Pari Review: लंबे समय बाद एक हॉरर फिल्म जिसे देख कांप जाएंगे आप, जबदरस्त
पुरानी हवेली, दरवाजों की डरावनी आवाज, सफेद सा़ड़ी में औरतें और एक डरावने मेकअप में हीरो, अनुष्का शर्मा की परी में ऐसा कुछ नहीं है। यह बाकी हॉरर फिल्मों से काफी अलग है और आपको कुछ नया देखने को मिलेगा। फिल्म के पहले स्क्रीमर रिलीज किए गए थे तो पहले ही प्लॉट को लेकर काफी भूमिका बांध दे चुके हैं। लेकिन हम आपसे वादा करते हैं कि हम स्पॉयलर बताकर आपका बिल्कुल भी मूड खराब नहीं करेंगे।

फिल्म की शुरुआत अरणब (परमब्रत चटर्जी) से होती है जो अपने पिता के साथ कार में बैठा होता है और कार चलाने के दौरान उसके पिता एक बुढ़ी महिला को धक्का मार देते हैं और वो उसी वक्त मर जाती है। आगे की जांच के बाद पुलिस उस महिला जंगल के बीच स्थित उस महिला के घर पहुंचते हैं तो बेड़ियों में जकड़ी रुखसाना (अनुष्का शर्मा) उन्हें मिलती है।बेहद दुखी अरणब रुखसाना की मदद करना चाहता है। वो उसे अपने घर भी लेकर आता है जहां वो अकेले अपने पैरेंट्लेस से अलग रहता है। उसे नहीं पता होता कि ये कोई परियों की कहानी नहीं है। क्या अरणब जब तक सबकुछ जानेगा तब तक बहुत देर हो जाएगी?
पहली बार डायरेक्ट कर रहे प्रोसित राय ने इस फिल्म में शैतानों की प्रेम कहानी को बखूबी दिखाया है और साथ ही वो इंडियन सिनेमा को हॉरर फिल्म में कुछ अलग दिखाने में भी कामयाब हुए हैं। यह बात तो आप भी मानेंगे कि दिल दहलाने वाले डिस्टर्बिंग विजुअल देख पाना और दिखा पाना सबके बस की बात नहीं होती। प्रोसित राय के पक्ष में सबसे अच्छी बात ये है कि वो पहले फ्रेम से ही वो माहौल बनाने में सफल हुए हैं जो किसी भी हॉरर फिल्म में जरुरी हैं।
अगर फिल्म के नकारात्मक पक्षों की बात करें तो फिल्म का धीमा नैरेशन थका देता है।क्लाईमैक्स में मेलोड्रैमेटिक टच भी आपको थोड़ा निराश कर सकता है। आखिरी 20 मिनट को छोड़ दिया जाए तो परी में एक सुपरनैचुरल कहानी के सभी मसाले हैं।
तारीफ अनुष्का शर्मा की करनी होगी जिन्होंने इसमें अच्छा इमोशन दिखाया है और बिना मेकअप अवतार दिखाया है। फिल्म में उनकी नीली आखें जिसमें कई गहरे राज छिपे हैं। जैसे गिरगिट रंग बदलता है वैसे ही अनुष्का शर्मा कई रूप दिखाने में सफल हुई हैं। परमब्रत चटर्जी भी फिल्म में टॉप फॉर्म में हैं। अनुष्का के शानदार परफॉर्मेंस के बादद भी वो अपनी छाप छोड़ने में सफल हुए हैं।रजत कपूर भी फिल्म में काफी डरावने लगे हैं। काश फिल्म में उनकी मौजुदगी थोड़ी और होती है। मनसी मुल्तानी और रीताभरी चक्रवर्ती ने भी अपना काम बखूबी किया है।
परी की सिनेमेटोग्राफी बहुत ही अच्छी है और सब मिलाकर ये एक खूबसूरत फिल्म पश करती है। केतन सोढा का बैकग्राउंड म्यूजिक भी काफी शानदार है। अनुष्का शर्मा की वाकई तारीफ करनी होगी होगी कि अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर उन्होंने ऐसी फिल्म की। यह फिल्म कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है।


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