समीक्षा : मजेदार सफर है 'चलो दिल्ली'

निर्माता : कृषिका लुल्ला, लारा दत्ता, कविता भूपति चड्ढा
निर्देशक : शशांत शाह
संगीत : गौरव दास गुप्ता, आनंद राज आनंद, सचिन गुप्ता
कलाकार : लारा दत्ता, विनय पाठक, अक्षय कुमार(मेहमान कलाकार), याना गुप्ता
सेंसर सर्टिफिकेट : यू/ए * 1 घंटा 56 मिनट * 12 रील
रेटिंग : 2.5/5
समीक्षा : जिंदगी उस समय अजीब कंडीशन में फंस जाती है जब दो अलग तरह के इंसान हमराही बन जाते है लेकिन जब पता होता है कि जिंदगी को ऐसे ही हालत में जीना है तो वो जिंदगी के कड़वे पल हसीन बन जाते हैं। ये ही कहानी कहती है लारा की चलो दिल्ली। जिसमें दो विपरीत प्रवृत्ति के मानव आपस में मिलते हैं और फिर उन्हें एक ही सफर तय करना पड़ता है, जिसके चलते ना चाहते हुए भी वो दुश्मन बनते हुए दोस्त बन जाते हैं।
लारा ने खुद अपनी फिल्म बनायी है, जाहिर है अपने आप तवज्जो वो देगीं ही। लेकिनफिर भी पूरी लाईमलाइट मिलने के बाद भी लारा पर विनय पाठक भारी है। वैसे दोनों ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। एक पूरे रास्ते पर फिल्मायी गयी ये फिल्म कई फिल्मों की याद दिलाती है। चलो दिल्ली यानी दिल्ली पहुचने तक की दास्तां कहती इस फिल्म में कई हैरत अंगेज और रोचक किस्से जुड़ते है, जो दर्शकों को हंसने पर मजबूर करते हैं।
लेकिन फिर भी कहीं-कहीं कहानियों में एक अच्छे लेखक की कमी खलती दिखायी देती है। छोटे से रोल में अक्षय कुमार भी हैं, जिनका प्रयोग क्यों किया गया है, ये समझ के परे है।जबकि याना पर फिल्माया गया गीत लैला ओ लौला... लोगों को अपनी सीट से बांधे रखता है। गांवो और शहरों के बीच की असमानता को दर्शाती इस फिल्म में शशांत शाह का निर्देशन ठीक ठाक है। कहना प़डेगा कि अपने प्रथम प्रयास में लारा दत्ता ने बतौर निर्मात्री बॉलीवुड में सशक्त कदम रखा है। उम्मीद करते हैं आगे भी वे इसी तरह से फिल्मों का निर्माण करेंगी। बॉक्स ऑफिस पर चलो दिल्ली मास को प्रभावित करेगी। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि चलो दिल्ली का सफर एक बार किया जा सकता है।
कहानी : मिहिका यानी लारा दत्ता एक 200 करोड़ रुपए की कंपनी चलाती है। उसे हर चीज बहुत सलीके से करने की आदत है। जबकि वहीं दूसरी ओर विनय है। पाठक यानी मनु जिंदगी को हालात के हिसाब से जीनी आती है। उसकी लाईफ में कोई भी टाइम टेबल नहीं है। । दंगा हो या पैसे खत्म हो गए हो, हर परिस्थिति में वह कहता है कोई बड़ी बात नहीं। वहीं मिहिका को छोटी-छोटी बातों में भी शिकायत रहती है। बसो दोनों का साथ मिलकर दिल्ली जाने की कहानी है इस फिल्म में , जिसमें काफी रूकावटें आती है। लेकिन फिर भी उनका सफर कामयाब होता है।


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