62 के हुए संजय दत्त, रणबीर कपूर ने यूं दिखाई थीं संजू बाबा की ज़िंदगी की 10 सबसे बड़ी गलतियां

संजय दत्त का जन्मदिन फैन्स पूरे जोश के साथ 29 जुलाई को मना रहे हैं। संजय दत्त 62 साल के हो चुके हैं और आज भी फैन्स के चहेते हैं। उनकी पूरी ज़िंदगी की किताब, संजय दत्त ने अपनी बायोपिक के ज़रिए खोल कर रख दी थी और राजकुमार हीरानी ने रणबीर कपूर के ज़रिए संजय दत्त को फैन्स के लिए परदे पर वैसा ही पेश किया जैसे वो थे - अक्खड़, घमंडी, नशे में चूर, भटके हुए युवा।

संजय दत्त को फैन्स आमतौर पर इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि संजय दत्त ने अपनी ज़िंदगी में जितनी भी गलतियां की, उसकी भरपाई की और उन्हें सबके सामने कुबूल किया। इन गलतियों में ड्रग्स से लेकर सुसाईड जैसी गलतियां शामिल हैं।

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संजय दत्त एक युवा के तौर पर वो सबकुछ थे जो एक युवा को नहीं होना चाहिए। और इस बात की सीख संजय दत्त अक्सर अपने इंटरव्यू में ज़रूर दे जाते हैं। हालांकि, राजकुमार हीरानी ने जो बायोपिक बनाई उसे संजय दत्त को हीरो के तौर पर पेश करने के लिए काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। फिल्म में छोटे छोटे हिस्सों में संजय दत्त की ज़िंदगी की सभी बड़ी बड़ी गलतियों को समेटने की बेहतरीन कोशिश की गई थी। लेकिन इन गलतियों के साथ जो बात हर किसी को खटकी थी वो था इसका ट्रीटमेंट। फिल्म को यूं दिखाया गया था मानो संजय दत्त की ज़िंदगी का सबसे बड़ा विलेन था उनके हालात। उन्होंने खुद कुछ किया नहीं, बस उनके साथ चीज़ें होती चली गईं।

लेकिन इस बात की तारीफ की जा सकती है कि इस बायोपिक ने शायद इसलिए दर्शकों का दिल जीता क्योंकि इस बायोपिक में सच्चाई थी। संजय दत्त की ज़िंदगी की सच्चाई। बात करें संजय दत्त के जीवन की गलतियों की तो उन्होंने गलतियां नहीं कांड किए हुए हैं। लेकिन इन सभी को फिल्म ने संजय दत्त की दृष्टि से ही सही लेकिन दिखाया ज़रूर था।

आत्महत्या की करने की कोशिश

आत्महत्या की करने की कोशिश

संजय दत्त को जब 2011 दोबारा जेल जाने की सज़ा का एलान हुआ तो वो टूट चुके थे और उन्होंने अपनी जान लेने की कोशिश की थी। वो नहीं चाहते थे कि उनके बच्चों को कोई टेररिस्ट के बच्चे बोले। हालांकि सही वक्त पर उनकी पत्नी मान्यता ने उन्हें बचा लिया।

नशे में ऐसा डूबे कि उठ नहीं पाए

नशे में ऐसा डूबे कि उठ नहीं पाए

संजय दत्त ने जब पहली बार ड्रग्स लिया तो चलिए बेवकूफी में लिया। दूसरी बार लिया जब उनकी मां बीमार थी। अब ये बेवकूफी या बचपना नहीं था। ये उनकी चॉइस थी। और जब आप किसी चीज़ का चुनाव करते हैं तो वो बस आपकी ज़िम्मेदार होने या गैर ज़िम्मेदार होने का सुबूत होती है।

