गुलाबो सिताबो फिल्म रिव्यू - मियां बीवी आयुष्मान और बच्चन साहब की नोकझोंक, लेकिन दिल जीतेगी माशूका
फिल्म - गुलाबो सिताबो
निर्देशक - शूजित सरकार
स्टारकास्ट - आयुष्मान खुराना, अमिताभ बच्चन, फर्रूख जफर व अन्य
प्लेटफॉर्म - अमेज़ॉन प्राइम
लालच से आजतक कोई आदमी नहीं मरा। और 78 साल का एक बूढ़ा, जिसका आधा पैर कब्र में लटका हो वो जब ये बात बोले तो और भी मज़ेदार लग सकती है। लेकिन फिर जब वो बूढ़ा मिर्ज़ा एक जर्जर सी हवेली से अपनी मोहब्बत और उल्फत बयान करता है तो लगता है कि वाकई इश्क बस यही है। अपनी जगह से। शूजित सरकार की गुलाबो सिताबो की कहानी का मुख्य किरदार यही हवेली है।

हवेली जिसका नाम है फातिमा महल और जिसके किराएदार हैं बांके यानि कि आयुष्मान खुराना। जिसकी कंजूसी की कोई सीमा नहीं है। हवेली की मालकिन हैं बेगम (फर्रूख ज़फर) लेकिन हवेली का मालिक खुद को समझता है मिर्ज़ा (अमिताभ बच्चन) जो कि इतना लालची है कि बस खुद को नहीं बेच रहा है तो गनीमत है।
गुलाबो सिताबो कहानी है इसी किराएदार और मकान मालिक की नोंक झोंक की। किराएदार जो इस फातिमा महल में सात पीढ़ियों से रहता है और किराए के नाम पर 30 रूपया देता है। वहीं मकान मालिक जो किराएदार को घर से निकाल देना चाहता है।
किराएदार मकान मालिक की नोंक झोंक इस पूरी फिल्म का सार बनती है लेकिन फिल्म आपका दिल जीतती है क्लाईमैक्स पर जहां पति पत्नी जैसे लड़ने वाले आयुष्मान और अमिताभ बच्चन के बीच दिल जीत ले जाएगी माशूका यानि कि बेगम!
शूजित सरकार गुलाबो सिताबो को बेहद आसानी से दाल चावल और अचार की तरह परोस सकते थे। उन्होंने परोसा भी। बस दिक्कत ये कि वो अचार डालना ही भूल गए। और इसलिए गुलाबो सिताबो में सब कुछ है पर चटखारे नहीं हैं।


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