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    Noor Movie Review: बेअसर है नूर की कहानी लेकिन हिट है सोनाक्षी की दबंगई

    By Madhuri
    |

    Rating:
    2.5/5
    Star Cast: सोनाक्षी सिन्‍हा, पूरब कोहली, मनीष चौधरी, सुचित्रा पिल्लई, कनन गिल
    Director: सुन्हिल सिप्पी

    शानदार पॉइंट - सोनाक्षी सिन्हा, विषय

    निगेटिव पॉइंट - फिल्म काफी धीमी है, सेकेंड हाफी जबरदस्ती खिंची हुई

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    सोनाक्षी सिन्हा की नूर कई कमियों से भरी है। फिल्म कई जगहों पर काफी कंफ्यूजिंग और स्लो हो जाती है। सोनाक्षी सिन्हा काफी हद तक आपको बांधे रखेंगी। नूर फिल्म का प्लाॉट लिखने में काफी समय लेती है और इसके लिए काफी धैर्य की आवश्यकता होती है। सेल्फ ऑब्सेस्ड नूर (सोनाक्षी सिन्हा) आपको शुरू से बांध कर रखेगी। वो अपने कैरेक्टर में अतिसंवेदनशीलता ला पाने में कामयाब हो जाती हैं।

    प्लॉट

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    'The trouble is you think you have all the time' नूर रॉय चौधरी (सोनाक्षी सिन्हा) फिल्म की शुरूआत में ये डायलोग बोलते नजर आती हैं। कुछ ही देर बाद फिल्म में उसका करियर और जिंदगी

    को लेकर नजरिया दिखाया जाता है जिसका उपर लिखी कहावत से कोई लेना देना नहीं है। सोनाक्षी सिन्हा एक ब्रोडकास्ट न्यूज एजेंसी Buzz (बज़) में जर्नलिस्ट हैं। वो एंटरटेनमेंट और पागलपन से भरी शो की कहानियां देखती है। वो अपनी जिंदगी में कुछ गंभीर काम करना चाहती हैं लेकिन खुद अपनी जन्मदिन के दिन मुंबई की बारिश का सामना कर सनी लियोन का इटंरव्यू लेने जा रही होती हैं और एक इंसान की कहानी जो अपने हाथों पर चलता है। उस समय वो खुद को दुनिया की सबसे

    प्वाइंटलेस जर्नलिस्ट कहती है। सीएनएन का रिजेक्शन लेटर आज तक उसकी मेल में पड़ा है जो उसका ड्रीम जॉ़ब होता है। वो अपनी नाकामयाबियों को कोसते नजर आती हैं।

    प्लॉट

    प्लॉट

    नूर एक ऐसी लड़की है जिससे आप आसानी से कनेक्ट करेंगे, रम पीती है, वजन की चिंता करती है। उसके घर में उसे समझने वाले पापा हैं और एक क्यूट सी बिल्ली और हां नूर के दो दोस्त हैं जारा (शिबानी दांडेकर), साद (कनन गिल),तीनों अपनी जिंदगी के उतार चढ़ाव एक साथ शेयर करते हैं।नूर की जिंदगी तब बदल जाती है जब उसकी मुलाकात एक फोटोजर्नलिस्ट अयान बनर्जी (पूरब कोहली) से एक आर्ट एक्जिबिशन में होती है जो उसके घर कामवाली करने वाली मालती (स्मिता तांबे)

    के इंटरव्यू के लिए कन्विंस कर लेता है। क्या मुंबई शहर नूर के अंदर की असली सच्चाई को लाने में मदद करेगा जब उसकी अवाज शहर के हंगामे के सामने दब जाती है।

    डायरेक्शन

    डायरेक्शन

    सुन्हील सिप्पी एक वास्तविक बात रखना चाहते हैं कि वो अपने करियर में एक बड़ी और करियर को नई दशा देने वाली स्टोरी चाहती है लेकिन पत्रकारिता के बेसिक प्वाइंट भूल जाती है।मीडिया की ये एक कड़वी सच्चाई है कि कई बार मीडिया एक इंसान की जिंदगी महज ब्रेकिंग, प्राइम टाइम और टीआरपी की वजह से बरबाद कर देती है। नूर एक पाकिस्तानी लेखक सबा इम्तियाज के किताब पर बनी है जिसका नाम कराची, यू आर किलिंग मी है। फिल्म बनाने के पीछे का इरादा बिल्कुल सही है लेकिन सुन्हील सिप्पी इसमें बहुत सारी बातों को एक साथ दिखाना चाहते हैं। अच्छी बात ये है कि डायरेक्टर ने फिल्म में कोई मेलोड्रामा नहीं डाला है जो फिल्म के बढ़िया काम कर जाती है।फिल्म पत्रकारिका में रिर्सच और बैकग्राउंड के महत्व पर बात करती है और काफी हद तक एक पत्रकार की असली जिंदगी दिखा पाती है।

    परफॉर्मेंस

    परफॉर्मेंस

    सेल्फ ऑब्सेस्ड नूर (सोनाक्षी सिन्हा) आपको शुरू से बांध कर रखेगी। वो अपने कैरेक्टर में अतिसंवेदनशीलता ला पाने में कामयाब हो जाती हैं। आप उनकी जिंदगी से हमेशा खुद को जोड़ पाएंगे।मनीष चौधरी ने नूर के एडिटर का किरदार निभाया है जो काफी आदर्शवादी है लेकिन अपनी पत्नी की कंपनी चलाता है।कहीं कहीं उन्होंने भी अपना टैलेंट दिखाया है। कनन गिल फिल्म में अच्छे लगे हैं लेकिन पूरी फिल्म में उनके शक्की स्माइल का क्या? शिबानी दांडेकर का फिल्म में कुछ खास रोल नहीं है।

    फिल्म में एक सीन है जहां नूर अपने ब्वॉयफ्रेंड अयान (पूरब कोहली) से कहती है कि तुम हॉट हो और आप भी साथ में अपनेआप अपना सर हिलाकर हां बोलते नजर आएंगे। ये एक ट्विस्ट वाकई

    मजेदार है।

     तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    नूर फिल्म का प्लाॉट लिखने में काफी समय लेती है और इसके लिए काफी धैर्य की आवश्यकता होती है। फिल्म में लंदन का भाग भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाता है। सेकेंड भी में फिल्म का मुख्य बिंदु खत्म हो जाता है। केइको नक्षरा की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और कई सीन आपको अच्छा लगेगा। आरिफ शेख एडिटिंग में थोड़ी और धार होती तो मजेदार होता। कुछ डॉयलोग वाकई स्ट्राइक करते हैं जैसे "कुछ तो ट्रोल्स कहेंगे, ट्रोल्स का काम है कहना"।

     म्युजिक

    म्युजिक

    फिल्म में नए अंदाज में लाया गया गुलाबी आखें शायद आपको भी एक अच्छी पार्टी सॉन्ग के तौर पर पसंद आए। फिल्म के बाकी गाने कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाते।

     Verdict

    Verdict

    सोनाक्षी सिन्हा की ये फिल्म बिल्कुल परफेक्ट नहीं है लेकिन आप अपने दोस्तों के साथ देख सकते हैं जो हमेशा आपके साथ रहते हैं।

    English summary
    Sonakshi Sinha's latest offering isn't a picture-perfect world when it comes to viewing as it has its own set of flaws. But it does make up for a fluffy watch with your pals who stick by your side no matter what life tosses at you. In a nutshell, Noor's self-discovery journey triumphs over her journalist self and she at least deserves a chance!
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