Review : खाने के बहाने जिंदगी का स्वाद चखा गई शेफ.. लेकिन यहां नमक तेज हो गया
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प्रोड्यूसर : भूषण कुमार, कृष्णन कुमार, राजा कृष्णा मेनन, विक्रम मल्होत्रा, जननी रविचंद्रन
लेखक : रितेश शाह, सुरेश नायर, राजा कृष्णा मेनन
क्या है खास : सैफ अली खान, स्वर काम्बले, सिनेमैटोग्राफी
क्या है बकवास : फिल्म कुछ जगहों पर कुछ ज्यादा ही स्लो हो जाती है और क्लाइमैक्स कुछ खास इंप्रेस नहीं कर पाता है।
कब लें ब्रेक : इंटरवल
शानदार पल : एक सीन जिसमें सैफ की एक्स वाइफ, क्लोज फ्रेंड मिलिंद सोमन हैं। इस सीन में शानदार कॉमेडी देखने लायक है।
सैफ अली खान बॉलीवुड के सबसे कम आंके जाने वाले खान हैं। लेकिन उनकी फिल्मों में और उनके अभिनय में एक अलग जान दिखती है। और ये शेफ जैसी फिल्म देखकर समझ आता है जो अपनी ढीली कहानी के बावजूद थोड़ी कोशिश करती है आपसे जुड़ने की।
शेफ की पटकथा इतनी धीमी है कि ये बीरबल की खिचड़ी बन जाती है। और आपकी प्लेट तक आते आते ठंडी भी हो जाती है। अब ठंडी खिचड़ी सभी को बेस्वाद लगती है इसलिए सैफ अली खान की ये फिल्म भी उतनी ही बेस्वाद लगती है।


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