समीक्षा : पैसेन्जर है लव एक्सप्रेस

कलाकार :ओम पुरी, मन्नत, साहिल मेहता, विकास कत्याल
निर्देशक : सन्नी भमबानी
रेटिंग : 1.5/5
समीक्षा : लव एक्सप्रेस के रूप में भी सुभाष घई ने एक प्रयोग ही करने की कोशिश की है, उन्होंने इंस्टीटयूट ह्वीसलिंगवुड इंटरनेशनल के छात्रों के लिए यह फिल्म बनाई है। सारे तकनीशियन इसी कॉलेज के प्रोडक्ट हैं। सुभाष घई ने अपनी तरफ से यह तोहफा दिया है। उन्होंने अपने छात्रों को फीचर फिल्म के माध्यम से प्रोडक्शन के तौर तरीके समझाने की कोशिश की है।
वह भी व्यवहारिक रूप से। उस लिहाज से आपको फिल्म स्तरीय लग सकती है। वरना फिल्म की कहानी में कुछ भी नयापन नहीं है। दो दोस्त हैं। दोनों अपने बेटे बेटियों की शादी करना चाहता है। एक परिवार लंदन का है तो दूसरा अमृतसर का। शादी के लिए मुंबई का ठिकाना ढूंढ़ा जाता है। दोनों परिवार एक ट्रेन से मुंबई पहुंच रह रहे हैं। लड़का लड़क़ी शादी नहीं करना चाहते।
तो वह ट्रेन में ही प्लानिंग करते हैं कि वह किस तरह अपनी शादी को रोक सकते हैं। वे तरह तरह के उपाय ढूंढते हैं। गौर करें तो इन दिनों इस तरह के ट्रेन पर आधारित शॉट बहुत दर्शाये जा रहे हैं। हाल ही में फिल्म तनु वेड्स मनु में भी सपरिवार ट्रेन ने घूमने निकलते हैं। बचपन में हम शादी में गीत सुनते थे कि जिनमें लड़का लड़की ट्रेन में बैठ कर अपने परिवार के साथ जाते हैं।
फिल्म में आपको कुछ वैसा ही प्रतीत होगा। लेकिन फिल्म खास प्रभाव नहीं छोड़ पाती। फिल्म में ट्रेन के दृश्यों को बेहद खूबसूरत और प्रभावशाली बनाया जा सकता था। लेकिन फिल्म कमजोर साबित होती है। नये कलाकारों ने बेहतरीन काम करने की कोशिश की है। शादी माहौल की फिल्मी कहानियों में रुचि हो तो एक बार फिल्म देखी जा सकती है।


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