समीक्षा: जोरदार है 'नॉकआउट'

संगीत : गौरवदास गुप्ता
कलाकार : संजय दत्त, कंगना राणावत , इरफान खान
रेटिंग:3/5
समीक्षा : हॉलीवुड की फेमस फिल्म 'टेलिफोन बूथ' से काफी हद तक प्रभावित है, मणिशंकर अय्यर की नॉकआउट। फिल्म नॉक आउट हमारे देश में राजनीति और अपराध के गठजोड़ को दर्शाती है, फिल्म में राजनीतिज्ञों द्वारा काले धन को जमा कर स्विस खतों में जमा करने की बात को उठाया गया है, फिल्म कि कहानी में दो घंटे अहम भूमिका निभाते है। मणिशंकर का ट्रीटमेंट अच्छा है, फिल्म में एक नयापन है, जो बॉलीवुड के लिए अच्छा साबित हो सकता है।
टोनी बने इरफ़ान खान एक इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं जो नेताओं के काले धन को स्विटज़रलैंड एक खतों में जमा करने का काम करता है, वह इस काम के लिए अपना निजी टेलीफोन नंबर इस्तेमाल न कर बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स एक टेलीफोन फोन बूथ का सहारा लेता है, और एक दिन उसी टेलिफोन बूथ में नजरबंद हो जाता है, बस यही फिल्म का दिलचस्प मोड़ है। फिल्म में इरफ़ान खान ने दमदार रोल किया है, कंगना इस फिल्म में काफी अलग लुक में नज़र आई हैं उनका अभिनय भी फिल्म में ठीक ठाक है, संजय दत्त ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में बेहतरीन काम किया है, खासकर एक्शन सींस में उन्होंने जान डाल दी है, सुशांत सिंह भी ठीक हैं। फिल्म की सिनेमाटोग्राफी अच्छी है, एक एक्शन थ्रिलर होने के नाते फिल्म की गति ठीक है, कुल मिलाकर कहा जा सकता है जोर दार है नॉकआउट।


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