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Review - पेपर पर अच्छी कहानी लेकिन स्क्रीन पर सिर्फ निराशा और कन्फ्यूजन

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1.5/5

कास्ट- रवीना टंडन, अर्पिता चटर्जी, आशीष बिष्ट, गौरव नंदा
डायरेक्टर -ओनीर
प्रोड्यूसर - ओनीर, संजय सूरी
लेखक - ओनीर, मेरले क्रोगर
शानदार पॉइंट -कुछ भी नहीं
निगेटिव पॉइंट - स्क्रीनप्ले, डायरेक्शन
शानदार मोमेंट -कुछ भी नहीं

प्लॉट

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एक नौजवान लड़का मोहन (आशीष बिष्ट) गढ़वाल का रहने वाला है जो मॉडल बनने के सपने लिए दिल्ली आता है। वो सीधे मॉ़डलिंग कॉम्पिटिशन में भाग लेता है जहां उससे अजीबो गरीब सवाल पूछे जाते हैं कि उसे क्यों ये प्रतियोगिता जीतनी चाहिए। मोहन कहता है कि उसकी स्माइल उसकी सबसे बड़ी संपत्ती है। उसके इस जवाब से जज की टीम गुस्सा हो जाती है और सोशलाइट सोनल मोदी (रवीना टंडन) भी चिढ़ जाती है।

प्लॉट

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किस्मत कहें या कुछ और, मोहन सोनल के विजिटिंग कार्ड के जरिए उस तक पहुंचता है। वो उसे घर पर बुलाती है जहां वो पहले से सेक्सी नाइटगाउन में होती और उसे रिझाने का पूरा प्रयास करती है। इसके बाद वो मोहन के हाथों में कुछ कैश रखकर उसका नामाकरण अफजर रखती है, अफजर उसकी हाथों का खिलौना जिसे पूरी दुनिया को वो अपना ट्रेनर बताती है।इसके साथ ही पैरेलेल ट्रैक पर एक और कहानी है रैना (अर्पिता चटर्जी) की जो दोहरा जिंदगी जी रही होती है और उसका एक सीक्रेट है। उसका बॉस नील (Areesz Ganddi) समलैंगिक है। उसकी
पड़ोसी फ्रांस का बेनोइट (सिमोन) अपनी पुराने हादसों को भूला नहीं पाती है।
शब इन कैरेक्टर के ही इर्द गिर्द घूमती है।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

ओनीर की फिल्म शब में तीन हिस्सों में हैं मॉनसून, पतझड़ और शीत ऋतु। हर कहानी में रिलेशनशिप के मूड को बदलते दिखाया गया है।ये आइडिया पेपर पर भले बहुत अच्छा लग रहा हो लेकिन स्क्रीन पर बहुत अच्छे से नहीं दिखाया जा सका है। फिल्म में कई कन्फ्यूजन हैं जो खत्म नहीं होते हैं।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

रवीना टंडन और आशीष बिष्ट ने स्क्रिप्ट की डिमांड के अनुसार बखूबी काम किया है लेकिन वो दिल छूने में नाकामयाब होते हैं। अर्पता चटर्जी भी फिल्म में अच्छी लगी हैं लेकिन कहानी ऐसी लिखी गई है कि वो कुछ खास कमाल नहीं कर पाती हैं। सिमोन फ्रेने और Areesz Ganddi ने भी अच्छा काम किया है। संजय सूरी के कैमियो की फिल्म में कोई जरूरत नहीं थी।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

108 मिनट की फिल्म में शब काफी धीमी फिल्म है। नैरेशन के अनुसार फिल्म की एडिटिंग और अच्छी हो सकती है

म्यूजिक

म्यूजिक

अरिजित सिंह की ओ साथी भी काफी काफी अच्छा गाना है। फिल्म के बाकी गाने भी काफी अच्छे हैं लेकिन ज्यादा देर तक आपके साथ नहीं रह पाएंगे

 Verdict

Verdict

शब को पर्दे पर अच्छी तरह से नहीं ला जा सका है और फिल्म कई सवालों के साथ खत्म हो जाती है। ये ओनीर की बेहतरीन फिल्मों में से एक नहीं है।

English summary
Shab movie review Story plot and rating,
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