अटैक फिल्म रिव्यू- साइंस और देशभक्ति का मिक्स परोसने की कोशिश करते हैं जॉन अब्राहम, दोनों में फेल

Rating:
2.0/5

निर्देशक- लक्ष्य राज आनंद

कलाकार- जॉन अब्राहम, जैकलीन फर्नाडीज़, रकुल प्रीत सिंह, प्रकाश राज, रत्ना पाठक, किरण कुमार, इलहाम अहसास

"अब वक्त मुंह तोड़ जवाब देने का नहीं, सीधे मुंह तोड़ देने का है, इट्स टाइम फॉर अटैक.." देश और दुनिया से आतंकवाद खत्म करने की बातें करते हुए आर्मी चीफ (प्रकाश राज) कहते हैं। इस संवाद की तरह ही फिल्म में भी आपको 'उरी' से जुड़े कई रिफ्रेंस देखने को मिलेंगे। यह निर्देशक ने किस उद्देश्य से किया है, पता नहीं!

जॉन अब्राहम द्वारा अभिनीत और निर्मित ये एक्शन फिल्म एक सुपरसोल्जर के इर्द गिर्द घूमती है, जो आतंकवादियों से अपने देश को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। फिल्म साइंस और एक्शन से भरपूर है। बता दें, यह एक फ्रैंचाइजी है, लेकिन जिस तरह से अटैक पार्ट 1 को खत्म किया गया है, उसके बाद दूसरे पार्ट के लिए दिलचस्पी नहीं जगती।

कहानी

कहानी

शुरुआत पाकिस्तान में किये जा रहे एक सर्जिकल स्ट्राइक से होती है, जिसे अर्जुन शेरगिल (जॉन अब्राहम) लीड कर होता है। वहां से टीम एक लश्कर के लीडर हामिद गुल को पकड़ लाती है। कहानी कुछ महीने आगे बढ़ती है। अर्जुन की जिंदगी में आएशा (जैकलीन) आती है। दोनों हंसी खुशी जी रहे होते हैं, जब अचानक एक दिन दिल्ली के एयरपोर्ट पर एक बड़ा आतंकवादी हमला होता है। इस हमले में जख्मी हुए अर्जुन के गले से नीचे उसका पूरा शरीर पैरलाइज़ हो जाता है। वह अपनी मां के साथ एक अफसोस में जिंदगी गुजार रहा होता है, जब आर्मी वाले फिर अर्जुन को याद करते हैं।

लश्कर के नए लीडर उमर गुल से निपटने के लिए आर्मी एक सुपर सोल्ज़र तैयार करना चाहती है, जिसके लिए उन्होंने अर्जुन को चुना है। साइंटिस्ट (रकुल प्रीत) एक ऐसी चिप तैयार करती हैं जिसे इंसान के दिमाग में लगाकर फिट किया जा सकता है। फिर इंटेलिजेंट रोबोट असिस्टेंट के जरीए इंसान को हर कमांड दिया जा सकता है। इस चिप को अर्जुन के दिमाग में फिट कर दिया जाता है। जल्द ही अर्जुन अगले मिशन के लिए तैयार हो जाता है। लेकिन इस बीच संसद पर एक बड़ा आतंकी हमला हो जाता है। वहां प्रधानमंत्री समेत सभी मंत्रियों को कैद कर लिया जाता है और सरकार के सामने कुछ मांग ऱखी जाती है। अब सरकार आतंकवादियों की मांग पूरी करती है या सुपर सोल्जर अर्जुन कोई चक्रव्यूह रचेगा.. यही है फिल्म की कहानी।

अभिनय

अभिनय

जॉन अब्राहम एक्शन करने में माहिर हैं, लेकिन भावुक दृश्यों को निभाने में वो भावहीन दिखते हैं। लिहाजा, जॉन और उनकी मां (रत्ना पाठक) का ट्रैक इमोशनल होते हुए भी दिल को नहीं छू पाता है। जैकलीन और रकुल प्रीत के किरदार भी कमजोर लेखन से ग्रस्त हैं। निर्देशक ने उन्हें ज्यादा कुछ करने का स्कोप ही नहीं दिया है। प्रकाश राज, रत्ना पाठक, किरण कुमार, इलहाम अहसास ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।

निर्देशन

निर्देशन

लक्ष्य राज आनंद ने 'अटैक' के साथ निर्देशन के क्षेत्र में डेब्यू किया है। इससे पहले वो 'एक था टाइगर' और 'बैंग बैंग' जैसी फिल्मों में बतौर असिस्टेंड डायरेक्टर काम कर चुके हैं। सुपर सोल्जर के विषय पर बनी यह पहली हिंदी फिल्म होगी, लेकिन हॉलीवुड सालों पहले ही इस पर हाथ आज़मा चुका है। क्या 'अटैक' में निर्देशक कुछ नया या अनूठा पेश करते हैं? नहीं। सुपर सोल्जर बनकर भी हमें पर्दे पर जॉन अब्राहम की दिखते हैं। इससे पहले भी फिल्मों में हमने उन्हें एक साथ 20 लोगों से लड़ते देखा है और यहां भी वही है। हां, कहानी में साइंस का सहारा लिया गया है लेकिन वो आकर्षित नहीं करता। निर्देशक कहीं ना कहीं बने बनाए फॉरमूले पर ही चलते दिखे हैं। जॉन- जैकलीन का रोमांटिक ट्रैक बेहद ऊबाऊ लगा है और वह कहानी के लय को तोड़ती है।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फिल्म की कहानी जॉन अब्राहम ने लिखी है, जिसे पटकथा का रूप दिया है लक्ष्य राज आनंद, सुमित भटेजा और विशाल कपूर ने। फिल्म में गिने चुने संवाद हैं जो आपका ध्यान खींचते हैं। खासकर देशभक्ति से जुड़ी सभी संवाद बेहद घिटे पिटे लगते हैं। विल हम्फ्रिस, पीएस विनोद और सौमिक मुखर्जी द्वारा की गई सिनेमेटोग्राफी भी फिल्म को अलग टोन नहीं दे पाती है। कुछ एक एक्शन सीन्स अच्छे लगे हैं; खासकर संसद के अंदर जॉन अब्राहम की फाइटिंग सीन और दिल्ली की सड़कों पर चेज़ सीन.. फिल्म का वीएफएक्स ऐवरेज है, जबकि एडिटिंग को थोड़ा और कसा जा सकता था।

संगीत

संगीत

फिल्म का संगीत दिया है शाश्वत सचदेव ने, जो कि औसत है। एक के बाद एक कहानी में कई गाने आते हैं, जो आपको किरदारों से जोड़ने की कोशिश करते है। लेकिन गाने दिल को नहीं छूते। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है। खासकर एक्शन सीन्स में यह एक दिलचस्पी जगाता है।

देंखे या ना देंखे

देंखे या ना देंखे

जॉन अब्राहम की इस फिल्म में कुछ भी ऐसा नया नहीं है, जो आपने पहले नहीं देखा हो। जॉन के फैन हैं तो ये फिल्म एक बार देख सकते हैं, अन्यथा वीकेंड पर अपना कीमती समय ना लगाएं। फिल्मीबीट की ओर से 'अटैक' को 2 स्टार।

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