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    'इश्क' to 'कल हो न हो': 6 सालों में कुछ इस तरह बदला प्यार का अंदाज-ए-बयां

    By Neeti
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    28 नवंबर, 1997 में आई फिल्म 'इश्क' ने प्यार को मासूम बना दिया था। जूही चावला, काजोल, आमिर खान और अजय देवगन ने लोगों को हंसाने के साथ साथ मोहब्बत के मासूम चेहरे से रूबरू कराया था। जिस वजह से इस फिल्म ने आज तक लोगों के दिलों में स्पेशल जगह बनाई है।

    वहीं, आज ही के दिन 'इश्क' के ठीक 6 साल बाद रिलीज हुई थी फिल्म 'कल हो न हो'। शाहरूख खान के दिवानों ने भले ही फिल्म देखकर बहुत आंसू बहाए थे, लेकिन फिल्म को आज तक दिल से लगाकर रखा है। रोमांस किंग एक बार फिर जादू कर गए थे। 'कल हो न हो' में शाहरूख ने युवाओं को जिस तरह से दिल की धड़कनों से मिलाया था, उनके चाहने वाले आज भी वह आवाज सुना करते हैं।

    बहरहाल, आज हम यहां आपको इन दो फिल्मों के बीच की मोहब्बत भरी सफर से रूबरू कराने जा रहे हैं। इन 6 सालों में कई ऐसी फिल्में आई, जिसमें प्यार की परिभाषा को नए रूप रंग में सामने रखा।

    तो फिर बढ़ाइए स्लाइडर और देखिए, 6 सालों में कुछ इस तरह बदला प्यार का अंदाज-ए-बयां।

    मासूम प्यार

    मासूम प्यार

    तूफान में बहा है न शोलों में जला है.. घायल हुआ तीरों से न खंजर से कटा है.. कहते हैं जिसे इश्क कयामत है, बला है.. टकराया जो भी इससे वो दुनिया से मिटा है..

    प्यार कितना मासूम हो सकता है, यह हमें फिल्म इश्क में देखने मिला। आमिर, जूही, काजोल और अजय देवगन ने काफी मजेदार ढ़ंग से अपने किरदारों को पेश किया और हंसते हंसाते लोगों को प्यार करना सिखा गए। लेकिन साथ ही यह भी बता डाला कि इश्क में पड़ने वालों के रास्ते में कोई इंसान, कोई दीवार नहीं आ सकती।

    कुछ कुछ होता है (1998)

    कुछ कुछ होता है (1998)

    प्यार दोस्ती है..अगर वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त नहीं बन सकती..तो मैं उससे कभी प्यार कर ही नहीं सकता।

    यह फिल्म प्यार और दोस्ती की ऐसी कहानी थी, जिसे लोग आज भी दिलों में जिंदा रखे हैं। शाहरूख, काजोल और रानी मुखर्जी की इस लव-स्टोरी ने लोगों को प्यार से प्यार करना सिखा दिया। प्यार में दोस्ती कितनी अहम होती है, और जिंदगी में प्यार कितना जरूरी.. यह कुछ कुछ होता है ने उन लाखों करोड़ों युवाओं के बताया, जो इश्क में विश्वास करते हैं। यह फिल्म बॉलीवुड की ट्रेंडसेटर फिल्मों में से एक थी।

    हम दिल दे चुके सनम (1999)

    हम दिल दे चुके सनम (1999)

    प्यार अपनी खुशी में नहीं, बल्कि जिन्हे तुम प्यार करते हो, उनकी खुशी में है..

    'हम दिल दे चुके सनम' ने प्यार की परिभाषा बदलने का काम किया है। इस फिल्म ने लोगों को यह बता दिया कि प्यार सिर्फ पाने का नहीं, देने का नाम है। सलमान खान, ऐश्वर्या राय और अजय देवगन की इस फिल्म में एक ओर मोहब्बत में कमजोर होते भी दिखाया गया है, वहीं दूसरी ओर प्यार को ताकत भी बताया है।

    कहो न प्यार है, मोहब्बतें (2000)

    कहो न प्यार है, मोहब्बतें (2000)

    मोहब्बत में शर्तें नहीं होती, तो अफसोस भी नहीं होना चाहिए..

    साल 2000 में इन दो फिल्मों ने लोगों को प्यार से भिगो कर डाला। एक ओर जहां ऋतिक रोशन और अमिषा पटेल की 'कहो न प्यार है' ने सादगी के साथ प्यार पाने का ढ़ंग दिखाया.. वहीं फिल्म 'मोहब्बतें' ने मोहब्बत की कई परतों से युवाओं को परिचित कराया। मोहब्बतें में जहां प्यार निभाने की हद दिखाई, वहीं उसे पाने के लिए जद्दोजहद करते युवाओं को दुनिया से लड़ते भी दिखाया।

    गदर- एक प्रेम कथा (2001)

    गदर- एक प्रेम कथा (2001)

    साल 2001 में दो फिल्में आईं जिन्होंने फिल्मी इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। एक आमिर खान की फिल्म लगान और दूसरी गदर। सन्नी देओल और अमीषा पटेल की प्रेम कहानी ने लोगों को अपने परिवार से ही नहीं बल्कि मुल्क से लोहा लेना भी सिखाया। सच्चे प्यार के सामने बड़ी से बड़ी ताकत भी नहीं टिक सकती। दो मुल्कों के विभाजन के बीच इस फिल्म में प्यार की मजबूत पहलू को सामने रखा गया था।

    साथिया (2002)

    साथिया (2002)

    इन दो मिनट के लिए मैं दो जन्मों तक भी इंतजार कर सकता हूं....

    विवेक ऑबेराय और रानी मुखर्जी की इस फिल्म को युवाओं ने बहुत पसंद किया था। प्यार की सच्चाई और मासूमियत को दिखाती इस फिल्म ने काफी संजीदगी के साथ प्यार को सामने रखा। इस फिल्म को युवाओं ने खुद से जोड़ कर देखा और दिल में समेट लिया। दो परिवारों की वजह से प्यार में दूरी लाने की बजाए, प्यार को ज्यादा अहम दिखाया है। क्योंकि प्यार में दूरी संभव नहीं। इसमें प्यार की ताकत को दिखाया गया है।

    कल हो न हो (2003)

    कल हो न हो (2003)

    हंसो, जियो, मुस्कराओ.. क्या पता कल हो न हो..

    शाहरूख के चाहने वालों को भले ही 'कल हो न हो' ने खूब रूलाया है। लेकिन उनके चाहने वालों ने आज तक इस फिल्म को दिल में बसा कर रखा है। शाहरूख, प्रीटि जिंटा और सैफ अली खान की इस फिल्म में प्यार को काफी इमोशनल ढ़ंग से पेश किया है। क्या पता कल हो न हो, इसीलिए जो करना है आज इसी पल करना चाहिए। दो दोस्तों को करीब लाने की कोशिश करते इस फिल्म के जरिए प्यार जताने के लिए इंतजार न करने की सीख दे गए शाहरूख। क्योंकि क्या पता ''कल हो न हो''।

    English summary
    Film Ishq and Kal Ho Na Ho released on the same date, i.e, 28 november 1997 and 2003 respectively. But, in these 6 years bollywood romance changed a lot.
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