एक्शन और गानों में हिट है कमांडो- फिल्म रिव्यू
विपुल शाह के प्रोडक्शन में बनी फिल्म कमांडो जिसमें निर्दे्शक से लेकर एक्टर तक नये और फ्रेश हैं 12 अप्रैल को रिलीज हुई है। फिल्म को देखने के बाद यकीनन आप थियेटर से बाहर निकलते हुए एक चीज जो दिमाग में लेकर जाएंगे वो है विद्धुत का एक्शन और साथ ही फिल्म के गानों की धुन। सावन बैरी गाना जहां आपको अपनी सीट पर से हिलने नहीं देगा वहीं विद्धुत का एक्शऩ आपकी आंखों को स्क्रीन पर जमाए रखेगा। निर्देशक दिलीप घोष जिनकी ये पहली फिल्म है ने भी विद्धुत को पूरा स्पेस दिया है अपना एक्शन दिखाने का। हालांकि फिल्म में पूजा चोपड़ा की एक्टिंग में कहीं कहीं काफी बोझिलता देखने को मिली लेकिन विद्धुत ने अपने एक्शन से किसी का ध्यान ज्यादा देर तर पूजा पर टिकने नहीं दिया।
कहानी- कैप्टन करनवीर डोगरा जो कि एक कमांडो है जो कि एक दिन गलती से चीन की सीमा पार करके वहां पहुंच जाता है। चीनी उसे पकड़ लेते हैं और उसे मुजरिम बनाने की कोशिश करते हैं। करन पूरी कोशिश करता है कि वो चीनी सीमा के लोगों को यकीन दिला सके कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया है और वो गलती से वहां आ गया है लेकिन करन की बात पर चीनी सीमा के लोग यकीन नहीं करते। वो लोग सोचते हैं कि करन को वो अगर हिन्दुस्तानी जासूस के तौर पर पेश करें तो हिन्दुस्तानियों को नीचा दिखा सकते हैं। दूसरी तरफ हिन्दुस्तानी आर्मी टीम सोचती है कि करन की बात नहीं सुनी जाएगी इसलिए वो करन का पूरा आर्मी रिकॉर्ड मिटा देते हैं। और कहते हैं कि करन नाम का कोई कमांडो है ही नहीं।
करन किसी तरह चीनियों के कब्जे से निकलक भारत आ जाता है। वो सीधे पठानकोट पहुचंता है जहां उसकी मुलाकात सिमृत (पूजा चोपडा़) से होती है। सिमृत गुंडों से खुद के बचाती हुई भाग रही होती है कि तभी करन उसे मिलता है और वो करन से खुद को बचाने के लिए कहती है। करन गुंडो से सिमृत को बचाता है। करन को नहीं पता कि जो गुंडे सिमृत के पीछे पड़ें हैं वो उस क्षेत्र के सबसे बड़े गुंडे अमृत कंवल सिंह के गुंडे हैं। अमृत कंवल सिंह खुद को एके 47 भी बुलाता है। एके 47 सिमृत से शादी करना चाहता है लेकिन सिमतृ उससे नफरत करती है।
आगे कहानी में क्या क्या ट्विट्स हैं देखिये स्लाइड्स में-


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