दिलचस्प नहीं 'अंजाना-अंजानी'

निर्माता : साजिद नाडियाडवाला
निर्देशक : सिद्धार्थ आनंद
संगीत : विशाल शेखर
कलाकार : रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा, जायद खान
रेटिंग :2/5
समीक्षा : निर्देशक सिद्धार्थ आनंद के अंजाना-अंजानी एक प्यारी लवस्टोरी जरूर है लेकिन खास प्रेम कहानी है ये कहना बेहद मुश्किल है। क्यों कि फिल्म में नया कुछ भी नहीं है। फिल्म की शूटिंग विदेशमैं माधुरी से प्यार करता हूं : रणबीर कपूर यानी न्यूयार्क में हुई है इसलिए लोकेशन काफी सुंदर है लेकिन फिल्म देखकर आपको लगेगा कि इतना खर्चा करने की जरूरत क्या थी। फिल्म में नया पन नहीं है, एक प्रेम कहानी को आधुनिकता का जामा पहना दिया गया है बस। दर्शकों को फिल्म देखकर ही पता चल जाता है कि आगे होने वाला क्या है। फिल्म में इमोशन का तड़का है लेकिन ये इमोशन आपको रोमांचित नहीं करते हैं। प्रियंका सुंदर हैं लेकिन फिल्म में प्रभावित नहीं करती है।
रणबीर को देखकर भी कुछ ऐसा ही आभास होता है, फिलहाल अभिनय के मामले में प्रियंका उन पर हावी है, रणबीर को अभी भी बहुत कुछ सीखना बाकी है, केवल चाकलेटी चेहरें के सहारे बॉलीवुड में टिकना थोड़ा मुश्किल है। प्रिंयका-रणबीर को लेकर काफी कहानियां गढ़ी गई लेकिन फिल्म की कहानी में दोनों की कमेस्ट्री बेमजा ही साबित होती हैं। रवि चंद्रन की सिनेमेटोग्राफी काफी अच्छी है, जिससे फिल्म सुंदर नजर आती है। विशाल-शेखर का संगीत साधारण है, याद रखने लायक नहीं है।
तनवी आजमी और जायेद खान जँचते हैं। फिल्म पहले हाफ मे काफी बोझिल है, पहले भाग में वस्तुत: कोई कहानी ही नही है, दूसरे भाग में फिल्म में पकड आनी शुरू होती है परंतु बीच बीच में काफी बोझिल हैं, फिल्म का अंत आसानी से सोचा जा सकता है, इसमें कुछ नया देखने को नहीं मिलता। आपको बता दें कि यह फिल्म गर्ल ऑन द ब्रिज की रीमेक नहीं है और ना ही तेलुगु फिल्म 'इतलु श्रवनी सुब्रह्ममणियम' से प्रेरित है, हाँ यह सच है कि तीनों फिल्मों में मुख्य दो पात्र आत्महत्या करने जाते हैं - एक ही पूल पर एक ही समय पर। लेकिन फिल्म का ट्रीटमेंट बिल्कुल अलग है। खैर कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अंजाना-अंजानी दिलचस्प नही हैं।
कहानी : फिल्म की कहानी दो ऐसे लोगों की है जो अपने जीवन से निराश हो चुके हैं. कियारा (प्रियंका चोपड़ा) सान फ्रांसिस्को से है और अपना प्यार खो चुकी हैं, तो आकाश (रणबीर कपूर) न्यूयार्क से हैं और अपना व्यापार खो चुके हैं। दोनों को अपने जीवन से लगाव नहीं है और वे आत्महत्या करने जाते हैं। सयोंग से दोनों एक ही पूल से छलांग लगाने जाते हैं, एक ही समय पर। घटनाएँ कुछ इस तरह से घटित होती हैं कि दोनों तय करते हैं कि वे 31 दिसम्बर को ही आत्महत्या करेंगे जिसके आने में अभी 20 दिन बाकी है। हालात उन दोनों को पास ले आते हैं और 20 दिन उनकी जिदंगी बदल देते हैं।


Click it and Unblock the Notifications











