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Begum Jaan Movie Review: विद्या बालन की धाकड़ एक्टिंग है फिल्म की जान

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Rating:
3.0/5
Star Cast: विद्या बालन, इला अरुण, गौहर खान, पल्‍लवी शारदा, प्रियंका सेटिया
Director: श्रीजीत मुखर्जी

शानदार पॉइंट - परफॉर्मेंस और धारदार डायलॉग
निगेटिव पॉइंट - फिल्म का प्लॉट ऐसा है कि कुछ सीन से कनेक्ट करना मुश्किल होता है
शानदार मोमेंट - एक सीन में जब बेगम जान (विद्या बालन) शबनम (मिष्टी) को लगातार थप्पड़ मारते रहती है जबतक की वो अपने शॉक से बाहर ना निकल जाए

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बेगम जान में समाज के घिनौने चेहरे और दोहरेपन से जूझती महिलाओं की कहानी दिखाई गई है। ये आपको बैचैन कर सकती है। विद्या बालन की आखें और एक एक डायलॉग आपके रोंगटे खड़े कर देगा। बेगम जान लिखी कहानी से ज्यादा मोमेंट्स कही कहानी है। गोपू भगत की सिनेमैटोग्राफी कमाल की है और उन्होंने बेगम जान की दुनिया को बेहतरीन तरीके से दिखाया है। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा है लेकिन दूसरे हाफ में कई शानदार सीन है।

प्लॉट

प्लॉट

फिल्म की कहानी शुरू होती है कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में 2016 में हुई एक झकझोर देने वाली घटना से। इसके बाद फिल्म हमें ले जाती है 70 साल पहले जब भारत आजादी के बाद खूनी लड़ाई के बीच जी रहा था। सर साइरिल रेडक्लिफ ने देश को दो भागों में बांट दिया था और अपने प्रोजेक्ट में कामयाब रहे थे।

प्लॉट

प्लॉट

इसी बंटवारे की चपेट में बेगम जान (विद्या बालन) का कोठा भी आ जाता है। जल्दी ही स्थिति और भी बदतर हो जाती है जब उन्हें नोटिस थमा दी जाती है कि कोठे को भारत और पाकिस्तान के बीच रास्ता बनाने के लिए हटाना पड़ेगा। जब कोई विकल्प नहीं बचता है तो बेगम जान और उनकी पूरी टीम विद्रोह करती है और उस जगह को बचाना चाहती हैं जिसे वो अपना घर कहती हैं।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

श्रीजीत मुखर्जी ने ही नेशनल अवार्ड जीतने वाली फिल्म राजकहिनी बनाया था जिसकी हिंदी रिमेक है बेगम जान। वो बंटवारे के समय की एक कहानी बताने की कोशिश करते हैं जो असल में रेडक्लिफ लाइन के आड़े आ रही 11 महिलाओं की कहानी है। फिल्म का कॉन्सेप्ट काफी बोल्ड है और वाकई इसकी तारीफ की जानी चाहिए। फिल्म में जिस प्वाइंट को श्रीजीत मुखर्जी ने छोड़ा है वो विद्या बालन से लेकर हर किरदार का बैकग्राउंडड का जिक्र नहीं किया। इसलिए आप हर कैरेक्टर के साथ भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ पाएंगे क्योंकि आप उन्हें अच्छे से जानते ही नहीं हैं। कहीं कही फिल्म में मेलोड्रामा भी देखने मिलेगा इसलिए फिल्म एक बेहद शानदार फिल्म बनने से चुक जाती है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

शुरू से ही फिल्म चाहे वो विद्या बालन के आईब्रो हों या उनकी धराधड़ गालियां, वो पूरी तरह से कैरेक्टर में खुद को समा ली हैं। वो अपने काम को सबसे ज्यादा वैल्यू देती है और आजादी, बंटवारे की उन्हें कोई फिक्र नहीं है। वो जहां रहती हैं वहां की रानी हैं जो भले अपने शब्दों पर कंट्रोल ना करती हो लेकिन कठोर बेगम जान के अंदर एक बहुत ही केयरिंग दिल है। विद्या बालन ने अपने किरदार में पूरा परफेक्शन दिखाया है और हर इंटेस सीन में वो कमाल की लगी हैं। एक सीन में वो बोलती हैं "महीना हमें गिनना आता है साहब..हर बार लाल करके जाता है"। इसके बाद पल्लवी शारदा (गुलाबो) वेश्या हैं जिनका अतीत दिल दहलाने वाला है।वो अपने रोल में कमाल की लगी हैं और विद्या बालन के साथ स्क्रीन शेयर करने में उन्होंने अपना खुद का स्थान बनाया है। गौहर खान भी रूबिना के किरदार में काफी इंप्रेस करती है। जिस सीन में वो अपनी जिंदगी के बारे में और उस इंसान के बारे में बताती हैं जिससे वो प्यार करती हैं वो शानदार है। ये आपको सोचने के लिए मजबूर कर देगा हालांकि इसे सही तरीके से फिल्म में रखा नहीं गया है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

मिष्टी, रिद्धिमा तिवारी, फ्लोरा साइना ने भी अपने किरदार को बखूबी निभाया है तो ईला अरूण भी बिल्कुल सटीक लगी हैं। नसीरउद्दीन शाह का कैरेक्टर ग्रे शेड हैं में अफसोस वो ज्यादा देर के लिए फिल्म में नहीं हैं। ट्रैक में रजित कपूर और आशीष विद्यार्थी नहीं जम पाए हैं।

पितोबश सबके कैंपिनियन हैं और गौहर से प्यार करते हैं। विवेक मुश्रान भी अपने कैरेक्टर में बिल्कुल उम्मीद के हिसाब से अच्छे लगे हैं।

चंकी पांडे का फिल्म में रोल बहुत अच्छे से लिखा नहीं गया है। फिल्म में पहले उनको काफी शांत दिखाया गया है जो बेगम जान और उनके गैंग से पीछा छुड़ाने के लिए सबकुछ करता है लेकिन अंत तक वो टिक नहीं पाते।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

बेगम जान लिखी कहानी से ज्यादा मोमेंट्स कही कहानी है। गोपू भगत की सिनेमैटोग्राफी कमाल की है और उन्होंने बेगम जान की दुनिया को बेहतरीन तरीके से दिखाया है। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा है लेकिन दूसरे हाफ में कई शानदार सीन है। मोनिशा बालदवा और विवेक मिश्रा को एडिटिंग पर थोड़ा सा ध्यान और देना था।

म्यूजिक

म्यूजिक

फिल्म के सभी गाने बिल्कुल सही तरह से रखे गए है। आजादियां और होली खेलें आपको सबसे ज्यादा पसंद आएगी।

Verdict

Verdict

बेगम जान आप आराम से बैठ कर नहीं देख सकते। इसमें समाज का दोहरा चरित्र दिखाया गया है। लेकिन ये आपको कंफर्ट भी देती है और सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि वो सुबह कभी तो होगी। इस फिल्म को विद्या बालन के लिए देखिए जिनकी आखें और एक एक डायलोग आपके रोंगटे खड़े कर देगा।

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    English summary
    Begum Jaan isn't an easy watch. It makes you squirm at the double standards prevailing in the society. At the same time, it comforts you with a hope that 'woh subah kabhi toh aayegi'. Watch it for Vidya Balan whose piercing eyes and firebrand dialogues gives you ample of goosebump-inducing moments!

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