शुद्ध देसी रोमांस में है रोमांस, शादी और कंफ्यूजन- फिल्म रिव्यू

रघुराम (सुशांत सिंह राजपूत) की शादी के फिल्म की शुरुआत होती है। तारा (वाणी कपूर) वो लड़की है जिससे रघू की शादी तय होती हैा। गायत्री एक बारातियों और बारात का इंतजाम करने वाले ठेकेदार ताउजी (ऋषी कपूर) के यहां काम करती है और रघु की शादी में उसकी बहन बनकर जाती है। रास्ते में रघू, गायत्री से अपने दिल की बात शेयर करता है और कहता है कि वो शादी नहीं करना चाहता। कंफ्यूज्ड है। फिर शादी के मंडप पर से रघू बिना किसी को बताए भाग जाता है। भागकर रघू वापस जयपुर जाता है जहां पर उसकी मुलाकात फिर से गायत्री से होती है और वो उसे कहता है कि वो उससे प्यार करता है। रघू, गायत्री से कहता है कि वो दोनों साथ में रहते हैं। गायत्री और रघू दोनों साथ में रहने लगते हैं और एक दिन शादी का फैसला करते हैं लेकिन शादी के दिन गायत्री रघू को छोड़कर भाग जाती है।
रघू की मुलाकात वापस तारा से होती है और वो और तारा एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं लेकिन शादी के बारे में नहीं सोचते। एक दिन फिर से रघू शादी के बारे में सोचता है और तारा को प्रपोज करने का फैसला करता है लेकिन कुछ ऐसा होता है कि फिर से रघू की शादी नहीं हो पाती।


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