एचोसैम ने टीवी पर कराया सर्वेक्षण

एसोचैम के इस अध्ययन में 6 से 17 साल के 2000 से अधिक बच्चों और लगभग 3000 माता-पिता से पूछताछ की गई। सर्वे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, पटना और चंडीगढ़ सहित कई शहरों में किए गए। एसौचैम के महासचिव ने कहा कि अधिक टीवी देखने का पढ़ाई पर होने वाला असर अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
अध्ययन में पता चला है कि रोजाना 3 घंटे टीवी देखने वाले वयस्क में रोजाना 1 घंटे से कम टीवी देखने वाले वयस्क की तुलना में थुलथुल होने की संभावना अधिक होती है। अधिकतर अभिभावकों ने बताया कि टीवी देखते समय बच्चे सुस्त होते हैं और प्राय: कुछ खाते रहते हैं।
करीब 90 फीसदी अभिभावक मानते हैं कि प्राइम टाइम पर आने वाले कार्यक्रम में अत्यधिक खराब भाषा का इस्तेमाल हो रहा है।
बहुत सारे बच्चों ने बताया कि जब वे अकेले टीवी देखते हैं तो वे कार्यक्रम नहीं देखते हैं जो वे माता-पिता के सामने देखते हैं। इसी तरह 76 फीसदी बच्चों ने रिएलिटी शो को पसंद करने की बात कही। अधिकतर अभिभावकों ने टीवी कार्यक्रमों में कामुकता और हिंसा को कम करने वाले नियमों का समर्थन किया। सर्वेक्षण ने टीवी कार्यक्रमों को युवाओं की 10 फीसदी हिंसक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


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