हेल्दी कॉमेडी है 'दो दूनी चार'

निर्माता:अरिंदम चौधरी
बैनर:प्लानमेन मोशन पिक्चर्स,वाल्ट डिस्नी
संगीत :मीत ब्रदर्स,अंजन
अभिनेता :ऋषि कपूर,नीतू सिंह,अर्चित कृष्णा,अदिति वासुदेव,अखिलेन्द्र मिश्र,सुप्रिया शुक्ला
रेटिंग : 2/5
समीक्षा: आज लोग चांद पर पहुंच गए हैं, दुनिया जीतने की बात करते हैं लेकिन आज भी हमारे देश की बेसिक जरूरत वो ही है, यानी रोटी, कपड़ा और मकान। आज भी इंसान अपनी जिंदगी को आराम से गुजारने के लिए काफी जदोजहद करनी पड़ती है। बस यही फलसफा है हबीब फैजल की फिल्म 'दो दूनी चार' का। इस फिल्म के जरिये गुजरे ज़माने की मशहूर जोड़ी ऋषि कपूर और उनकी पत्नी नीतू सिंह कपूर 30 साल बाद एक बार फिल्म रूपहले पर्दे पर एक साथ वापसी कर रहे हैं। निर्देशक हबीब फैसल की यह पहली फिल्म है। फिल्म की कहानी मेट्रो शहर में रहने वाले एक आम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है।
ऋषि कपूर का अभिनय जबरदस्त है, एक बार फिर से उन्होंने साबित कर दिया कि उन्हें मंझा हुआ कलाकार क्यों कहा जाता है। नीतू सिंह के कहने ही क्या, लगता ही नहीं उन्होंने 30 साल बाद कैमरा पेस किया है, फिल्म में पूरी तरह परफेक्ट नजर आयीं हैं। रही बात निर्देशक हबीब साहब की जिनकी ये पहली फिल्म है, उन्होने साबित करने की कोशिश की है, अगर निर्देशन सही हो तो एक आम समस्या को भी खास बनाया जा सकता है। फिलहाल हबीब ने अपने लिए उम्मीदें जगा दी है। निर्देशन अच्छा है। संगीत ठीक-ठाक है, याद रखने वाला तो नहीं है लेकिन कहानी के हिसाब से सही है, कहीं से भी ऊबाऊ नहीं लगता है।
दो दूनी चार कुल मिलाकर एक मनोरंजक और दिलचस्प फिल्म है। फिल्म की कहानी भले ही दिल्ली के इर्द-गिर्द गढ़ी गयी हो, लेकिन यह हर दूसरे आम हिन्दुस्तानी की कहानी है जिसकी आंखों में कोई न कोई सपना पलता है और उसे पूरी करने की कोशिशों में लगा रहता है। हबीब का अंदाज-ए-बयां बेहतरीन है, कुल मिलाकर एक दो दूनी चार एक स्वस्थ मनोरंजक फिल्म हैं।
कहानी : संतोष दुग्गल (ऋषि कपूर) पेशे से टीचर हैं। वे दिल्ली के डीडीए फ्लैट में अपनी पत्नी कुसुम दुग्गल (नीतू कपूर) और दो बच्चों अर्चित और अदिति के साथ रहते हैं। संतोष को आम हिन्दुस्तानी की तरह महंगाई की चिंता सताती है तो कुसुम आम हिन्दुस्तानी पत्नी की तरह अपने पति से आरामदायक जिंदगी न जी पाने के लिये शिकायत करती रहती है। बेटी अदिति बहुत ही जिद्दी है। हर बार उसे कुछ न कुछ नयी चीज चाहिये होती है। वहीं छोटा बेटा अर्चित के विचार बेहद मॉर्डन हैं, जो कई बार परिवार के सदस्यों को असहज भी कर देते हैं।
लेकिन, इन सबके बावजूद दुग्गल फैमिली अपनी गुजारा ठीकठाक तरीके से कर रही है। इसी बीच उनके घर में मिस्टर दुग्गल की छोटी बहन फुप्फू की एंट्री नहीं होती। मेरठ से दिल्ली आयी फुप्फू अपने देवर की शादी का न्योता लेकर पहुंचती है। लेकिन, शादी में आने के लिये एक शर्त है, जो कहानी को एक रोमांचक मोड़ दे देती है। शादी में आने के लिये शर्त है कि परिवार को कार से ही आना पड़ेगा। परिवार के पास कार तो है नहीं बस यहीं से कहानी में ट्विस्ट आ जाता है। परिवार किस तरह शादी और कार के चक्रव्यूह में फंसता है यही देखकर दर्शक हंसता है।
यही से शादी में जाने के लिए पैसे जुटाकर खरीददारी करने की जोड़ तोड़ शुरू होती है। लेकिन, इसी दौरान परिवार एक मुसीबत में फंस जाता है। अब वो इस मुसीबत से कैसे निकलता है यही सब गुदगुदी पैदा करता है। अब परिवार कार खरीदने में कामयाब हो पाता है या नहीं इसको जानने के लिए आप को फिल्म देखनी होगी।


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