..................... Red Alert - The War Within: Review | समीक्षा : रेड अलर्ट एक अच्छी कोशिश - Hindi Filmibeat

समीक्षा : रेड अलर्ट एक अच्छी कोशिश

By अंकुर शर्मा

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फिल्म:रेड अलर्ट- द वार विथ इन
निर्माता:टी.पी अग्रवाल
निर्देशक:अनंत महादेवन
स्टार कास्ट:सुनील शेट्टी,नसीरुद्दीन शाह,विनोद खन्ना,समीरा रेड्डी,भाग्यश्री,आएशा धरकर,सीमा बिस्वास,गुलशन ग्रोवर और आशीष विद्यार्थी
स्टार रेटिंग:3/5

समीक्षा : रेड अलर्ट -द वार विथ एक कोशिश है लोगों को बताने की कोई भी इंसान जन्म से नक्सली या अपराधी नहीं होता है, कभी कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि इंसान को हथियार उठाना पड़ता है। फिल्म की पटकथा बेहतरीन है। अनंत महादेवन ने ज्वलंत मु्ददा उठाकर लोगों के दिलो-दिमाग पर चोट करने की कोशिश की है। लेखिका अऱूणा राजे ने जो कुछ भी कहना चाहा या समझाना चाहा अनंत महादेवन ने उसको समझते हुए दर्शको तक उस संदेश को अच्छे तक पहुंचाया है।

कहना गलत न होगा कि फिल्म अच्छी बनी है, अनंत महादेवन के निर्देशन में पैना पन है। किरदारों मे भी डायरेक्टर का साथ दिया है, सुनील शेट्टी और नासिरूद्दीन शाह, सीमा विश्वास, आशीष विधार्थी और विनोद खन्ना को गंभीर किरदारों की श्रेणी में गिना जाता है जो कि गलत नहीं है। रेड अलर्ट में इन कलाकारों ने बखूबी अपना रोल निभाया है। शाह,शेट्टी और विश्वास का उम्दा अभिनय है। बहुत समय बाद पर्दे पर नजर आयीं भाग्यश्री ने कोई कमाल नहीं किया है तो समीरा ने अपनी तरफ से थोड़ी सी गुजाइंश रखी है। कुल मिलाकर सच्ची घटनाओं और गंभीर अभिनय पसंद करने वालों के लिए है रेड अलर्ट-द वार विथ। कुल मिला कर कहा जा सकता है महादेवन की कारगार कोशिश है रेड अलर्ट -द वार विथ।

देखें : रेड-अलर्ट की तस्वीरें

कहानी :फिल्म की कहानी सुनील शेट्टी के इर्द-गिर्द घूमती है। जो कि एक सीधे-साधे व्यक्ति के किरदार में हैं जो बहुत ही गरीब है और अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए जंगल में आकर ठहरने वाले लोगों के लिए खाना बनाता है। एक दिन जंगल में ही नक्सलियों और पुलिस के बीच जंग होती है जिसमें सुनील को जबरदस्ती एक गैंग में शामिल कर लिया जाता है।

इस गैंग में विनोद खन्ना,आशीष विद्यार्थी,सीमा बिश्वास जैसे लोग रहते हैं जो आम आदमी के हक की लड़ाई लड़ते हैं, मगर सुनील उनके हिंसा वाले रस्ते को मन से अपना नहीं पाता, सुनील की तरह समीरा रेड्डी भी हालातों से मजबूर होकर नक्सलियों का साथ देने को मजबूर है। इसी मार काट से तंग आकर सुनील एक दिन गैंग के एक व्यक्ति आशीष विद्यार्थी का खून कर वहां से भाग निकलता है और बाद पुलिस का साथ देकर नक्सलवाद को मिटाने के लिए पुलिस का साथ देने लग जाता है।

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