प्यार करने वालों को क्यों मिलती है सजा ए मौत: सत्यमेव जयते

दोस्तों शो में उठाया गया ये मुद्दा एक बार फिर उस समाज को कठघरे में खड़ा करता नजर आया जहां मुहब्बत करने वालों को पंचायत मौत की सजा सुनाती है। भले ही आज लोग अपने को मॉडन कह रहे हैं लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है उनकी सोच आज भी वही पुरानी है जो आज से 20 साल पहले हुआ करती थी।
शो में ये बात उठाई गयी की जब 18 साल का युवक देश का प्रधानमंत्री चुन सकता है तो फिर वो अपना जीवन साथी क्यों नहीं चुन सकता।
शो की शुरुआत हुई झांसी के रहने वाले लोकेंद्र और शर्मिला की मुहब्बत भरी दास्तां से जहां दोनों अपनी आप बीती बताते बताते एकदम रो पड़े। दोनों को प्यार हुआ। साथ जीने-मरने की कसमें खाई। लोगों को, परिवार वालों को पता चला तोवो सभी लोग उनके दुश्मन बन गए। शो के दौरान दोनों ने आधुनिक समाज से सवाल किया कि आखिर क्यों है वो दुश्मन मुहब्बत करने वालों का क्या गुनाह है मुहब्बत?
साथ ही शो में आज बात हुई हरियाणा के मनोज-बबली प्रकरण की । जहां खाप ने इन्हें मुहब्बत करने पर ऐसी बेरहम सजा सुनाई जिससे इंसान और इंसानियत जैसा शब्द दागदार हो गया । आपको बताते चलें की दोनों का अपहरण कर उन्हें बेरहमी के साथ मौत के घाट उतार दिया गया था।
शो में दोनों के परिजनों के अलावा हरियाणा के कुछ खाप-प्रमुखों को भी बुलाया गया। मनोज के घरवालों ने अपना दर्द पेश करते हुए आम जनता को अपनी आप-बीती सुनाई और बताया कि कैसे आज भी उन्हें समाज के जुल्मों सितम का सामना करना पड़ता है।
शो में उपस्थित खाप के सदस्यों ने अपने बारे में जानकारी देने के अलावा खाप के अस्तित्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारे यहां लोग अनपढ़ होते हैं, उन्हें कानून नहीं पता होता। वे केवल समाज का कानून जानते हैं और उसे ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि परंपराओं को बनाए रखना ही खाप की जिम्मेदारी है। जो परंपराएं तोड़ेगा उसे सजा मिलेगी।
हालांकि खाप प्रमुखों ने यह कहा कि सजा के तौर पर गांव निकाला ही अक्सर दिया जाता है, लेकिन मौत की सजा नहीं सुनाई जाती। मनोज-बबली मामले पर उन्होंने कहा, मनोज-बबली ने निश्चित तौर पर समाज की परंपराओं को तोड़ा था। उन्होंने काम-भावना के चक्कर में गलत काम किया।' क्या खाप को भारतीय कानून और संविधान का इल्म है? इस पर खाप प्रमुखों का तर्क रहा कि उनका समाज कानून पढ़ना नहीं जानता।
शो में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाक्टर चौधरी, जिन्होंने इस मसले पर किताब लिखी है, कहा कि परंपराओं का सम्मान ठीक है, लेकिन परंपराएं यदि समय के साथ नहीं बदलती हैं तो जमा हुए पानी की तरह सड़ान पैदा करती हैं। उन्होंने खाप के सदस्यों को एक सन्देश देते हुए कहा कि खाप के लोगों को इस अंतर को समझना होगा, जिसे वे अब तक समझने में नाकाम रहे हैं साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि आज लोगों में मुहब्बत को देखने का नजरिया बदल चुका है।


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