'शंघाई' है भारत की अनदेखी तस्वीर-रिव्यू

निर्देशकः दिबाकर बैनर्जी
संगीतः विशाल शेखऱ
कलाकारः इमरान हाशमी, कल्की,प्रसेनजीत चैटरजी, अभय देओल
पॉलिटिक्स, बेईमानी, और खोती इंसानियत कुछ यही दिखाने की कोशिश की है शंघाई के निर्देशक दिबाकर ने। भारत की गंदी राजनीति की तह तक जाकर दिबाकर ने उस सच की तस्वीर दिखाई है जहां से गुज़रा हर कोई है पर वहां रुककर किसी ने उस गंदगी को साफ करने की कोशिश नहीं की। साथ ही फिल्म के कलाकारों के उम्दा अभिनय ने दिबाकर की इस कोशिश का पूरा साथ दिया है।
फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार हैः
फिल्म की शुरुआत होती है भारत के एक ऐसे राज्य से जहां पर इलेक्शन शुरु होने जा रहे हैं। उसी राज्य का एक बहुत ही ईमानदार और सम्माननीय समाज सेवी डॉक्टर एहमदी (प्रसेनजीत चैटरजी) वहां की सरकार पर इल्जाम लगाते हुए कहता है कि सरकार एक एसईज़ी प्रोजेक्ट के लिए ज़मीन का बहुत ही बड़ा हिस्सा प्रयोग कर रही है वो भी वहां पर रह रहे लोगों को बिना मुनासिब मुआवज़ा दिए।
डॉक्टर एहमदी एक जनसभा के दौरान अचानक ही एक दुर्घटना में मारा जाता है। शालिनी (कल्की)कहती है कि यह एक दुर्घटना नहीं बल्कि एक सोची समझी साजिश है। उसी समय जोगीन्दर परमार ( इमरान हाशमी) यह दावा करता है कि उसके पास ऐसा सबूत है जिससे ये साबित होता है कि डॉक्टर एहमदी का खून कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक साजिश है और ये सबूत सरकार के लिए भी मुसीबत बन सकता है।
सरकार द्वारा एक आई ए एस ऑफिसर (अभय देओल) इस मामले की छानबीन के लिए बुलाया जाता है और फिर ये तीनों शालिनी, जोगिन्दर परमार और आई एस ऑफिसर मिलकर सच की इस लड़ाई में शामिल हो जाते हैं।
जिंदगी ना मिलेगी दोबारा में एक रिश्तों की उलझनों में उलझे हुए किरदार को निभाने के बाद अब शंघाई में देश के बेईमान पॉलिटीशियन के खिलाफ खड़े एक जिम्मेदार ऑफिसर के रोल में अभय ने अपनी एक्टिंग से सभी को चौंका दिया है। इसके अलावा एक पोर्न फिल्मकार के रोल में इमरान हाशमी ने अपने फिल्मी करियर का अब तक का सबसे बेहतरीन अभिनय दिखाया है।
एक आदर्शवादी और सच के लिए कुछ भी कर सकने वाली लड़की के रोल में ये साबित कर दिया कि उनसे बेहतर इस किरदार को कोई और नहीं कर सकता था। उनके उत्तेजक किसिंग सीन, सच के प्रति जुनून ये सब उनके अन्दर की एक अच्छी अभिनय क्षमता को दिखाता है।
फिल्म के गाने फिल्म में निर्देशक की सोच को और बेहतर तरीके से दर्शाते हैं। खासतौर पर भारत माता की जय गाना भारत की वर्तमान स्थिति पर करारा वयंग्य करते हुए एक पॉलिटिक्स के गंदे खेल की तस्वीर हमारे सामने रख देता है।
अपने बेहतरीन निर्देशन और दिल को छू देने वाले किरदार के साथ फिल्म शंघाई एक भारतीय के लिए देखनेयोग्य है। फिल्म के अंत में शालिनी और क्रिश्नन किरदार दर्शकों पर अपनी एक न मिटने सकने वाली छाप छोड़ते हैं। फिल्म का कोई भी पहलू निर्देशक से अनछुआ नहीं रहा है।


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