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    Birthday: रामायण की मंथरा ललिता पवार के साथ सेट पर दर्दनाक हादसा, लकवा- 3 दिन बाद घर से मिला शव

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    बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री ललिता पवार का जन्मदिन 18 अप्रैल को होता है। मुंबई के नासिक परिवार में जन्मी ललिता पवार ने बॉलीवुड में कई बड़े सुपरस्टार से भी ज्यादा फिल्में की हैं। उन्होंने करीब 700 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया और दूरदर्शन के रामायण में मंथरा का किरदार निभाया। जिसे आज भी भला कौन ही भूला पाया है।

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    ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 में नासिक में हुआ। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, गुजराती समेत कई भाषाओं में 50 साल तक काम किया। कम लोग ही जानते हैं कि ललिता पवार का असली नाम अंबा था। ललिता को आज जो मुकाम हासिल हुआ वह काफी कठिन रहा है।

    क्योंकि वह एक ऐसे परिवार में जन्मीं जहां पढ़ना लिखना और महिलाओं को लेकर सोच पुरानी ही थी। तभी वह कभी स्कूल नहीं जा पाई। लेकिन उन्होंने अपनी एक्टिंग से घर घर में पहचान बनाई।

    9 साल की उम्र में करियर की शुरुआत

    9 साल की उम्र में करियर की शुरुआत

    ललिता पवार ने तो बाल कलाकार के रूप में ही काम शुरू कर दिया था। ललिता पवार ने भारत की पहली मूक फिल्म 'राजा हरिचंद्र' से 9 साल की उम्र में करियर की शुरुआत की। इसके बाद तमाम शो और तमाम भाषाओं में उन्होंने काम किया। लेकिन इतनी लोकप्रिय, प्रतिभाशाली अभिनेत्री का उनके ही घर में तीन दिन बाद शव बरामद होगा ये कभी किसी ने नहीं सोचा था।

    एक थप्पड़ की वजह से चेहरा खराब

    एक थप्पड़ की वजह से चेहरा खराब

    साल 1942 में ललिता पवार 'जंग ए आजादी' की शूटिंग कर रही थी। इस फिल्म के दौरान उनके साथ बुरा हादसा हुआ। दरअसल एक सीन था जिसमें भगवान दादा को थप्पड़ मारना होता है लेकिन ये थप्पड़ इतनी जोर से लगा कि वह धड़ाम से जमीन पर गिर गईं और कान से खून निकलने लगा। इसके बाद कहा जाता है कि डॉक्टरों ने उन्हें गलत दवा दे दी और उन्हें लकवा मार गया।

    फिल्मी दुनिया के चक्कर में आंख खराब

    फिल्मी दुनिया के चक्कर में आंख खराब

    उस सीन और गलत चीजों की वजह से प्रतिभाशाली ललिता पवार की दाहिनी आंख खराब हो गई। मतलब कि सिकुड़ गई। लंबे समय तक वह फिल्मी जगत से दूर रहीं और उन्हें काम मिलना तक बंद हो गया। वही ललिता पवार जिनके साथ हादसा भी सेट पर हुआ और फिर जिंदगी में इसी क्षेत्र के वजह से संकट आ गयी।

    फिर दोबारा करियर की शुरुआत

    फिर दोबारा करियर की शुरुआत

    1948 में फिल्म गृहस्थी से ललिता ने अपने काम की फिर शुरुआत की। उन्होंने आंख सिकुड़ जाने के बाद भी अपने हौसले को कम नहीं होने दिया। वह लगातार काम करती रही। उन्होंने अपनी करियर में 'श्री 420', 'अनाड़ी', 'मिसेज डीसा' जैसी ढेरों हिट फिल्में की है।

    जिंदगी के आखिरी पलो में अकेली

    जिंदगी के आखिरी पलो में अकेली

    ललिता पवार की पहली शादी ज्यादा नहीं चला। उन्होंने इसके बाद डायरेक्टर राज प्रकाश गुप्ता से ब्याह रचाया। लेकिन किस्मत का खेल ऐसा था कि वह अपनी जिंदगी के आखिरी पलों में घर पर अकेली थीं। हुआ यूं कि पति खुद अस्पताल में भर्ती थे, वहीं बेटा अपने परिवार के साथ मुंबई में रहता था। इस बीच ललिता अपने घर पर अकेली थीं। इस बीच 24 फरवरी 1998 में ललिता ने आखिरी सांस ली। किसी को पता भी नहीं चला कि ललिता का निधन हो चुका है। पुलिस ने तीन दिन बाद दरवाजा तोड़ उनके शव को निकाला।

    रामायण की मंथरा से तो लोग चिढ़ने लगे थे

    रामायण की मंथरा से तो लोग चिढ़ने लगे थे

    रामानंद सागर की 'रामायण' में ललिता पवार ने मंथरा का रोल अदा किया। ये वही किरदार था जब घर घर में लोग ललिता पवार से चिढ़ने लगे थे। उनकी एक्टिंग में इतनी सच्चाई होती थी कि वह जीवंत किरदार लगने लगती थी। आज जब दूरदर्शन पर रामायण वापस लौट आया है तो वह फिर चर्चा में हैं।

    English summary
    ramayan manthra lalita pawar birthday slap incident paralysis dead body found at home unknown facts
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