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संगठन में शक्ति है और अकेले में इनकी फटती है- गुलाब गैंग फिल्म समीक्षा!

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(सोनिका मिश्रा) राजनीती को लेकर एक कहावत बहुत ही मशहूर है कि अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता। इस कहावत में कितनी सच्चाई है ये तो हर कोई जानता है लेकिन गुलाब गैंग फिल्म ने इस सच्चाई को कुछ इस तरह से पेश किया है कि वाकई ये सभी को कड़वी लग रही है। राजनीती और जनता ये दोनों ही मिलकर समाज बनाते हैं। जनता से राजनेता बनते हैं और राजनेताओं से हमारे समाज के नियम। लेकिन जब इन नियमों को बनाने वाले ही इन नियमों के साथ खेलने लगें तो ऐसे समाज को भला क्या नाम दिया जा सकता है। इसी समाज की तस्वीर दिखाई है सौमिक सेन की फिल्म गुलाब गैंग ने। हालांकि फिल्म का नाम गुलाब गैंग है और फिल्म महिलाओं और लड़कियों को अपने हक के लिए लड़ने की प्रेरणा देती है। लेकिन ये तो सिर्फ फिल्म की रुपरेखा है। फिल्म को समझेंगे तो पता चलेगा कि गुलाब गैंग सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के अलावा भी समाज में राजनीती और जनता के बीच चल रहे गंदे खेलों को भी बड़ी ही खूबी के साथ पेश करती है।

दिल तो पागल है थी जूही-माधुरी की पहली फिल्म!

जूही चावला ने अपने इंटरव्यू के दौरान कहा था कि गुस्से को निकालने के दो तरीके होते हैं। एक बहुत ही आसान और आम तरीका है चिल्लाकर गुस्सा निकालना, और एक तरीका है चबाकर गुस्सा उतारना। एक राजनेता को अपने गुस्से को चबाकर ही निकालना होता है। चीखकर चिल्लाकर वो अपने गुस्से को निकालने से उसकी इमेज और उसकी कुर्सी पर खतरा बढ़ जाता है। जूही चावला ने भी गुलाब गैंग में एक राजनेता का किरदार निभाया है और उस किरदार में जान डाल दी है। सुमित्रा के किरदार को देखकर कहीं ना कहीं आपको महसूस होगा कि आप एक असली राजनेता का चेहरा परदे पर देख रहे हैं, उसी की सोच को महसूस कर रहे हैं।

दूसरी तरफ माधुरी दीक्षित ने रज्जो किरदार में जान डालने की पूरी कोशिश की लेकिन कहीं ना कहीं माधुरी के किरदार को इतना ज्यादा हिरोइक बना दिया है कि लोगों को इस किरदार पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। रज्जो के किरदार में माधुरी दीक्षित हांलांकि बहुत ही खूबसूरत दिखी हैं और गुलाब गैंग के सदस्यों के बीच फिल्म में दिखाई जाने वाली नोंक झोंक, मस्ती भरी बातों वाले कुछ दृष्य वाकई बहुत ही मजेदार और मनोरंजक बने हैं। इसके अलावा माधुरी और जूही चावला के साथ के दृष्य जब भी परदे पर आए तो लोगों की निगाहें स्क्रीन पर थमकर ही रह गयीं। दोनों अभिनेत्रियां एक दूसरे के सामने थीं लेकिन दोनों की बराबरी करना ही बहुत मुश्किल प्रतीत हो रहा था।

समीक्षा के कुछ अंश:

माधुरी ने निभाया रज्जो का किरदार

माधुरी ने निभाया रज्जो का किरदार

गुलाब गैंग में माधुरी दीक्षित के किरदार का नाम है रज्जो। रज्जो एक गावों में महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए उन्हें पढ़ना सिखाती है। वो चाहती है कि गांव में लड़कियों के लिए एक स्कूल बने। रज्जो के किरदार में माधुरी बहुत ही खूबसूरत और बेहतरीन नज़र आई हैं।

रज्जो का किरदार वास्विकता से काफी दूर

रज्जो का किरदार वास्विकता से काफी दूर

एक तरफ जहां रज्जो का किरदार महिलाओं को अपने हक के लिए लड़ना सिखाती है वहीं दूसरी तरफ रज्जो खुद जिस तरह से अकेले ही गुंडों से भिड़ जाती है, एक ही वार में कइयों को मार देती है उसपर यकीन कर पाना थोड़ा मुश्किल प्रतीत होता है।

जूही बनीं सुमित्रा देवी

जूही बनीं सुमित्रा देवी

जूही चावला के किरदार का नाम है सुमित्रा। सुमित्रा गांव में चुनाव लड़ती है और रज्जो के लोकप्रियता को अपने फायदे के लिए यूज करने के लिए रज्जो को अपने साथ शामिल करने की कोशिश करती है।

सुमित्रा के गुस्से को चबाने वाले दृश्य बेहतरीन

सुमित्रा के गुस्से को चबाने वाले दृश्य बेहतरीन

बतौर राजनेता जूही चावला ने राजनेताओं की ही तरह हर काम शांति और प्यार से मुस्कुरा कर करने की बात को दिखाया है। साथ ही अपने गुस्से को भी चिल्लाकर व्यक्त ना करके चबाकर उतारने की कोशिश की है जो कि स्क्रीन पर बहुत ही बेहतरीन नज़र आया है।

माधुरी और जूही में बराबरी करना मुश्किल

माधुरी और जूही में बराबरी करना मुश्किल

माधुरी और जूही दोनों ने फिल्म में बहुत ही बेहतरीन काम किया है। दोनों के काम को देखकर दोनों को कंपेयर करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। जूही चावला और माधुरी दीक्षित के साथ के सीन्स इतने अच्छे नज़र आए हैं कि लोगों ने उन सीन्स के दौरान अपनी नज़र कहीं और घुमाई तक नहीं।

English summary
Madhuri Dixit and Juhi Chawla starrer Gulaab gang finally hit the theaters today. Gulaab gang is a story of a Rajjo who helps women to get their self respect and raise voice against the injustice happening to them. Juhi is playing the Sumitra's character who is an politician.
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