मिथक तोड़ती फिल्म: लव, सेक्स औऱ धोखा

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में ये प्रायोगिक सिनेमा का दौर है औऱ हमें खुश होना चाहिए कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं। पहले के सिनेमा से आज के सिनेमा में बहुत ज्याद बदलाव आया है। ये बदलाव सिर्फ तकनीकी स्तर पर नहीं बल्कि मानसिक स्तर का है। देव डी, इश्किया और एलएसडी जैसी फिल्में साबित करती हैं कि फिल्में स्टार के दम पे नहीं बल्कि किरदार और कहानी के दम पे चलती हैं जो कि असलियत है।
यहां पर और भी दूसरी कई फिल्मों का नाम लिया जा सकता है लेकिन मैं सिर्फ इन तीन फिल्मों का नाम इसलिए ले रही हूं क्योंकि इन फिल्मों में प्यार की भावना को पवित्रता की सीमा तोड़ते हुए असलियत से रुबरु करवाया है। कि दर्शक जान सकें दुनिया ऐसी भी है जहां सिर्फ होठों के छू लेने से हिरोइन मां नहीं बन जाती। प्यार को पवित्र दिखाने, हीरो को अमर बनाने औऱ हिरोइन को चरित्रवान बनाने से आगे बढ़कर दिखाने वाली फिल्में हैं ये। कुछ इसी तरह की फिल्म है लव, सेक्स औऱ धोखा।
नाम सुनकर जरूर अजीब लगता है बल्कि हमारा समाज ऐसा है कि सेक्स शब्द बोलते ही सुनने वाले के कान खड़े हो जाते हैं औऱ बोलने वाले के चरित्र पर उसी वक्त कुछ अजीब किस्म का शक तारी होने लगता है। लव, सेक्स औऱ धोखा फिल्म ने रिलीज के पहले भी काफी पब्लिसिटी पाई औऱ रिलीज होने के बाद तारीफ पाने का हक भी रखती है। दिबाकर बैनर्जी इससे पहले खोसला का घोंसला औऱ ओय लकी लकी ओय जैसी फिल्में बना चुके हैं। उनके निर्देशन औऱ कहानी के चुनाव में विविधता है। वो एक बार सफल हो जाने के बाद सफलता के फार्मूले पर औऱ भी ढ़ेरों फिल्में बनाकर वाह-वाही लूटते नहीं दिखते बल्कि अपनी पहले की दो फिल्मों की तरह तीसरी फिल्म में भी कुछ नया दिखाते नजर आते हैं।
दिबाकर की फिल्मों की खासियत ये है कि ये आप के आस पास की दुनिया से उठाई गई कहानिया हैं। जो कि सच है, जो कि हमारे इर्द गिर्द हो रहा है। इसलिए ये फिल्में मध्यमवर्ग को अपनी ओर खींचती हैं। लव, सेक्स औऱ धोखा फिल्म जरूर एक बार आपको संशय में डालेगी कि फिल्म देखने जाएं या ना जाएं जाने क्या देखने को मिले। फिल्म में जरूर पोर्नोग्राफी को मुद्दा बनाया गया है लेकिन यकीन मानिए ये फिल्म आपको वाहियात नहीं लगेगी। ये कामुक औऱ अश्लील भी नहीं है।
फिल्म में तीन अलग-अलग कहानियां हैं। इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी शूटिंग करने का तरीका है। पूरी फिल्म में ऐसा लगता है जैसे डिजिटल कैमरे से हिलते-हिलाते फिल्म स्टडीज के छात्रों ने कोई फिल्म तैयार की है। पूरी फिल्म में कैमरा हावी है या यूं कह लें ये कैमरे की कहानी है जो बताती है आज कि डिजिटल होती दुनिया में कैमरे की अहमयित कितनी ज्यादा है। जिसकी निगाहें चारों तरफ हैं।
अगर आप प्रायोगिक सिनेमा के शौकीन हैं औऱ स्टीरियोटाइप फिल्मों से इतर कुछ नया देखना पसंद करते हैं तो फिल्म देखने जरूर जाएं। मैं ये नहीं कहूगी कि ये एक बेहतरीन फिल्म है लेकिन लव, सेक्स औऱ धोखा आपको फिल्म देखने का एक नया नजरिया देगी कि फिल्म ऐसे भी बनाई जा सकती है। गीत-संगीत कुछ खास नहां है। नए कलाकार अपने किरदारों में फिट बैठे हैं।
निर्देशक : दिबाकर बैनर्जी
निर्माता : बालाजी टेलीफिल्मस, एकता कपूर
कलाकार : अंशुमान झा, नेहा चौहान, राजकुमार यादव आर्य देव दत्ता
संगीत : स्नेहा खानवेलकर


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