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आखिर शाहरुख की जात है क्या- ये है बकरापुर फिल्म रिव्यू

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स्टार- 2
निर्माता- रमेश एस अरुणांचलम
निर्देशक- जानकी विश्वनाथन
कलाकार- अंशुमान झा, योशिका वर्मा और सुरुची औलख
संगीत- अग्नि बैंड

भारत एक ऐसा देश है जहां पर धर्म मजहब के नाम पर हमेशा ही झगड़े हुए हैं। खासतौर पर हिंदु और मुसलमान तो हमेशा से ही एक दूसरे के खून के प्यासे रहे हैं। अभी तक तो बॉलीवुड के फिल्मकारों ने इन मजहबों के इंसानों को लेकर ही फिल्में बनाई हैं और इन फिल्मों ने अक्सर विवादों में घिरकर काफी नाम भी कमाया है। लेकिन जानकी विश्वनाथन ने अपने निर्देशन में पहली बार ऐसी फिल्म बनाई है जिसमें एक बकरे के मजहब और उसके धर्म को लेकर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जंग छिड़ जाती है। ये है बकरापुर में दिखाया गया है कि किस तरह से इंसानों को तो अभी तक मजहब के नाम पर बांटा ही था लेकिन अब जानवरों के भी धर्म और मजहब का बंटवारा होने लगा। लोगों की मानसिकता को बड़ी ही खूबसूरती और कड़वे तौर पर ये है बकरापुर में दिखाया गया है।

'ये है बकरापुर' की कहानी है एक बकरे की जिसका नाम है शाहरुख। शाहरुख जुल्फी नाम के लड़के के घर में रहता है। जुल्फी शाहरुख से बेहद प्यार करता है। लेकिन एक दिन जुल्फी के परिवार वाले शाहरुख को बेचकर अपना कुछ कर्जा चुकाने का फैसला करते हैं और जुल्फी इस खबर को सुनकर काफी परेशान और दुखी हो जाता है। जुल्फी शाहरुख को बचाने के लिए जफर (आयुष्मान झा) की मदद लेता है। जफर शाहरुख के ऊपर अरबी भाषा में अल्लाह लिख देता है और जब लोग शाहरुख के ऊपर लिखे अल्लाह को देखते हैं तो उन्हें लगता हे कि शाहरुख अल्लाह का बंदा है।

शाहरुख पूरे गांव में मशहूर हो जाता है और एक तरफ हिंदु शाहरुख को अपने साथ रखने के लिए तैयार होते हैं तो वहीं मुसलमान कहते हैं कि शाहरुख उनके मजहब का है और वो उनके साथ ही रहना चाहिए। जुल्फी और मुसीबत में फंस जाता है। अपने शाहरुख को बचाने के लिए जुल्फी क्या क्या करता है और किन मुश्किलों का सामना करता है ये जानने के लिए तो आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

फिल्म से जुड़ी कुछ खास बातें इस तरह हैं-

निर्देशन

निर्देशन

ये है बकरापुर के निर्देशन की बात करें तो जानकी विश्वनाथन एक बहुत ही अलग हटकर फिल्म की कहानी लेकर आई हैं। लेकिन वो फिल्म की कहानी के साथ पूरा न्याय करने से कहीं ना कहीं चूक गयीं। फिल्म का निर्देशन काफी निराशाजनक रहा।

कहानी

कहानी

बकरापुर की कहानी ही फिल्म का एकमात्र पॉजिटिव प्वाइँट है। एक बकरे के मजहब को लेकर विवाद, ये एक ऐसी कहानी है जो कि अपने अंदर हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई को दिखाता है।

अभिनय

अभिनय

अभिनय की बात करें तो अंशुमान झा, योशिका वर्मा और सुरुची औलख ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। आसिफ बसरा, फैज खान ने भी बेहतरीन परफॉर्मेंस देने की कोशिश की है। कुल मिलाकर कलाकारों की अदाकारी में कोई कमी देखने को नहीं मिली।

संगीत

संगीत

ये है बकरापुर जिस तरह की फिल्म है ऐसी फिल्मों में संगीत की जरुरत ना के बराबर होती है। लेकिन अग्नि बैंड ने फिल्म में अच्छा संगीत दिया है।

देखें या नहीं

देखें या नहीं

फिल्म को देखे या नहीं ये तो कहना थोड़ा़ मुश्किल है क्योंकि फिल्म की कहानी बहुत ही जबरदस्त है। हालांकि फिल्म के साथ पूरा न्याय नहीं किया जा सका लेकिन हल्की फुल्की कॉमेडी के रुप में एक बार तो फिल्म देखी जा सकती है।

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    English summary
    Yeh Hai Bakrapur movie revolves around one goat name Shahrukh. Shahrukh lives with Julfi and Juldi love Shahrukh so much. One day Julfi parents decides to sell Shahrukh to returns their debt. Julfi takes hap from his friend and Shahrukh becomes messenger of Allah. 

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