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    घरों को तोड़ रहे सास-बहू के सीरियल

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    नयी दिल्ली। सास बहू के संबंधों को आधार बनाकर मनोरंजन चैनलों पर इन दिनों कई धारावाहिकों का प्रसारण हो रहा है जिनमें कुछ में इन रिश्तों के बीच के तनाव को दिखाया गया है तो कुछ में रिश्तों को व्यंग्यात्मक तरीके से पेश किया गया है। लेकिन विभिन्न सर्वेक्षणों और शोधों में यह बात सामने आयी है कि संयुक्त परिवारों में तनाव का 60 फीसदी कारण सास बहू के बीच का रिश्ता होता है और इस प्रकार के कार्यक्रम परिवार में तनाव को बढ़ा रहे हैं।

    इन दिनों स्टार प्लस का प्रतिग्या, ये रिश्ता क्या कहलाता है, साथिया साथ निभाना, ससुराल गेंदा फूल, कलर्स पर बालिका वधू, ना आना इस देश लाडो, उतरन, सोनी पर सास बिना ससुराल, जी टीवी पर मिसेज कौशिक की पांच बहुएं और यहां मैं घर घर खेली तथा ससुराल सिमर का मै इन दो व्यक्तित्वों के बीच के संबंध की विभिन्न कोणों से व्याख्या करने की कोशिश की जा रही है। इस प्रकार के धारावाहिकों को प्रतिबंधित करने के संबंध में पूछे जाने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है लेकिन इन धारावाहिकों को लेकर मंत्रालय को किसी प्रकार की शिकायत नहीं मिली है।

    अमेरिका और ब्रिटेन में पिछले दिनों काफी चर्चा का विषय बनी किताब वाट डू यू वांट फ्रोम मी में कैम्बि्रज यूनिवर्सिटी की मनोचिकित्सक टेरी एप्टर ने सास बहू के रिश्ते के विभिन्न आयामों का विश्लेषण किया। टेरी ने इसके लिए 20 साल तक शोध किया और विभिन्न देशों की महिलाओं से बातचीत की। टेरी ने विभिन्न देशों में हजारों महिलाओं से उनके अनुभव सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि 60 फीसदी महिलाएं यह महसूस करती हैं कि सास के साथ तनाव के चलते वे दीर्घकालिक तनाव की शिकार हो गयी हैं।

    English summary
    Saas-Bahu Serials on Television are making bad impact on relationships in many families all over World.
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