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कहानी की band:स्टूडेंट ऑफ द इयर, ये 'बच्चे' बोर्ड एक्ज़ाम में पास कैसे हो गए!!!

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[Trisha Gaur] स्टूडेंट ऑफ द इयर, एक ऐसी फिल्म थी जिसे इस देश के युवा वर्ग ने बड़ा पसंद किया। करे भी क्यों, पढ़ना आजकल के बच्चों का स्टाइल ही नहीं। स्टूडेंट ऑफ द इयर कहानी थी कई दोस्तों की। गैंग के मुखिया थे अभिमन्यु (सिद्धार्थ मल्होत्रा), रोहन नंदा (वरूण धवन) और शनाया सिंघानिया (आलिया भट्ट)। ये सब एक अजीब से स्कूल में पढ़ते थे जिसके डीन थे ऋषि कपूर और एक कोच थे रोनित रॉय। इसके अलावा स्कूल में कोई टीचर भी नहीं दिखा। खैर फिल्म में कुछ मज़ेदार ट्विस्ट थे जिसकी वजह से बच्चों को फिल्म पसंद पर हमारे साथ ज़रा सोचिए कि यूं होता तो क्या होता और बजाइये स्टूडेंट ऑफ द ईयर की बैंड!

अगर अभिमन्यु को नहीं मिलती स्कॉलरशिप

अगर अभिमन्यु को नहीं मिलती स्कॉलरशिप

अगर अभी को स्कॉलरशिप नहीं मिलती तो वो सात जनम में भी इतना महंगा स्कूल अफॉर्ड नहीं कर पाता। थैंक गॉ़ड की मिडिल क्लास बच्चे फुटबॉल टाइप गेम्स बहुत खेलते हैं। वरना अभी को स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप नहीं मिलती। ऐसे में न तो वो स्कूल पहुंचता न शनाया और रोहन से मिलता। मतलब नो लव ट्राएंगल और बज जाती कहानी की बैंड।

अगर कोच भी डीन की तरह 'वो' होते

अगर कोच भी डीन की तरह 'वो' होते

फिल्म में ऋषि कपूर को एक अजीब टाइप का गे किरदार मिला जिसे उन्होंने उतने ही अजीब तरीके से निभाया है। वो हरदम कोच रोनित पर फिदा रहते हैं। मान लीजिए अगर रोनित भी डीन की ही तरह होते तो आप एक हैप्पी और 'गे' लव स्टोरी तो नहीं देखते और बज जाती कहानी की बैंड।

डिब्बे का गंगाजल छिड़कने की बजाय कुछ और करते

डिब्बे का गंगाजल छिड़कने की बजाय कुछ और करते

आजकल बॉलीवुड में भी कोरियन फिल्मों की तरह ऐसे दृश्य दिखाने का चलन चला है कि आदमी को घिन आ जाए। मसलन मैं हूं ना में थूक, हैप्पी न्यू ईयर में उल्टी...ewwww। तो मान लीजिए कि जिस सीन में सिद्धार्थ ने सुसु भेजा टेस्ट करने उसे रोनित ने गंगाजल मानकर छिड़क लिया पर गंगाजल मान कर पी वी गए होते कुछ और कर लेते तो पक्का बज जाती कहानी की बैंड।

इस स्कूल में कभी हिंदू संगठन ने रेड की होती

इस स्कूल में कभी हिंदू संगठन ने रेड की होती

जिस तरह की हरकतें इस स्कूल में बच्चों ने की है, वो हरकतें बच्चे तो नहीं करते। मान लीजिए कि इनकी ऐसी हरकतों पर RSS या विहिप ने धावा बोल दिया होता तो कहानी में ट्विस्ट और कीर्तन करती शनाया और सोनिया मतलब पक्का कहानी की बैंड!

सच में शनाया प्रेग्नेंट होती

सच में शनाया प्रेग्नेंट होती

एक सीन में मां बाप का अटेंशन पाने के लिए शनाया कहती है कि वो मां बनने वाली है। अगर वो सच में मां बनने वाली होती तो। क्योंकि हरकतें भी तो इन बच्चों की काफी ओपेन थीं ना। तो या तो कहानी सीरियस मुद्दे पर जाती या फिर लड़का लड़की भाग जाते। विजेयता पंडित और कुमार गौरव की लव स्टोरी....नहीं$$$$ कहानी की बैंड!