21 साल की उम्र में घमंड

21 साल की उम्र में घमंड

संजय दत्त में एक 21 साल की उम्र के लड़के तके हिसाब से काफी ज़्यादा अहम था। उन्होंने जब पहली बार ड्रग्स किया तब वो अपने डैड से नाराज़ थे। और ये नाराज़गी भी केवल इसलिए थी क्योंकि संजय अपना काम ढंग से नहीं कर रहे थे।

केवल ड्रग्स ही नहीं, हर तरह का नशा

केवल ड्रग्स ही नहीं, हर तरह का नशा

संजय के ड्रग्स का सिलसिला काफी लंबा चला। कोकेन और चरस, गांजा उन्हें इतना प्यारा था कि एक तरफ उनकी मां कोमा में थी और वो अपनी बहनों को अपनी ज़िम्मेदारी पर यूएस लेकर जा रहे थे। लेकिन साथ में गैर कानूनी चरस के साथ। ये जानते हुए कि अगर पकड़े गए तो बहनों को भी जेल हो सकती है। कुल मिलाकर संजय दत्त को ज़िम्मेदारियां पसंद ही नहीं थीं।

मदद मिली, पर मदद ली नहीं

मदद मिली, पर मदद ली नहीं

आखिरकार पिता से मदद मांगने के बाद, संजय दत्त को रीहैब में भेजा गया। उनके पिता के ऊपर खर्चों की बारिश हो चुकी थी। फिर भी उन्हें अमरीका के बेस्ट रीहैब सेंटर भेजा गया। लेकिन वहां से भी संजय दत्त भाग गए।

नहीं बन पाए अच्छे पार्टनर

नहीं बन पाए अच्छे पार्टनर

अपने चरस की लत में वो इतना डूबे थे कि संजय दत्त अपनी ही शादी में नहीं पहुंचे थे। इतना ही नहीं, वो अपनी ही होने वाली बीवी के मंगलसूत्र को बेच कर अपने लिए फूंकने का माल खरीद चुके थे। संजय दत्त ने अपने कई इंटरव्यू में माना कि वो अपनी पत्नियों रिचा और रिया के लिए अच्छे पार्टनर साबित नहीं हुए थे।

सबसे बड़ी गलती

सबसे बड़ी गलती

संजय दत्त की ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती के लिए उन्होंने जेल में सालों सज़ा काटी है। उन्हें किसी ने आतंकवादी बुलाया तो किसी ने कुछ और। लोग उनके पिता को आतंकवादी का पिता कहने लगे और बहनों को चरसी की बहन। संजय दत्त मानते हैं कि उनकी गलती थी गलती करने के बाद डर जाना और उस गलती को छिपाना।

डर कर गलत रास्ता चुनते चले जाना

डर कर गलत रास्ता चुनते चले जाना

संजय दत्त की सबसे बड़ी गलती थी अंडरवर्ल्ड से इतना डर जाना कि अंडरवर्ल्ड की दोस्ती कुबूल कर लेना। उन्हें पता था कि शहर में भारी मात्रा में असलहे आ रहे हैं। उन्होंने किसी से नहीं पूछा क्यों। वो उन लोगों के साथ उठते बैठते थे क्योंकि उन्हें डर था कि परिवार के साथ कुछ ना हो जाए।

करियर पर फोकस ना करना

करियर पर फोकस ना करना

जब संजय के लिए चीज़ें थोड़ी सी ठीक हुईं तो उन्होंने करियर को हल्के में लेना शुरू कर दिया। उनके पास जितनी फिल्मों की स्क्रिप्ट आती थी वो उसे पढ़ते ही नहीं थे। मुन्नाभाई एमबीबीएस में इन्हीं में से एक थी।

पिता से दूरी बना लेना

पिता से दूरी बना लेना

संजय दत्त ने ज़िंदगी भर अपने पिता की तरह बनने की कोशिश में दोनों के बीच एक दीवार बना ली थी। जिसे उनके पिता ने हर कदम पर तोड़ने की कोशिश की। और जब तक संजू ने ये दीवार लांघी तब तक काफी देर हो चुकी थी।

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