त्रिभंग फिल्म रिव्यू- 'टेढ़े- मेढ़े' रिश्ते और जरूरी मुद्दों के साथ दिल जीत लेती हैं रेणुका शहाणे
निर्देशक- रेणुका शहाणे
कलाकार- काजोल, तन्वी आज़मी, मिथिला पालकर, कुणाल रॉय कपूर
प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स
अपनी मां के बारे में बात करते हुए अनुराधा (काजोल) कहती है, "वो अभंग है.. अजीब है, लेकिन जीनियस है तो थोड़ी अजीब होगी ही.. मेरी माशा है समभंग, पूरी तरह से बैलेंस, और मैं टेढी मेढ़ी क्रेजी लेकिन सेक्सी.. त्रिभंग.."

अचानक हुई एक घटना की वजह से एक टूटे परिवार की तीन पीढ़ियों की महिलाएं साथ आती हैं और यहां उन्हें मौका मिलता है भागती जिंदगी में पीछे मुड़कर देखने का- अपने रिश्तों को, अपने फैसलों को, एक दूसरे के बारे में अपने विचारों को। क्या वो हमेशा सही थे? रेणुका शहाणे की 'त्रिभंग' इन्हीं मां- बेटी के बनते बिगड़ते रिश्तों की कहानी कहती है। साथ ही साथ फिल्म में कई सामाजिक मुद्दों को भी जगह दी गई है।
[नृत्य के संदर्भ में त्रिभंग एक मुद्रा है, जिसमें शरीर तीन (त्रि) स्थानों गले, धड़ और घुटने पर मुड़ा (भंग) होता है।]


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