सत्यमेव जयते: डॉक्टर नहीं मौत के सौदागर

1- आमिर खान के शो में आये मेजर ए राय ने जब अपनी पत्नी की मौत का किस्सा सुनाया तो उनकी बेटी की आंखों में आंसू उनके दर्द को साफ बयां कर रहे थे। मेजर राय ने बताया कि उनकी पत्नी सीमा की तबियत खराब हुई और वो उन्हें प्राइवेट अस्पताल ले गये। वहां डॉक्टरों ने लीवर ट्रांसप्लांट के लिए बोल दिया।
मेजर राय की बेटी ने बताया कि दूसरे दिन डॉक्टरों ने कहा कि पैंक्रियास भी ट्रांसप्लांट करने पड़ेंगे। उनकी बेटी सुबह पहुंची तो डॉक्टरों ने एक फॉर्म थमाया और सिगनेचर ले लिये। परिवार वालों के पहुंचने से पहले ही डॉक्टरों ने ऑपरेशन शुरू कर दिया। अंत में डॉक्टर आया और बोला आईएम सॉरी। इस केस में अस्पताल का बिल 8 लाख रुपए बना। मेजर राय का यह केस कोर्ट में चल रहा है।
आमिर ने इंग्लैंड के एक डॉक्टर अमोल पंडित से उनका भारत आने का अनुभव शेयर किया। डॉक्टर अमोल कैंसर से सम्बन्धित अपने उन इलाजों के लिए जाने जाते हैं जो हर डॉक्टर नहीं कर सकता। कुछ साल पहले वो वापस भारत वापस आकर अपने देश के लोगों को अपनी सेवाएं देना चाहते थे पर यहां कि परिस्थिति को देखकर उन्होंन वापस इंग्लैंड जाना ही उचित समझा। आमिर से अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए उन्होंन कहा कि भारत में आने के बाद जब उन्होंने यहां के डॉक्टर्स से कांटेक्ट किया तो उन डॉक्टर्स ने अमोल पंडित से किसी मरीज को रिफर करने के लिए उनके ऑपरेशन पर हुए खर्च का 30-40 प्रतिशत उन्हें देने को कहा। यही नहीं बल्कि जब डॉक्टर अमोल ने कुछ बड़े हॉस्पिटल्स में कांटेक्ट किया तब वहां भी उन्हे कुछ ऐसे ही हालातों का सामना हुआ आखिरकार डॉक्टर अमोल ने वापस इंग्लैंड जाने का ही फैसला किया।
इसके बाद आमिर ने रुबरु कराया आंध्रा प्रदेश में औरतों के साथ उनके स्वास्थय का बहाना कर किए गए खिलवाड़ से। आंध्रा में अधिकांश औरतों के गर्भाशय यह कहकर निकाल दिया गया कि अगर ये ऑपरेशन नहीं किया गया तो उनकी जान भी जा सकती है। इसी केस के मद्देनज़र आमिर ने एक गायनाकॉलोजिस्ट डॉक्टर बेदी से बात की तो ये सच सामने आया कि सिर्फ कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसके होने पर औरत के गर्भाशय को निकालने की जरुरत पड़े। उन्होंने ये भी कहा कि एक ही गांव की इतनी औरतों को एक साथ कैंसर हो ये तो संभव ही नहीं।
मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया जो कि डॉक्टर्स के वर्क की निगरानी के लिए जिम्मेदार है के हेड मेजर जनरल जंदल के बारे में भी बताया जिनके ऊपर रिश्वत लेने के आरोप में केस चल रहा है। और इस समय उनकी जगह एम सी आई के हेड का कार्यभार स्भाल रहे मिस्टर के के तलवार से कोर्ट ऑफ मेडिकल एथिक्स को लेकर भी चर्चा की।
आमिर ने बताया कि आर टी आई एक्ट के तहत सत्यमेव जयते की टीम ने एक सवाल पूछा कि पिछले 50 सालों में भारत के कितने ऐसे डॉक्टर्स हैं जिनके गलत तरीकों की वजह से उनका मेडिकल लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। इस सवाल के जवाब में उन्हें सिर्फ ये जवाब मिला कि 2008 से लेकर अब तक किसी भी डॉक्टर का लाइसेंस रद्द नहीं किया गया है, जबकि इसी सवाल के जवाब में इग्लैंड की सरकार का जवाब था कि 2008 में कुल 42, 2009 में 68 और 2010 में 73 डॉक्टर्स के लाइसेंस रद्द किये गए थे।
गवर्नमेंट और प्राइवेट हॉस्पिटलों की तुलना करते हुए आमिर ने ये बताया कि आजादी से पहले जहां कुल 20 गवर्नमेंट और 1 प्राइवेट हॉस्पिटल था वहीं 2001 में गवर्नमेंट हॉस्पिटल की संख्या 32और प्राइवेट हॉस्पिटल की संख्या 106 हो गई। इस तरह गरीबों की पहुंच से स्वास्थय सेवाएं और दूर हो गईं। इस संदर्भ में उन्होंने डॉक्टर गुलाटी से भी बात की। डॉक्टर गुलाटी के अनुसार स्वास्थय सेवाएं सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्टुडियो में मौजूद मेडिकल स्टूडेंट्स से ये भी कहा कि मेडिसिन के प्रोफेशन में आपका पहला मकसद लोगों की सेवा होना चाहिए।
आमिर ने दवाईयों के महंगे होने के राज़ पर से भी पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि जो दवाईयां हमें हज़ारों रुपये ख़र्च करके मिलती है असल में उसकी कीमत बहुत कम होती है। इस बात पर रोशनी डालने के लिए स्टूडियो मे डॉक्टर शेट्टी को भी बुलाया गया और उन्होंने जो सच बताया उसे सुनकर आमिर भी आश्चर्य चकित रह गए। उन्होंने बताया कि कैंसर की जो दवाईयां हमें एक से सवा लाख रुपये में मिलती है उसकी पूरी लागत और पैकैजिंग के बाद भी उसका मूल्य दस से ग्यारह हज़ार रुपये मात्र होती है।
इसतरह आज के एपिसोड में आमिर ने भारत देश में लोगों के स्वास्थय के साथ हो रहे खिलवाड़ पर से परदा उठाया। उन्होंने सरकार द्वारा प्रदान की जा रहीं स्वास्थय सेवाओं की वो तस्वीर भी दिखाई जिसे देखकर शायद सरकार खुद भब शर्मसार हो उठ्गी।


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