दमदार फिल्म है 'नो वन किल्ड जेसिका'

निर्देशक: राजकुमार गुप्ता
बैनर: यूटीवी स्पॉट बॉय
निर्माता: रॉनी स्क्रूवाला
संगीत: अमित त्रिवेदी
रेटिंग: 3.5/5
सच्ची घटना पर आधारित 'नो वन किल्ड जेसिका' एक दमदार फिल्म है। ये बात फिल्म की शुरुआत में ही जाहिर हो जाती है। फिल्म प्रभावित करती है क्योंकि इसमें कोई ऐसा किरदार या कहें हीरो नहीं है जो अपने मजबूत बॉडी और दहाड़ मारती आवाजों से सिनेमा के पर्दे को हिलाकर रख दे।
मुख्य किरदार में आज के वक्त की दो दमदार अभिनेत्रियां रानी मुखर्जी और विद्या बालन फिल्म में किसी पुरुष अभिनेता की कमी महसूस होने नहीं देती। फिल्म की कहानी पूरा देश जानता है इसलिए फिल्म के लिए दर्शकों को सिनेमाहॉल तक खींचने का काम रानी और विद्या की एक्टिंग और फिल्म की जबरदस्त चुस्त पटकथा ने किया है।
फिल्म की कहानी हर कोई जानता है कि एक पार्टी में ड्रिंक सर्व करने वाली मॉडल जेसिका लाल को गोली मार दी जाती है क्योंकि वो एक मंत्री के बेटे को वक्त खत्म हो जाने के बाद ड्रिंक सर्व करने से मना कर देती है। फिल्म यहीं से कहानी को आगे बढ़ा ले जाती है। जहां एक बहन की समाज के ताकतवर लोगों के खिलाफ एक मंत्री के बेटे द्वारा मार डाली गई अपनी बहन को न्याय दिलाने की जद्दोजहद करती है।
इंटरवल से पहले का हिस्सा पूरा तरह से जेसिका की बहन सबरीना का किरदार वाली विद्या बालन के नाम है। फिल्म के शुरुआती हिस्से में अपनी एक्टिंग से विद्या साबित कर देती हैं कि वो वाकई बेजोड़ अभिनेत्री हैं। इंटरवल के बाद एक टीवी चैनल की पत्रकार के रुप में रानी मुखर्जी पर्दे पर दाखिल होती हैं और ऐसे वक्त में जेसिका की बहन को सहारा देती है जब वो न्याय की लड़ाई से लगभग हार चुकी होती है।
फिल्म का एक मुख्य बिंदु ये है कि रानी अपने पत्रकार के किरदार में वो बेहतरीन काम करती हैं। वो जेसिका को इंसाफ दिलाने के लिए जनमत तैयार करती है। एक टीवी चैनल की पत्रकार रानी लोगों को जेसिका के लिए न्याय और अन्याय के खिलाफ लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर देती है। अंतत दोनों की ये मुहिम सफल होती है और जेसिका के हत्यारे को उम्रकैद की सजा मिलती है।
कुल मिलाकर निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने एक बेहतरीन फिल्म बनाई है। वो इससे पहले साल 2008 में 'आमिर' के लिए तारीफें बटोर चुके हैं और अब 'नो वन किल्ड जेसिका' के लिए भी उनकी झोली तारीफों और पुरस्कारों से भर जानी चाहिए। रानी का किरदार थोड़ा लाउड है वो पर्दे पर गालियां देती और सिगरेट के कश मारती दिखती हैं मगर इससे विद्या का किरदार दब नहीं जाता।
पिछले कुछ सालों में कई फ्लॉप फिल्में देन के बाद रानी ने बॉलीवुड में दमदार वापसी के लिए दमदार फिल्म चुनी है। हर फिल्म में कुछ नकारात्मक बिंदु होते हैं 'नो वन किल्ड जेसिका' में भी हैं। इंडिया गेट पर मोमबत्तियां जलाने वाला दृश्य ज्यादा लंबा खिंचा है और कुछ गाने फिल्म की गति के हिसाब से फिट नहीं बैठते। मगर... इनकी हल्की फुल्की खामियों को दूर कर लें क्योंकि इसके बावजूद फिल्म बोझिल नहीं होती।
फिल्म जरुर देखी जानी चाहिए इस समय की दो बेहतरीन अभिनेत्रियों को उनकी बेहतरीन अभिनय के लिए और इसलिए कि किसी भी फिल्म का दारोमदार सिर्फ उसके हीरो (पुरुष अभिनेता) पर नहीं होता। फिल्म की हिरोईनें, फिल्म की 'हीरो' हैं इसलिए भी ये फिल्म देखने जरुर जाएं।


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