कटपुतली फ़िल्म रिव्यू- यूनिफॉर्म में एक बार फिर इंप्रेस करते हैं अक्षय कुमार
निर्देशक - रंजीत एम तिवारी
कलाकार - अक्षय कुमार, रकुल प्रीत सिंह, चंद्रचूर सिंह, सरगुन मेहता
प्लेटफॉर्म- डिज़्नी प्लस हॉटस्टार
"सीरियल किलर के साथ पॉवर गेम नहीं, माइंड गेम खेलना चाहिए", हिमाचल प्रदेश के परवाणू की पुलिस चौकी में नए सब- इंस्पेक्टर बने अर्जुन सेठी कहते हैं। क्राइम फिल्मों के स्क्रिप्ट लिखते लिखते किस्मत अर्जन को पुलिस की नौकरी तक ले आती है और आते ही एक बेहद खतरनाक और बड़ा केस उसके सामने आ जाता है। कसौली शहर में एक सीरियल किलर बर्बरता से स्कूली लड़कियों की हत्या कर रहा है और पुलिस के पास उसे पकड़ने के लिए काफी कम वक्त है।

तमिल फिल्म 'रत्सासन' की यह आधिकारिक रीमेक एक साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर है। फिल्म की शुरुआत बेंच पर मिली एक लाश से होती है। प्लास्टिक से लिपटी वह लाश एक स्कूली लड़की की होती है, जो दो दिनों से गुमशुदा थी। लेकिन यह कोई मामूली किडनैपिंग और हत्या का मामला नहीं है। बल्कि यहां लड़की को बेहद क्रूर तरीके से मारा गया है, उसके चेहरे पर कुछ निशान हैं और आंखें फोड़ी हुई हैं। पहली दृश्य से ही केस की गंभीरता और भयावहता को बनाकर रखा गया है। कहानी थोड़ा टर्न लेती है और सामने आता है अर्जन सेठी, जो चंडीगढ़ में अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर निर्माताओं के चक्कर काट रहा है। वह एक सीरियल किलर पर फिल्म बनाना चाहता है, लेकिन उसे हर जगह अस्वीकृति का सामना करना पड़ता है। जिसके बाद परिवार के दवाब में आकर वह कसौली में पुलिस की नौकरी ज्वॉइन कर लेता है, जहां उसकी बहन अपने पति और बच्ची के साथ रहती है।
कसी हुई थ्रिलर फिल्म
यहां से प्लॉट में तेजी आती है। एक दूसरी लड़की की भीषण तरीके से हत्या कर दी जाती है और अर्जन इसे पिछले मामले से जोड़कर देखता है। जब तक पुलिस समझ पाती है, तीसरी हत्या हो जाती है। अर्जन अपनी टीम के साथ मिलकर हत्याओं की कड़ी जोड़ता जाता है, जब उसे किसी अपने को भी खोना पड़ जाता है। चौथी हत्या के बाद, पुलिस को अहसास होता है कि अब वो किलर के नजदीक हैं। लेकिन क्या एक साइकोपैथ किलर को पकड़ पाना इतना आसान होगा! किलर कौन है और क्यों है, ये सवाल कहानी में लगातार दिलचस्पी बनाए रखती है।
कटपुतली एक थ्रिलर के तौर पर काफी कसी हुई फिल्म है, खासकर फर्स्ट हॉफ तक। हालांकि अक्षय कुमार और रकुल प्रीत सिंह, जो एक शिक्षक की भूमिका में हैं, दोनों का रोमांस कहानी को थोड़ा ट्रैक से हटाता है। खासकर थ्रिलर कहानी के बीच रोमांटिक गाने को फिल्म में शामिल करने का फैसला काफी अटपटा लगा।
निर्देशक और तकनीकी पक्ष
कहानी अंतिम के आधे घंटे में लड़खड़ाती है। खासकर जब किलर का चेहरा सामने आ जाता है उसके बाद पटकथा काफी जल्दी जल्दी में निपटाई लगती है। किलर की बैकस्टोरी जितनी अनोखी है और उसका परिणाम जितना खतरनाक है, निर्देशक को उस किरदार को स्थापित करने में थोड़ा वक्त लेना चाहिए था। फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर पर भी थोड़ा और काम किया जा सकता था। तकनीकी पक्ष में फिल्म औसत है। राजीव रवि की सिनेमेटोग्राफी और साउंड डिजाइन कहानी को एक रहस्य के तौर पर स्थापित करने में मदद देती है। खासकर जहां अर्जन किलर की तलाश में है। वहीं, चंदन अरोड़ा की एडिटिंग भी कहानी को बांधे रखती है, खासकर फर्स्ट हॉफ में। 2 घंटे 14 मिनट की यह फिल्म कुल मिलाकर आपको निराश नहीं करती है।
अभिनय
अभिनय की बात करें तो अक्षय कुमार एक बार फिर गंभीर रोल में काफी अच्छे फॉर्म में नजर आ रहे हैं। पुलिस अफसर के रूप में जहां उनके हाव भाव में एक गंभीरता थी, वहीं निर्देशक ने उन्हें इक्के दुक्के कॉमेडी सीन्स भी दिए हैं, जहां अक्षय आसानी से माहौल को लाइट कर देते हैं। टीचर के किरदार में रकुल प्रीत अच्छी लगी हैं, लेकिन उनके किरदार को कहानी में ज्यादा मौका नहीं दिया गया है। जबकि सरगुन मेहता के लिए यह काफी दिलचस्प डेब्यू साबित हुआ है। वह एसएचओ (SHO) के किरदार में हैं, जो किलर को पकड़ने के लिए पहले अर्जन के विरोध में, फिर उसके साथ काम करती हैं। सहयोगी भूमिकाओं में चंद्रचूर सिंह, ऋषिता भट्ट, गुरप्रीत घुग्गी, सूजित सरकार कम वक्त में भी ध्यान आकर्षित करते हैं।
रेटिंग- 3 स्टार
'कटपुतली' को अच्छी रीमेक का दर्जा का दिया जा सकता है। फिल्म आपको कुछ थ्रिलिंग मोमेंट्स देती है। खासकर यदि आपने 'रत्सासन' नहीं देखी है, तो अक्षय कुमार की ये थ्रिलर आपको आकर्षित कर सकती है। रंजीत एम तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में कुछ कमियां हैं, लेकिन बतौर थ्रिलर पटकथा बांधे रखती है। फिल्मीबीट की ओर से कटपुतली को 3 स्टार।


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