हमशक्ल्स फिल्म रिव्यू- ये पागल नहीं हैं भइया...
स्टार- 2.5
निर्माता- वाशु भगनानी
निर्देशक- साजिद खान
कलाकार- रितेश देशमुख, सैफ अली खान, राम कपूर, ईशा गुप्ता, तमन्ना भाटिया, बिपाशा बासु
संगीत-साजिद अली, वाजिद अली, हिमेश रेशमिया
साजिद खान की फिल्म हमशक्ल्स को लेकर लोगों ने काफी उम्मीदें लगा रखी हैं और आपकी इन उम्मीदों पर हम पूरी तरह से तो पानी नहीं फेरेंगे लेकिन अगर ये कहें कि हमशक्ल्स देखने जाएं मगर ज्यादा बड़ी उम्मीदों के साथ नहीं तो शायद ये गलत नहीं होगा। सैफ अली खान, रितेश देशमुख, राम कपूर जैसे बेहतरीन कलाकारों के होने के बावजूद हमशक्ल्स फिल्म इतनी भी मजेदार नहीं रही कि लोगों के ठहाके सिनेमाहॉल में गूंजते सुनाई दें। हालांकि सभी कलाकारों और फिल्म निर्देशक साजिद खान ने अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखी और उन सभी ट्रिक्स को आजमाया जिनके चलते अभी तक बॉक्स ऑफिस पर वो सफल रहे हैं।
कहानी- अशोक(सैफ अली खान) और कुमार (रितेश देशमुख) दोनों बहुत करीबी दोस्त हैं। अशोक एक बहुत बड़ी कंपनी का मालिक है और करोड़पति है। अशोक के पिता कोमा में हैं और उसके मामा (राम कपूर) चाहते हैं कि पूरी प्रॉपर्टी उन्हें मिल जाए। इसके लिए दो कंडीशन हैं कि या तो अशोक पागल हो जाए और या तो कोमा में चला जाए। मामा प्लान बनाकर अशोक और कुमार को पागलखाने पहुंचा देता है। दूसरी तरफ अशोक और कुमार के हमशक्ल्स भी उसी पागलखाने की जेल में बंद हैं। ईशा गुप्ता जो कि पागलखाने में डॉक्टर है वो समझ जाती है कि कोई अशोक के खिलाफ साजिश कर रहा है और वो अशोक को पागलखाने से छोड़ देती है।
लेकिन ट्विस्ट ये है कि पागलखान से जो बाहर जाते हैं वो कुमार और अशोक नहीं बल्कि उनके हमशक्ल्स हैं। मामा को ये पता चलता है और वो प्लान बनाकर अशोक व कुमार के हमशक्ल्स के जरिये सारी जायदाद अपने नाम कराने का प्लान करते हैं। लेकिन तभी अशोक और कुमार भी सब जानने के बाद बाहर निकलते हैं और उनकी मदद करता है मामा का हमशक्ल्स जो कि उसी पागलखाने में बंद है। इसी के बीच सबकी प्लानिंग प्लॉटिंग के दौरान ही कुछ ऐसी परिस्थितियां बनती हैं कि अशोक, कुमार और मामा के तीसरे हमशक्ल्स भी इस लड़ाई में कूद पड़ते हैं।


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