'जोगी' रिव्यू- दंगों की आग में दोस्ती को तलाशती कहानी, अभिनय से दिल छूते हैं दिलजीत दोसांझ

Rating:
3.0/5

निर्देशक- अली अब्बास जफर
कलाकार- दिलजीत दोसांझ, मोहम्मद जीशान अय्यूब, हितेन तेजवानी, अमायरा दस्तूर, परेश पाहूजा, नीलू कोहली, कुमुद मिश्रा
प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स

"समझ नहीं आता, नफरत की इतनी आग कैसे है लोगों के दिलों में?" दंगों में किसी तरह अपने लोगों की जान बचाता जोगी (दिलजीत दोसांझ) कहता है। "कोई पैदा थोड़ी होता है नफरत की आग ले के", जवाब में सामने खड़ा दोस्त रविंदर (मोहम्मद जीशान अय्यूब) कहता है। इस फिल्म में अली अब्बास ज़फ़र ने जोगी की दोस्ती, विश्वासघात और कुछ लोगों के सत्ता के लालच की कहानी के द्वारा दिल्ली में हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों को फिर से स्क्रीन पर दिखाया है। ये कहानी दिल दहलाती भी है और दुखाती भी है। दंगों के दौरान व्यक्तिगत दुश्मनी कैसे राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग ले लेती है, निर्देशक ने इसे काफी स्पष्ट रूप से सामने रखा है।

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सुलतान, टाइगर जिंदा है और भारत जैसी बिग बजट फिल्मों के लिए जाने जाने वाले निर्देशक अली अब्बास जफर इस बार 'जोगी' के रूप में एक राजनीतिक ड्रामा लेकर आए हैं। कहानी है चार दोस्तों की, जिनमें दो हिंदू, एक मुस्लिम और एक सिख है। सांप्रदायिक आग के बीच ये कहानी दोस्ती और मानवता की तलाश करती है।

कहानी

कहानी

कहानी शुरु होती है तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से। जिसके बाद देश भर में, खासकर दिल्ली में दंगे भड़क उठते हैं और सिखों की चुन चुनकर हत्या कर दी जाती है। सुबह तक हंसता खेलता, रोजगारी में व्यस्त मोहल्ला, कुछ ही घंटों में आग की लपटों से घिरा दिखता है। हर तरह अफरा तफरी मची है। सिख समुदाय के घरों में घुस घुसकर उनकी हत्या की जा रही है, उनके घर, गाड़ी और दुकानों को जलाया जा रहा है। जब जोगी (दिलजीत) त्रिलोकपुरी में अपनी गली के लोगों को सांप्रदायिक भावनाओं की आग से बचाने का फैसला लेता है। इसमें साथ देता है उसका दोस्ता रविंदर चौटाला (जीशान अय्यूब), जो एक पुलिस अधिकारी है.. और कलीम अंसारी (परेश पाहुजा), दोनों अपनी दोस्ती के लिए अपनी नौकरी और जान की बाजी लगा देते हैं। लेकिन उनका एक चौथा दोस्त भी है, लाली कात्याल (हितेन तेजवानी), जो जोगी से अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी का बदला लेने की ठानता है और दंगों की आग से बेहतर मौका उसे नहीं मिलता। स्थानीय पार्षद तेजपाल अरोड़ा (कुमुद मिश्रा) के साथ मिलकर लाली प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा करता है। दंगों के बीच उनकी दोस्ती जीतती है या नफरत की आग.. इसी के इर्द गिर्द घूमती है कहानी।

पटकथा और निर्देशन

पटकथा और निर्देशन

फिल्म की पटकथा लिखी है सुखमनी सदाना और अली अब्बास ज़फ़र ने। 1984 की घटनाओं को दिखाने के लिए जिस स्पष्टता और संवेदनशीलता की जरूरत थी, वो निर्देशक बखूबी लेकर आए हैं। यह एक भावनात्मक कहानी है जो अपने पात्रों को स्थापित करने में समय बिताती है। लेकिन कहानी का मूल है दोस्ती.. जहां फिल्म थोड़ी ढ़ीली पड़ती है। चारों दोस्तों के बीच जिस तरह के भावनात्मक जुड़ाव को दिखाया जाना चाहिए था, वो स्क्रीन पर सामने नहीं आता। दिलजीत और जीशान अय्यूब के दृश्य फिर भी कुछ प्रभाव पैदा करते हैं, लेकिन हितेन तेजवानी की बैक स्टोरी कहानी को खींचती सी लगती है। बहरहाल, जो बात अच्छी लगती है वो ये कि जोगी के इर्द-गिर्द के पात्र ज्यादा मानवीय लगते हैं। चाहे वो उसका साथ देने वाले दोस्त हैं या स्वार्थी राजनेता के किरदार में कुमुद मिश्रा।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

अली अब्बास जफर ने फिल्म में ड्रामा जोड़ने के लिए कई जगह क्लोज-अप शॉट्स का उपयोग किया है। एक दृश्य में जोगी अपनी पग (पगड़ी) हटाते हैं और बाल काटने लगते हैं और उनकी आंखों से लगातार आंसू बहते जाते हैं.. क्लोजअप शॉट में यह दृश्य भावुक कर देता है। फिल्म का तकनीकी पक्ष मजबूत है। साउंड डिजाइन, Marcin Laskawiec की सिनेमेटोग्राफी और समीर उद्दीन के दिल छूने वाले लिरिक्स कथानक को प्रभावशाली बनाते हैं।

अभिनय

अभिनय

अभिनय की बात करें तो दिलजीत दोसांझ हमेशा की तरह अपने अभिनय से दिल छूते हैं। वह हमेशा अपने किरदार की बारीकियों में उतरते हैं, जो स्क्रीन पर बहुत प्रभावित करता है। दोस्तों के किरदार में परेश पाहूजा और मोहम्मद जीशान अय्यूब अपनी भूमिका बखूबी निभाते हैं। कुमुद मिश्रा ने तेजपाल अरोड़ा के रूप में सराहनीय अभिनय किया है, नतीजा के तौर पर आप उनसे घृणा करने लगेंगे। वहीं, हितेन तेजवानी ने तेजपाल के दाहिने हाथ वाले इंस्पेक्टर लाली कात्याल की भूमिका निभाई है। इस फिल्म में हितेन के अभिनय को देखकर कहा जा सकता है कि उन्हें और निगेटिव भूमिकाएं मिलनी चाहिए।

रेटिंग- 3 स्टार

रेटिंग- 3 स्टार

कुल मिलाकर, 'जोगी' दिल दहलाने वाली त्रासदी के बीच भी उम्मीद खोजने की भावनाओं को दिखाती है। लेखन में कुछ कमियां होने के बावजूद.. इंसानियत और दोस्ती की यह कहानी निश्चित रूप से आपको भावुक और प्रभावित करेगी। फिल्म को आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं। फिल्मीबीट की ओर से जोगी को 3 स्टार।

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