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Review- दमदार अदाकारी.. तगड़ी कहानी के साथ आ गई है 'मॉम'

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3.5/5

कास्ट- श्रीदेवी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना, सजल अली, अदनान सिद्दिकी, अभिमन्यु सिंह
डायरेक्टर -रवि उद्यावर
प्रोड्यूसर - बोनी कपूर, सुनील मनचंदा, नरेश अग्रवाल, मुकेश तलरेजा, गौतम जैन
लेखक - रवि उद्यावर, गिरिश कोहली, कोना वेंकट राव
शानदार पॉइंट - परफॉर्मेंस, डायरेक्शन
निगेटिव पॉइंट - कुछ सीन ऐसे हैं जो अपना प्लाट खोते नजर आते हैं लेकिन मॉम लगभग पूरे समय आपका अटेंशन फिल्म की तरफ बरकरार रखेगी।
शानदार मोमेंट - दिल्ली में अंधेरी रात में वीरान सड़क पर एक कार बिना किसी आवाज के जा रही होती है। एरियल शॉट में दिखाया गया है कि कार रुकती है और दो दरवाजे खुलते हैं। ड्राइवर
अपने सीट को पीछे की सीट से बदलता है।कार फिर से चलने लगती है और फिर रूक जाती है। एक बेहोश टीनएज बेहोश और चोटिल लड़की को नाली में फेंक दिया जाता है। बेहद सीरियस म्यूजिक के साथ ये सीन थोड़ी देर के लिए आपको सुन्न कर देगा।

प्लॉट

प्लॉट

देवकी (श्रीदेवी) स्कूल में बॉयोलॉजी की टीचर हैं। फिल्म की शुरूआत क्लासरूम में एंट्री से होती है। विषय है 'शरीर में भिन्न भिन्न प्रकार के मांशपेशियां"। 'मैम' क्लास को थोड़ा दिलचस्प बनाना चाहतीहै इसलिए सलमान खान के सिक्स एब्स फ्लॉन्ट करते तस्वीर लेकर आती है।अचानक आर्या (सजल अली) का मोबाइल सबका ध्यान खींचता है और क्लास में हंसी ठिठोली शुरू हो जाती है। देवकी की नजरें भी आर्या पर जाती है। देवकी आर्या के पास पहुंचती है और उसकी नजरें मोबाइल के स्क्रीन पर जाती है। हम देखते हैं कैसे चेहरे का एक्सप्रेशन बदलता है और माहौल सीरियस हो जाता है। आर्या को जो मैसेज भेजता है देवकी उसके पास जाती है और मोबाइल लेकर क्लास के बाहर फेंक देती है। इसके बाद सीन बदल जाता है और पता चलता है कि आर्या देवकी की सौतेली बेटी है।दोनों के बीच तनावपूर्ण रिश्ता है। आर्या देवकी को मां नहीं मानना चाहती और मैम कहकर बुलाती है। जबकि देवकी इस दूरी को खत्म करने की जीतोड़ कोशिश करती है।

MOM Movie Review: Sridevi and Nawazuddin Siddique SHINES | FilmiBeat
प्लॉट

प्लॉट

आर्या और देवकी के टेंशन के बीच हमें पता चलता है कि आर्या अपने पापा (अदनान सिद्दिकी) से काफी क्लोज है। वैलेंटाइन डे के एक दिन पहले आर्या की स्कूल के दोस्तों के साथ दिल्ली के एक फार्म हाउस में शानदार पार्टी होती है। आर्या घर वापस आने के लिए कैब लेती है लेकिन अगली दिन आर्या चोटिल और बुरी अवस्था में पाई जाती है। जल्द ही आर्या घटना के आरोपियों को पहचान लेती है। लेकिन वो कोर्ट से सुबूत ना होने के कारण छोड़ दिए जाते हैं। आर्या की इस स्थिति और अन्याय के कारण देवकी पूरे मामले को अपने हाथ में लेती है। वो प्राइवेट जासूस दयाशंकर कपूर उर्फ डीके (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) के पास पहुंचती है जो मदद करने के लिए तैयार हो जाता है। इसके बाद देवकी आरोपियों से कैसे बदला लेती है और क्राइम ब्रांच ऑफिसर मैथ्यू फ्रांसिस (अक्षय खन्ना) की नजर होने के बावजूद कैसे बदला लेती है?

 डायरेक्शन

डायरेक्शन

रवि उद्यार ने एक कॉन्फिडेंट डॉयरेक्शन डेब्यू किया है। उनका इलस्ट्रेटर बैकग्राउंड और विज्ञापन की सेंसिबिलिटी सीधे तौर पर सिनेमा में दिखती है। मॉम हो सकता है कहानी के मामले में रवीना टंडन की फिल्म की याद दिलाए लेकिन ये रवि का फिल्म को पेश करने का अंदाज है जो आपके उपर काफी गहरा असर छो़ड़ जाएगा। मॉम के कई सीन हैं जो देखकर आप भी कांप जाएंगे।

 परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

श्रीदेवी में आज भी एक चुंबकीय आकर्षण है जो । ये उनकी 300वीं फिल्म है और इस फिल्म को भी देखकर भी आप यहीं कहेंगे कि वाकई आज की एक्ट्रेसेस भी उनके आगे शरमा जाएं। उनकी
दमदार पर्सनैलिटी और एक्टिंग पावर आपकी पलक झपकने नहीं देगी। एक सीन में वो हॉस्पिटल में रो देती हैं, और उस सीन को देखकर आप भी सिहर उठेंगे। वो दिखा देती हैं कि एक मां जानती
है कि बच्चा किस दौर से गुजर रहा है।

नवाजुद्दीन सिद्दिकी भी फिल्म में शानदार लगे हैं। उनके और श्रीदेवी के साथ में सीन ट्रीट से कम नहीं है। फिल्म पूरी तरह से भावनात्मक और सीरियस फिल्म है तो वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपने ह्युमर से फिल्म में बैलेंस लाते हैं।

अक्षय खन्ना फिल्म में एक रफ एंड टफ पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभा रहे हैं। श्रीदेवी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी के मुकाबले उनका अच्छे से उपयोग नहीं किया गया है लेकिन फिर भी वो अपनी छाप छोड़ने में कामयाब होते है।

सजल भी फिल्म में काफी इंप्रेसिव हैं। वो अपने कैरेक्टर के साथ न्याय करने में सफल रही हैं।चाहे वो गुस्सा, दर्द, दुख झेलना हो। उन्होंने बखुबी किया है।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

कुछ सीन छोड़ दें तो गिरीश कोहली का स्क्रीनप्ले कमाल का है। अनय गोस्वामी की सिनेमेटोग्राफी भी फिल्म में काफी दिलचस्पी जोड़ते जाती है। मोनिषा आर.बालगवा की एडिटिंग भी शानदार है।

 म्यूजिक

म्यूजिक

फिल्म में गानों का कोई स्कोप नहीं है। ए.आर रहमान का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म में जान डाल देता है। कहानी दिखाने के मामले में मॉम काफी पॉवरफुल है।

 Verdict

Verdict

मॉम सिर्फ बदले की कहानी नहीं है। ये पूरी गहराई के साथ बताती है कि मां का प्यार अनंत होता है।कम शब्दों में बोलें तो मॉम बेहतरीन फिल्म है जिसमें श्रीदेवी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने शानदार
एक्टिंग की है तो रवि उद्यावर ने बेहद शानदार तरीके से इसे दिखाया है।

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    English summary
    Mom movie review story plot and rating,

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