2 'रास्कल्स' से भिड़ेगी 'ज़िंदगी' और 'साउंडट्रैक'

आज कल बॉलीवुड में हर कोई त्यौहारों के समय में अपनी फिल्मों से भुनवाना चाहते हैं और यही काम 'रास्कल्स' की टीम ने भी किया। कहने को तो ये कॉमेडी फिल्म है लेकिन इसकी कहनी में ज़रा भी दम नहीं है। डेविड धवन अच्छे निर्देशक माने जाते हैं लेकिन वो अजय देवगन और संजय दत्त के साथ कुछ खास कमाल नहीं कर पाए। इस पूरी फिल्म को बैंकॉक के एक सेवन स्टार होटल में ही शूट कर ली गयी है फिर चाहे वो होटल की लॉबी, स्विमिंग पुल, रूम, गार्डन कोई और हिस्सा। पूरे फिल्म को देख कर ऐसा लगता है कि उन सबकी दुनिया बस इसी होटल के अंदर है।
संजय दत्त को कंगना के साथ रोमांस करते देखना बहुत ही बेहुदा सा लगता है। अगर अजय की बात करें तो उन्होंने मेहनत तो की है लेकिन फिल्म की स्क्रीप्ट के वीक होने के कारण वो कुछ नहीं कर पाए हैं। कंगना को देख कर लगता है कि कॉमेडी उनके बस की बात नहीं है। कॉमेडी के हर सीन्स को देख कर ऐसा लगता है कि ये किसी फिल्म से जुड़े हुए सीन हैं, केवल संवाद और कॉमेडी से पूरी एक फिल्म बना देना नामुमकिन है। डेविड हर तरफ से इस फिल्म को बनाने में असफल साबित हुए हैं। यह कॉमेडी फिल्म के नाम पर सचमुच लोगों को दो रास्कल्स ने अपनी बेहुदा हरकतों से ठग ही लिया है। रेटिंग- 2.5/5
अगर जायेद और दीया की फिल्म 'लव ब्रेकअप्स ज़िंदगी' की बात करें तो ये कुछ ऐसे कपल्स की कहानी है जो खुद से परेशान हैं उन्हें ये भी नहीं पता कि वो लाइफ से क्या चाहते हैं, यही आजकल अधिकतर युवाओं की कहानी है, वो खुद यह नहीं समझ पाते कि उनके लिए प्यार जरूरी है या कैरियर। प्रैक्टिकल और इमोशनल लाइफ पर बनी यह फिल्म दीया के प्रोडक्शन हाउस की पहली फिल्म है जिसे उन्होंने जायेद और साहिल संघा के साथ मिलकर बनाया है।
आज की दौड़ती भागती लाइफ में युवा के पास क्या प्यार के लिए समय है? प्यार जरूरी है या कैरीयर? इन सब बातों को ही ध्यान में रख कर बनायी गयी कहानी है इस फिल्म में जायेद ने कुल मिलाकर अच्छा ही किया है। दीया ने भी कुछ हद तक आकर्षित किया है। फिल्म में अश्लीलता का कोसो दूर तक कोई वास्ता नहीं है। अगर आप फूहड़पन पसंद हनी है तो आप यह फिल्म एक बार देख सकते हैं हो सकता है कुछ हद तक यह कहानी आपके दिल को छु जाए। रेटिंग- 2/5
अब बारी आती है फिल्म 'साउंडट्रैक' की यह एक ऐसे युवा रौनक यानि राजीव खंडेलवाल की कहानी है जो अपनी लाइफ में सब कुछ बहुत ही जल्दी पा लेना चाहता है। उसके पिता शुरू से ही म्यूज़िक से जुड़े थे जिसके कारण रौनक भी संगीत की दुनिया में कुछ कर गुजरने की चाहते लेकर मुंबई में अपना कदम रखता है। जल्द ही वह डीजे बन जाता है और फिर उसका सपना पूरा भी होने लगता है, लेकिन वह अपनी सफलता को पचा नहीं पाता है और जल्द ही ड्रग्स और पार्टी की दुनिया में उसके कदम बहक जाते हैं। तेज शोर में रहने के कारण वह सुनने की शक्ति भी खो देता है उसके सारे सपने टूट के बिखर जाते हैं वह डिप्रेशन में चला जाता है। ऐसे में उसकी लाइफ में सोहा अली खान आती है जो खुद भी अपंग है वह रौनक को लीपरीडिंग सिखाती है जिससे रौनक की लाइफ में एक बार फिर से रौनक आ जाती है।फिल्म की कहानी तो प्रेरक है लेकिन निर्देशन ने कमर तोड़ दी है इस कारण यह फिल्म भी अपना असर नहीं दिखा पाती, हालांकि स्टार्स ने काफी मेहनत की है। रेटिंग- 2/5
कुल मिलाकर आप इस हफ्ते अगर दोस्तों को साथ फिल्म और आउटिंग प्लान कर रहे हैं तो आउटिंग पर ही जाए क्योंकि ये किसी भी फिल्म की कहानी में दम नहीं है। यदि फिर भी आपको फिल्म देखनी ही है तो जिंदगी के रिश्तों में ही उलझी फिल्म 'लव ब्रेकअप्स जिंदगी' को एक बार देख सकते हैं।


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