नहीं डरा पायी रामू की फूंक 2

निर्देशक - मिलिंद गडगकर
कलाकार - सुदीप, एहसास चन्ना, नीरू बाजवा, अश्विनी कालेस्कर, अमृता खानवलकर
निर्माता - राम गोपाल वर्मा
स्क्रिप्ट राइटर - मिलिंद गडगकर
फूंक पार्ट 1 - फूंक में मधु (अश्विनी कालेस्कर) राजीव (सुदीप) से अपना और अपने पति के अपमान का बदला लेने के लिए जादू-टोना करती है। राजीव और आरती (अमृता खानवलकर) के दो बच्चे हैं रक्षा और रोहन। राजीव अपनी बेटी रक्षा को बेहद प्यार करता है। मधु राजीव की कमजोरी जानती है। इसलिए वह रक्षा को अपना शिकार बनाती है। पार्ट 1 में मधु के खत्म होने पर रक्षा को इस आफत से छुटकारा मिलता है।
फूंक २ की गैलरी देखें
पार्ट - 2 की स्टोरी इसके बाद की कहानी है। राजीव के घर से मधु का साया हट चुका है। राजीव का परिवार अब पहले की तकह खुशहाल जिंदगी जी रहा है। लेकिन अचानक मधु का भूत एक गुड़िया के सहारे फिर आ धमकता है। लेकिन ये सब खामोशी से घटता है। बच्चों को खेलते समय गुड़िया मिलती है। इसके बा द एक के बाद एक खौफनाक और दर्दनाक वारदातों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
फूंक में रामू ने लोगों को काफी डराया था। लोग खूब डरे और फिल्म को उन्होने पसंद भी किया। शायद इसीलिए रामू ने फिल्म का दूसरा भाग बनाया। फिल्म की कहानी अन्य हॉरर फिल्मों की तरह ही है। जिसमें किसी नयेपन का अभाव पूरे समय खटकता रहता है। एक जैसे भूतिया दृश्यों और डरने की एक्टिंग के बीच कुछ भी ऐसा नजर नहीं आता जिसके लिए इस फिल्म की सराहना की जाय।
राम गोपाल वर्मा का फूंक २ स्केयर कांटेस्ट
कहानी के पुरेपन की वजह से कलाकारों का अभिनय बोरिंग लगता है। फिर भी बाल कलाकार एहसास ने हर बार की तरह बेहेतरीन एक्टिंग की है। एक तरह से अगर इस फिल्म को एहसास की फिल्म कहा जाय तो गलत नहीं होगा। वैसे जिन्होने
फूंक का पहला भाग देखा है उन्हे रक्षा (एहसास) की एक्टिंग याद ही होगी। एहसास के रूप में फिल्म इंडस्ट्री को एक मंजा हुआ बाल कलाकार मिला है। तो इस फिल्म को आप रक्षा की एक्टिंग के लिए जरूर देखें। बाकी सभी कलाकारों का अभिनय औसत है।


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