अभी पहले ही फिसल जाता

अभी पहले ही फिसल जाता

फिल्म में शनाया और अभी रोहन को सबक सिखाने के लिए उसे जलाते हैं। पर अगर अभी सच में शनाया पर चांस मार लेता तो उसे पड़ता एक थप्पड़ नो दोस्ती, नो प्यार...बोरिंग दाल चावल टाइप एकता कपूर सीरियल.....मतलब कहानी की बैंड।

सच में अभी - रोहन किस कर लेते

सच में अभी - रोहन किस कर लेते

अभी और रोहन बेस्ट फ्रेंड्स थे और कई सीन में एक दूसरे का दुख बांटते देखे जाते हैं फिर दोनों कहते हैं अब तू किस तो नहीं करेगा। मान लीजिए इनके बीच कुछ कुछ हो जाता...तो डीन और कोच, अभी और रोहन की लव स्टोरी में शनाया का एंगल बिल्कुल....बेचारी आलिया हमारे साथ मिलकर बजातीं कहानी की बैंड

अगर पहेलियां नहीं सुलझती

अगर पहेलियां नहीं सुलझती

फिल्म में एक कॉम्पिटीशन है स्टूडेंट ऑफ द इयर। जिसके पहले पार्ट में ये बच्चे पहेलियां सुलझाते। पर पहेलियां तो मिडिल क्लास बच्चे पढ़ते हैं। अब मान लीजिए ये बच्चे इतनी कठिन पहेलियां सुलझा ही नहीं पाते तो। तो सब होते कॉम्पिटीशन के बाहर और बोर्ड एक्ज़ाम की तैयारी करते। वैसे आपने नोटिस किया कि ये बच्चे 12th में थे पर बिना पढ़े ही सब पास हो गए। खैर सब पढ़ाई करते तो बच्चे ही बजा देते कहानी की बैंड

अगर ये दोनों किस करते पकड़े नहीं जाते

अगर ये दोनों किस करते पकड़े नहीं जाते

अगर अभी और शनाया किस करते पकड़े नहीं जाते तो रोहन को दोनों बड़े प्यार से और आराम से अपने प्यार का लॉलीपॉप खिलाते। शनाया तो कॉम्पिटीशन से बाहर ही हो गई थी, अभी भी हार जाता और ट्रॉफी होती रोहन की। एक के पास लड़की, एक के पास मेडल...कूल...tch tch...बज जाती कहानी की बैंड

अगर रोहन नहीं बनता स्टूडेंट ऑफ द ईयर

अगर रोहन नहीं बनता स्टूडेंट ऑफ द ईयर

अगर रोहन नहीं जीतता तो वो डिप्रेशन में चला जाता। यो तो वो उस दूसरी हॉट लड़की के साथ सेट हो जाता जो कुछ कुछ होता है में शाहरूख की बेटी थी ;) या तो वो शनाया के प्यार में देवदास बन जाता। डर का शाहरूख बनकर शशशशशशनाया भी कर सकता था। या जीत का सना देओल बनकर अभी से बदला...खैर किसी भी एंगल से बजती तो कहानी की ही बैंड

अगर स्कूल नॉर्मल होता

अगर स्कूल नॉर्मल होता

बस ये फाइनल... सोचिए ये स्कूल एक नॉर्मल स्कूल होता जहां बच्चे वही करने आते जो अमूमन स्कूलों में होता है...जहां क्लास का मतलब होता एक ब्लैकबोर्ड वाला कमरा और जहां पार्किंग में बच्चों की साइकिलें पार्क होतीं मर्सि़डीज़ नहीं। तो बच्चे फर्जी इस फिल्म को देखकर फील नहीं लेते...हर स्कूल की श्रेया शनाया टाइप फील न करती..इस केस में तो कहानी की बैंड ही बैंड!

 
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    English summary
    Student of the year was an out and out Youth Anthem of the country. And Yes they loved it but for instance let us twist the twists a bit. It's Fun. Trust us and join the laughter riot!

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