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    फिल्म REVIEW: आरूषि मर्डर कांड से प्रभावित है 'रहस्य', अच्छा प्रयास

    By Neeti
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    मनीष गुप्ता के निर्देशन में बनी फिल्म 'रहस्य' के बारे में निर्देशक ने भले ही कहा था कि इसकी कहानी आरूषि हत्याकांड पर आधारित नहीं है। लेकिन फिल्म देखकर यह जाहिर है कि फिल्म आरूषि केस से ही प्रभावित है। अंतर बस यह है कि यहां कहानी दिल्ली के बजाए मुंबई में घटती है। फिल्म में कत्ल की गई बच्ची आएशा की भूमिका निभाई है साक्षी सेम ने। आशीष विद्यार्थी और टिस्का चोपड़ा डॉक्टर मां-बाप के किरदार में हैं। जबकि केके मेनन बने हैं सीबीआई ऑफिसर, जो पूरे मामले की पड़ताल करते हैं।

    पढ़ें- फिल्म रिव्यू, हवाईज़ादा

    'रहस्य' के शुरू होते समय डिस्क्लेमर लगाया गया है, जिसके मुताबिक यह एक काल्पनिक कहानी है। लेकिन अगर आरूषि मर्डर केस से इसे जोड़ें तो यह एक बेहतरीन फिल्म साबित होती है। यह केस की अनसुलझी परतों को उजागर करती है। और 2 घंटे 6 मिनट की इस फिल्म में कहीं न कहीं आपको वापस सोचने को मजबूर कर देती है।

    स्लाइडर में पढ़िए: फिल्म रहस्य का रिव्यू

    क्या है 'रहस्य'

    क्या है 'रहस्य'

    कहानी मुंबई के एक फ्लैट में आयशा महाजन की लाश मिलने के साथ शुरू होती है। हत्या के वक्त घर में सिर्फ उसके पिता होते हैं। सर्वेंट क्वार्टर में युवती को बचपन से पालने वाली आया और एक नौकर अपने-अपने कमरों में सो रहे थे। बस यहीं से शुरू होती है फिल्म की कहानी।अब एंट्री होती है सीबीआई ऑफिसर बने केके मेनन की। पुलिस जब फ्लैट में पहुंची तो डॉक्टर पिता के शरीर पर बेटी के नाखूनों से बनी खरोंचों के निशान थे, बेटी के शरीर पर पिता के नाखूनों की खरोंच थीं। बेटी के हाथों में पुलिस को पिता के सिर के कुछ बाल भी मिलते हैं। लेकिन पिता नौकर को तलाशने की बात करता है, क्योंकि नौकर अचानक गायब हो जाता है।मगर सारे सुबूत पिता के खिलाफ हैं और अदालत उसे न्यायिक हिरासत में भेज देती है।

    आगे की कहानी

    आगे की कहानी

    लेकिन मामले की परतें एक के बाद एक खुलती हैं और कई मौकों पर आप चौंकते भी हैं क्योंकि थोड़े समय बाद पिता अकेला संदिग्ध नहीं रह जाता। के के मेनन के आने के बाद कहानी काफी रफ्तार पकड़ लेती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब एक के बाद एक तीन हत्याएं और होती हैं। बहरहाल, फिल्म का क्लाइमेक्स क्या है, यह जानने के लिए तो आपको थियेटर तक जाना पड़ेगा। लेकिन बता दें, फिल्म ने रहस्य को अच्छी तरह बरकरार रखा है।

    किरदार ?

    किरदार ?

    आशीष विद्यार्थी और टिस्का चोपड़ा भी अपने रोल में जमे हैं। वहीं केके मेनन अपने किरदार में बेहद मजबूत हैं। जबकि डॉक्टर महाजन की करीबी दोस्त बृंदा के रोल में मीता वशिष्ठ ने भी लोगों को ध्यान खींचा है। इंस्पेक्टर के रोल में निमाई बाली थोड़े से लाउड लगे हैं।

    क्यों देंखे रहस्य

    क्यों देंखे रहस्य

    फिल्म की खासियत है इसकी सधी हुई स्क्रिप्ट। निर्देशक मनीष गुप्ता ने फिल्म को एन्गेजिंग रखा है। सस्पेंस अच्छा है और पहला हाफ खासतौर से कसा हुआ है। अगर आप मर्डर मिस्ट्री देखना पसंद करते हैं, तो एक बार 'रहस्य' जरूर देंखे। वहीं, दूसरी ओर किरदारों का बेहतरीन परर्फोमेंस भी आपके सिनेमाघर तक ले जा सकता है।

    क्या है खामियां..

    क्या है खामियां..

    फिल्म का सेकेंड हॉफ थोड़ा खिंचा हुआ लगता है, और क्लाइमैक्स कुछ ज़्यादा ही आसानी से खुल जाता है। हालांकि फिल्म में आप कहीं भी बोरियत महसूस नहीं करेंगे। वहीं, फिल्म के डीटेल्स में भी निर्देशक थोड़ा सा चूक गए। हालांकि, इस वीकेंड अगर आप मर्डर मिस्ट्री और इनवेस्टिगेटिव फिल्में देखना चाहते हैं तो यह एक बेहतर ऑप्शन है।

    English summary
    It's quite evident that Manish Gupta's Rahasya is somewhere inspired by the high profile Noida double murder case of Aarushi Talwar and Hemraj.
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