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    'धमाका' फिल्म रिव्यू: कमजोर कहानी को धमाकेदार परफॉर्मेंस से बचाते हैं कार्तिक आर्यन

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    Rating:
    3.0/5

    निर्देशक- राम माधवानी
    कलाकार- कार्तिक आर्यन, मृणाल ठाकुर, अमृता सुभाष
    प्लेटफॉर्म- नेटफ्लिक्स

    "खोया पाया तूने हैं क्या, अब तू काहे गिनती करे; जीना था जब जीया नहीं, अब जीने की विनती करे.." फिल्म के क्लाईमैक्स में बैकग्राउंड में बज रहा ये गाना एक तरह से पूरी फिल्म को समेटता है। जिंदगी में कुछ पा लेने की चाह में लोग किस हद तक जा सकते हैं और क्या वहां तक पहुंचने के बाद उन्हें वो मिलता है, जिसके पीछे वो भाग रहे थे?

    फिल्म का एक पहलू इन सवालों के जवाब देता है। वहीं, फिल्म का दूसरा पहलू कुछ सामाजिक मुद्दे उठाता है। देश की राजनीतिक व्यवस्था और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया की प्रक्रिया को आईना दिखाता है। बम धमाके से जोड़ती ये फिल्म टीआरपी के खेल, करियर के लिए दौड़ते लोग, रिश्वतखोरी, खबरों में सच और झूठ के फर्क से लेकर गरीबों और मजदूरों के बारे में भी बात करती है।

    dhamaka-film-review-starring-kartik aaryan

    धमाका संवादों की फिल्म है। फिल्म मुख्य तौर पर एक ही कमरे में गुजरती है और गिनती के किरदार नजर आते हैं। ऐसे में अर्जुन माथुर (कार्तिक आर्यन), अर्जुन की बॉस (अमृता सुभाष) रघुबीर के बीच का संवाद ही है जो फिल्म को चलाती है। फिल्म की शुरुआत काफी शानदार रही है, लेकिन अंत तक जाते जाते लड़खड़ा जाती है।

    कहानी

    कहानी

    अर्जुन माथुर एक रेडियो जॉकी है, जो सुबह सुबह लोगों को शहर से जुड़ी खबरें सुनाता है और मुद्दों पर बात करता है। एक दिन अचानक शो के दौरान अर्जुन को एक फोन कॉल आता है, कॉलर अपना नाम बताया है कि रघुबीर महाता और वो मुंबई के सी-लिंक को बम से उड़ाने की धमकी देता है। उसकी बात को मजाक मानकर अर्जुन फोन काट देता है, लेकिन अगले ही पल जो होता है उसे देखकर अर्जुन और ऑफिस के बाकी लोग दहल जाते हैं। अर्जुन अपनी बिल्डिंग की खिड़की से देखता है कि सी-लिंक धू-धू कर जल रहा है। वहां एक बम धमाका हुआ है। इसके बाद फिल्म में अर्जुन और रघुबीर की बातचीत के जरीए कुछ सामाजिक मुद्दों को समेटा गया है। अर्जुन अपने चैनल के प्राइम टाइम में रघुबीर से ऑन एयर बातचीत करता है और उसके पीछे के मकसद को जानने की कोशिश करता है। रघुबीर उसे और भी बम धमाके करने की धमकी देता है और साथ ही अपनी मांग उसके सामने रखता है। जहां रघुबीर का अपना मकसद है, वहां अर्जुन का लक्ष्य है अपने चैनल के लिए छप्पड़फाड़ टीआरपी लाना। दोनों अपने मकसद को पूरा करने के लिए किस हद तक जाते हैं? रघुबीर यह बम धमाका क्यों करता है और इस बारे में बताने के लिए अर्जुन को ही कॉल क्यों करता है, पूरी कहानी इसी के इर्द गिर्द घूमती है।

