समीक्षा : आंतकी नहीं कॉमेडियन है लादेन

निर्माता: पूजा शेट्टी देवड़ा ,आरती शेट्टी
डायरेक्टर: अभिषेक शर्मा
कलाकार : अली जाफर,प्रद्युमन सिंह,सुगंध गर्ग,निखिल रत्नपारखी,पीयूष मिश्रा,राहुल सिंह,सीमा भार्गव ओर बैरी जॉन
स्टार रेटिंग: 2.5/5
समीक्षा : लादेन जिसे दुनिया आतंक के नाम से जानती हैं। लेकिन तेरे बिन ...का लादेन डराता नहीं हंसाता है। वो भी तीखे व्यंग्य पर नहीं बल्कि छोटी-छोटी मुस्कुराती हुई बातों पर जिन पर अब लोगों को हंसी नहीं आती है । तेरे बिन का लादेन....बंदूक से वार नहीं करता और न ही बम फोड़ता है बल्कि हंसी के तीर चलाता है। वो महिलाओं को घूरता है। वो ऊंट-पटांग हरकते करता हैं। यह फिल्म बहुत ही हास्यप्रदान है और यह दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देने में सक्षम है। यह फिल्म आजकल की उन हास्य फिल्मों से अलग है जो गंदेजोक्स पर लोगों को फूहड़ हंसी परोसते हैं। अभिषेक शर्मा ने एक अच्छी कोशिश की है।
हालाकि अभिषेक ने मुद्दा गंभीर चुना था लेकिन उनकी कोशिशों से फिल्म ने गंभीरता का दामन छोड़कर हंसी का चोला पहन लिया जो कि सफल रहा। अपनी पहली ही फिल्म में अभिषेक शर्मा ने इतने गंभीर विषय पर कॉमेडी फिल्म बनाकर जता दिया है कि वे दूसरों से कुछ अलग हैं। फिल्म कहीं भी बोर नही है ।
फिल्मों के किरदार अच्छे हैं। फिल्म के संवाद बहुत ही बढ़िया हैं जो आपको भीतर तक गुदगुदा जाते हैं। शंकर-अहसान-लॉय का संगीत फिल्म को खास बनाता है। फिल्म की एक और विशेषता है इसके सितारे। नए, लेकिन प्रतिभाशाली और आत्मविश्वासी कलाकार फिल्म की जान हैं। खूबसूरत अली जाफर शानदार अभिनेता हैं इसमें कोई दो राय नहीं।
अपनी आकर्षक छवि के बल पर वे सीधे आपके दिल में उतर जाते हैं। प्रद्युमन सिंह ओसामा बिन लादेन के हमशक्ल बने हैं और लाजवाब हैं। पीयूष मिश्रा हमेशा की तरह असाधारण हैं और ज़ोया के रूप में सुगंधा गर्ग अपनी श्रेष्ठता साबित करती हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अभिषेक की तेरे बिन लादेन लोगों को गुदगुदाती है ।
देखें : तेरे बिन लादेन की तस्वीरें
कहानी : 'तेरे बिन लादेन" एक पाकिस्तानी पत्रकार अली जाफर के अमेरिका जाने की कहानी है। अली लगातार कोशिशें करता रहता है अमेरिका जाने की, लेकिन हर बार उसका वीज़ा नामंजूर कर दिया जाता है। लेकिन एक दिन उसकी नजर ऐसे आदमी पर पड़ती है, जो ओसामा बिन लादेन की तरह दिखाई देता है, तब उसे एक युक्ति सूझती है। वह ओसामा का बोगस वीडियो बनाता है और उसे समाचार चैनलों को बेच देता है। लेकिन बदकिस्मती से मामला गंभीर हो जाता है और व्हाइट हाउस इसमें शामिल हो जाता है और तहकीकात शुरू हो जाती है, लेकिन हंसी का सफर जारी रहता है।


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