समीक्षा: बहुत कुछ कहती है 'द लाइट- स्वामी विवेकानंद'
द लाइट : स्वामी विवेकानंद
बैनर : ट्रायकलर प्रोडकशन्स प्रा.लि.
निर्देशक : उत्पल (टूटू) सिन्हा
संगीत : डॉ. हरिचरण वर्मा
कलाकार : दीप भट्टाचार्य, गार्गी रॉयचौधरी, प्रेमांकुर चट्टोपाध्याय, कर्टनी स्टीफंस, विश्वजीत चक्रवर्ती, पियाली मित्रा, अर्चिता साहू
समीक्षा: अगर आज का युवा मन में कुछ करने की ठान ले तो वह जीवन में हर वह चीज पा सकता है जिसे पाने की वो इच्छा रखता है। बशर्ते उसकी सोच सही दिशा में और प्रयास सकारात्मक हो। युवाओं के मार्गदर्शक स्वामी विवेकानंद के बारे में सही रूप से जानने की जरूरत है देश और समाज को। इन्हीं बातों को खूबसूरती से दिखाने की कोशिश की गयी है फिल्म द लाइट : स्वामी विवेकानंद में।
स्वामी विवेकानंद के बचपन से लेकर उनके जीवन के अनमोल क्षण को पूरे प्रभावशाली ढंग से दिखाने की कोशिश की है निर्देशक उत्पल (टूटू) सिन्हा ने जिसमें वह काफी हद तक सफल हुए हैं तो फिल्म के कुछ दृश्य वाकई में दिल पर दस्तक देते हैं जिसके लिए उत्पल बधाई के पात्र हैं। फिल्म में विवेकानंद का किरदार निभाने वाले दीप भट्टाचार्य ने जिस खूबसूरती से इतना चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया है वह वाकई में तारीफ के काबिल है। उनकी चाल-ढाल, बोलने का अंदाज सब कुछ दिल को छूता है जिससे कभी-कभी देखने वाले को एक पल के लिए लगने लगता है कि वाकई में वह स्वामी जी से ही बात कर रहा है। दीप के अभिनय में उनका थियेटर वाला अंदाज दिखायी पड़ता है जो कि उनके लिए सकारात्मक पहलू है जो कि उन्हें आगे उन्नति के शिखर ले जायेगा।
नरेन्द्र नाथ दत्त से स्वामी विवेकानंद बनने तक की यात्रा को दीप ने बखूबी निभाया है। तो वही रामकृष्णपरमहंस के किरदार में प्रेमांकुर चट्टोपाध्याय ने भी अपना असर छोड़ा है तो वहीं विवेकानंद की बहन का किरदार पियाली मित्रा ने ठीक-ठाक है को मोइना बाई के किरदार में अर्चिता साहू ने जान फूंक दी है। संगीत प्रभावशाली है तो संवाद मार्मिक। कुल मिलाकर आज के युवावर्ग के दिगभ्रमित होने से बचाती है द लाइट : स्वामी विवेकानंद। इसलिए एक बार फिल्म देखने जरूर जाना चाहिए लेकिन सिर्फ उनको जो मनोरंजन को ज्ञान से जोड़ते हैं।


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