एक्शन से भरपूर मसाला फिल्म 'प्रिंस'

निर्देशक - कूकी गुलाटी
कलाकार- विवेक ओबेरॉय, अरुणा शील्ड्स (हॉलीवुड), नंदना सेन, नीरू सिंह
पटकथा - सिराज अहमद
निर्माता - कुमार तौरानी
साउंड - रेसुल पुरुकुट्टी
प्रिंस का एल्बम देखें
सोलो हीरो के रूप में विवेक ओबेराय को प्रिंस में उतारने के लिए बेशक निर्माता , निर्देशक के साहस की प्रशंसा करनी होगी। विवेक ओबेराय एक लंबे ब्रेक के बाद किसी फिल्म में सोलो हीरो के रूप में नजर आएंगे। विवेक के भविष्य की सारी उम्मीदें प्रिंस पर टिकी हुई हैं। वैसे ऐसा भी नहीं है कि विवेक भरोसे के काबिल ना हों। उनकी पिछली फिल्मों में किये गए उनके थोड़े से ही काम ने उन्हे एक अलग पहचान दी थी। इसमें कोई शक नहीं। लेकिन इधर बीच उनकी शख्सयित का ऐसा पहलू सामने आया जो उनके करियर के लिए निगेटिव भी हो सकता है। प्रिंस में दर्शक उन्हे नकारते हैं या पसंद करते हैं, विवेक के लिए ये बड़ा मुद्दा है।
प्रिंस की कहानी में ऐसी कोई नवीनता नहीं नजर आती। विवेक एक इंटरनेशनल ख्याति प्राप्त चोर हैं। चोर बॉलीवुड की कोई नयी उपलब्धि क भी नहीं रहे। खैर ये चोर बेहद शार्प और स्मार्ट है। वह अपने जीवन की सबसे खतरनाक चोरी करके एक ऐसी चीज चुराता है जो मानव जाति के लिए बहुत मायने रखती है। इसके बाद कहानी में सस्पेंस है। क्योंकि प्रिंस जब वह चीज चुरा कर लौटता है तो उसे कुछ याद नहीं ता वह सब कुछ भूल चुका है। उसके पास्ट ने उ से अगर कुछ दिया है तो वह है एक दाग। अब उसे उस घाव या दाग के ही सहारे पूरी फिल्म में अपना पास्ट ढूंढना है। फिल्म इस मोड़ पर आकर 'गजनी' से मिलने लगती है।
चूंकि कहानी में प्रिंस की मुख्य भूमिका है तो नायिकाओं के पास करने के लिए कुछ खास नहीं बचा। इसलिए पूरी फिल्म में
हसीनाओं का इस्तेमाल हुस्न का ग्लैमर बिखेरने के लिए किया गया है। स्टोरी से तो यही लगता है कि इसमें किसी मसाला फिल्म के सारे तत्व मौजूद हैं। लेकिन सारी फिल्म विवेक पर केंद्रित है। और विवेक के दीवानों की संख्या काफी कम है।


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