    अभिनय

    अभिनय

    कोई शक नहीं कि कार्तिक आर्यन इस फिल्म में अपनी बाकी फिल्मों से काफी अलग नजर आ रहे हैं। इस फिल्म में कार्तिक को देखकर उनकी प्रतिभा का अंदाजा लगता है। अब तक बॉय नेक्ट्स डोर वाले किरदार निभाने वाले कार्तिक ने इसमें एक न्यूज एंकर का किरदार निभाया है। उनके किरदार में एक इंटेंसिटी है, जो कार्तिक ने जबरदस्त पकड़कर रखा है। डर, खौफ, विश्वास, अफसोस, दुख.. हर भाव कार्तिक के चेहरे पर सटीक दिखते हैं। वहीं, अमृता सुभाष और मृणाल ठाकुर ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है।

    निर्देशन

    निर्देशन

    नीरजा और आर्या (सीरिज) का निर्देशन कर तारीफें बटोरने वाले निर्देशक राम माधवानी ने दर्शकों के सामने कुछ अलग लाने की कोशिश की है। बता दें, कहीं ना कहीं ये फिल्म नीरज पांडे निर्देशित ए वेडनेस्डे की याद दिलाती है, जहां एक आम आदमी आतंकवाद से परेशान होकर बदला लेने की ठानता है। वहीं, धमाका राजनीति और भ्रष्टाचार के साथ समाज में चलती रेस पर निशाना साधा गया है। एक न्यूज एंकर और एक आतंकी के बीच की बातचीत के जरीए राम माधवानी ने कई मुद्दों को उठाया है, लेकिन ज्यादा तह नहीं गए हैं। कुछ सवाल अधूरे छूटे हुए भी महसूस करते हैं।

    तकनीकी पक्ष

    तकनीकी पक्ष

    मोनीषा बलदवा और अमित कारिया ने एडिटिंग की है, जो कि फिल्म को एक पायदान ऊपर ले जाता है। लगभग पौने दो घंटे लंबी ये फिल्म बिल्कुल मुद्दे से शुरु होती है और उसी विषय के साथ अंत होता है। फिल्म अपने किरदारों पर केंद्रित है। 'धमाका' अपने वीएफएक्स के लिए भी कुछ मार्क्स लेती है। वहीं, मनु आनंद का कैमरा वर्क शानदार है। फिल्म मुख्य तौर पर एक ही कमरे में गुजरती है और उसे काफी डिटेल्ड तरीके से कैमरे में कैद किया गया है।

    क्या अच्छा क्या बुरा

    क्या अच्छा क्या बुरा

    फिल्म के सबसे सकारात्मक पक्ष में हैं इसके कलाकार। कार्तिक आर्यन से लेकर अमृता सुभाष और मृणाल ठाकुर; सभी कलाकार अपने किरदारों में परफेक्ट लगे। फिल्म जहां कमजोर होती है वो है सेकेंड हॉफ। फिल्म में कहीं राजनीति पर कटाक्ष है, तो कहीं मीडिया पर.. जिंदगी में लिये जाने वाले चुनाव पर बनी ये फिल्म कहीं विषय से भटकने लगती है।

    देंखे या ना देंखे

    देंखे या ना देंखे

    कुल मिलाकर ना निराश करती है और ना ही उम्मीद जगाती है। कार्तिक आर्यन अभिनीत धमाका आपके मन को थोड़ा विचलित कर सकती है। एक इंसान अपनी जिंदगी में कुछ पाने के लिए क्या क्या करता है, किस हद तक तक जा सकता है, राम माधवानी ने अपनी फिल्म से उसकी एक झलक दिखाई है। फिल्म से जुड़े मैसेज और कार्तिक आर्यन के दमदार अभिनय के लिए धमाका एक बार जरूर देखी जा सकती है। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 3 स्टार।

    English summary
    Dhamaka Film review: Kartik Aaryan starrer film have a fantastic start but stumble in between. However, the brilliant performance by Kartik Aaryan and Amruta Subhas holds it tight.
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