अल्पसंख्यकों के दर्द को दिखाती शूट ऑन साइट

डाइरेक्टर : जगमोहन मूंदडा
समाज में घट रही घटनाओं के विभिन्न पहलूओं को पर्दे पर उतारने वाले निर्देशक जगमोहन मूदंडा की फिल्म शूट ऑन साइट 7 जुलाई 2005 को लंदन के अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन पर आतंकवादियों के किए हमले पर आधारित है।
फिल्म इस घटना के बाद लंदन पुलिस को संदिग्ध व्यक्ति देखते ही गोली मारने के दिए गए शूट ऑन साइट ऑर्डर की कलई खोलती है।
फिल्म की कहानी पाकिस्तान से लंदन बसे स्कॉटलैंड यार्ड के काबिल पुलिस ऑफिसर तारिक अली ( नसीरुद्दीन शाह ) की है। तारिक ने अंग्रेज महिला से शादी करके खुद को यहीं के माहौल में ढाल लिया है।
आतंकी हमले के बाद स्थानीय पुलिस एक बेकसूर मुस्लिम युवक को शूट करने की जांच का जिम्मा तारिक के कंधों पर यह सोच कर डालती है कि एक मुस्लिम ऑफिसर केस की जांच करेगा तो मीडिया को कुछ खास नहीं मिल पाएगा।
लंबी जांच के दौरान तारिक को एहसास होता है कि उसके आला अफसर उसे शक की नज़रों से देख रहे हैं। उसे पता चलता है कि मारा गया व्यक्ति बेकसूर था।
तारिक के पांवों तले जमीन उस वक्त खिसकती है जब उसे पता चलता है कि लंदन में आतंक की यह लपटें उसके अपने घर से भी निकल रही हैं।
फिल्म लंदन में रहने वाले खास समुदाय के लोगों की भावनाओं को अलग ढंग से पेश करती है। फिल्म में कट्टरवादी मुस्लिम नेता जुनैद इमाम ( ओम पुरी ) लंदन में रहने वाले इस समुदाय के लोगों में जहर भरने में लगा है।
फिल्म खास क्लास के दर्शकों के लिए है जो पर्दे पर वास्तविकता से रूबरू होना चाहते हैं। नसीरुद्दीन पूरी फिल्म में छाए हुए हैं तो ओम पुरी अपनी छोटी सी भूमिका में काफी प्रभावित करते हैं।
फिल्म को अंग्रेजी में बनाया गया है और निर्माता ने इसे जब हिंदी में डब करके रिलीस करने का फैसला लिया तो नसीर ने अपनी आवाज़ देने से यह कह कर इनकार कर दिया कि वह अंग्रेजी फिल्मों को हिंदी में डब करके रिलीज करने के खिलाफ हैं।


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