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    क्विक गन मुरूगन: शाकाहार v/s मांसाहार

    By Staff
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    निर्देशक: शशांक घोष

    कलाकार: राजेंद्र प्रसाद, विनय पाठक, रनबीर शूरी, संध्‍या मृदुल, रम्‍भा, अश्विन मुश्रान

    शशांक घोष के निर्देशन और राजेश देवराज के लेखन में बनी क्विक गन मुरूगन एक अनोखे संसार का अहसास दिलाती है जिसका आज की दुनियां से कोई नाता नहीं है। हीरो क्विकगन मुरूगन सुपरहीरो है वह गरीब जनता की मदद करता है और दुश्‍मनों से लड़ता है।

    फिल्‍म का पात्र सन् 1994 में चैनल वी गढे गए गए एक पात्र से प्रेरित है जिसका टैगलाइन था 'माइंड इट' और 'वी आर लाइक दिस ओनली'। अभिनेता शाहरूख खान ने भी फिल्‍म ओम शांति ओम के एक दृश्‍य में कुछ इसी तरह का रूप अपनाया था जो अपनी शैली में रजनीकांत की तरह था।

    खैर अगर क्विक गन मुरूगन के बारे में बात करें तो हीरो और विलेन की बीच लडा़ई जैसी कामचलाऊ जैसी सस्‍ती कहानी के बावजूद आपकों बांधे रखेगी। हीरो क्विक गन मुरूगन का जानी दुश्‍मन राइस प्‍लेस रेड्डी (नसीर) मांसाहारी डोसा बनाना चाहता है जिसके लिए वो अच्‍छा डोसा बनाने वाली महिलाओं का अपहरण करता है। वह शहर में सबसे अच्‍छा डोसा बनाने का ख्‍वाब देखता है। क्विक गन मुरूगन उसके खिलाफ लड़ता है और महिलाओं को उसके चंगुल से छुड़ाता है। इसमें उसकी प्रेमिका मैंगो डोली (रम्‍भा)साथ देती है।

    फिल्‍म क्विक गन मुरूगन पहले दक्षिण भारतीय काउब्‍याय से मिलवाती है। फिल्‍म देखकर रजनीकांत की शैली याद आती है। जहां खलनायक कितनी भी गोलियां चलाए लेकिन हीरो का बाल भी बांका नहीं होता है और अगर नायक गोली चलाए तो दीवार से भी टकराकर गोली खलनायक को लग जाती है।

    फिल्‍म का कांसेप्‍ट अच्‍छा है। हीरो और विलेन की लडाई दक्षिण भारत के एक छोटे से गांव से शुरू होकर स्‍वर्गलोक तक होते हुए मुम्‍बई तक पहुंच जाती है।

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