार बताएं।|
मुझे फिल्म आजा नचले में माधुरीजी के साथ काम करके बेहद खुशी हुई थी। और फिल्म वीर जारा का किरदार भी मेरे दिल के बेहद करीब है। वेलकम टू सज्जनपुर में श्याम बेनेगल के साथ काम करने का मौका मिला। जिसे मैं कभी भूल नहीं सकती। सच कहूं तो मैं खुद बेहद मिश्रित स्वभाव की हूं। हमेशा हंसते रहना भी मुझे पसंद नहीं और हमेशा नाराज भी मैं रह नहीं सकती।
आनेवाले समय में आपको दो महत्वपूर्ण फिल्में मिल रही हैं।
हां, मुझे माइ फ्रेंड पिंटो और स्टैलनी का डब्बा दोनों में मुख्य किरदार निभाने का मौका मिल रहा है। दोनों ही किरदार बिल्कुल अलग तरीके के हैं। फिल्म माइ फ्रेंड पिंटो में मैंने खुद को अलग तरीके से तैयार किया है। इसमें मैं बिल्कुल बिंदास बनी हूं। और फिल्म स्टैलनी का डब्बा में टीचर की भूमिका में हूं।
अमोल गुप्ते के साथ काम करना, कैसे लगा। अपना अनुभव शेयर करें
स्टैलनी का डब्बा एक ऐसे बच्चे की कहानी है, जिसके पास आइडियाज की भरमार है और वह कुछ भी अजूबा कर सकता है। लेकिन उसे सही तरीके से दिशा नहीं मिली। जैसा कि सभी जानते हैं कि अमोल की सोच से ही तारें जमीं पर निकली थी। ऐसे में निश्चिततौर पर वे इस फिल्म से भी लोगों के दिमाग पर एक सवाल तो जरूर छोड़ना चाहेंगे। किसी किताब की सिलेबस दी गयी थी।
किस तरह का रिसर्च किया
फिल्म माइ फ्रेंड पिंटो के बारे में बतायें
इस फिल्म में मैंने बिंदास किरदार निभाया है। दर्शकों को मेरा यह किरदार जरूर पसंद आयेगा और खासतौर से मेरे संवाद उन्हें जरूर पसंद आयेंगे। फिल्म में प्रतीक बब्बर हैं। वे बेहतरीन कलाकार हैं। उनमें बहुत विभिन्नताएं हैं। उनके साथ मैंने कआ ऐसे दृश्य दिये हैं, जिसे देख कर दर्शक हंसते-हंसते लोट-पोट हो जायेंगे।
आपके पसंदीदा डायरेक्टर
मुझे संजय लीला भंसाली की फिल्में पसंद हैं और मुझे बेहद खुशी हुई जब मुझे माइ फ्रेंड पिंटो के दौरान उनसे मुलाकात हुई और उन्होंने मेरे काम की तारीफ की। मेरे लिए बड़ी बात है। संजय सर ने ही इस फिल्म के लिए मेरा नाम सुझाया था। मुझे पंजाबी फिल्मों से हमेशा लगाव रहा है।लेकिन मेरी यह इच्छा है कि मैं हमेशा विभिन्न रूपों के किरदार को निभाऊं। चूंकि लोग आपको एकरूप में देख कर बोर हो जाते हैं। पंजाबी फिल्मों में एक खासियत है कि वहां की फिल्में अपनी स्थानीय रूप से बाहर निकल कर किसी तरह के दिखावे में अब तक नहीं आयी है। यह अच्छी बात है।


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