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फिल्म समीक्षा : 'आएशा' से आशा नहीं

By: अंकुर शर्मा
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निर्माता:अनिल कपूर,अजय बिजली,संजीव के बिजली,रिया कपूर
निर्देशक:राजश्री ओझा
कलाकार:अभय देओल,सोनम कपूर,इरा दुबे,एम.के.रैना,अमृता पूरी,लीसा हैडन,युरी सूरी,सायरस साहूकार,अनुराधा सिंह
रेटिंग:2.5/5

समीक्षा : जो कोई भी इस धरती पर है उसका जोड़ा उसके साथ आया है, यानी कि समवन, समवेयर इज वेटिंग फॉर यू, जी हां यश चोपड़ा कैंप का ये मशहूर जुमला जिसने इसी तर्ज पर न जाने कितनी मुहब्बत की दास्तां लिख चुके हैं, को अपने शब्दों में पेश किया है निर्देशक राजश्री ओझा ने अपनी फिल्म आयशा में। अनिल कपूर की 'आयशा' पुराने तरीके पर बनाई गई नये कलाकारों की फिल्म हैं। जिसमे कुछ भी नयापन नहीं है। लेकिन हां फिल्म बोर नहीं करती है।

मशहूर जैन एशटन की नॉवेल एम्मा को कमजोर पटकथा में प्रस्तुत किया गया है आयशा में। लेकिन फिर भी सोनम-अभय ने फिल्म को संभालने की कोशिश की है। आयशा बनीं सोनम बेहद हसीन नजर आयीं है जबकि अभय देओल का अभिनय कमाल का है। उन्होने साबित कर दिया है कि उन्हें अच्छा कलाकार क्यों कहा जाता है।

फिल्म में अभय- सोनम की अच्छी कैमेस्ट्री देखने को मिली है। फिल्म में सह कलाकार के तौर पर इरा दुबे सायरस साहूकार और अमृता पूरी ने अच्छा काम किया है, हालाकि कहानी में दम नहीं है लेकिन अभिनय और निर्देशन अच्छा है। राजश्री ओझा ने मेहनत की है। संगीत औसत है। युवाओं को केन्द्र में रखकर बनायी गई फिल्म युवाओं को सम्मोहित करते तो नहीं दिखती लेकिन इतना जरूर है कि ये फिल्म युवाओं को लुभाती जरूर है, कुल मिलाकर एक बार देखने लायक फिल्म है।


देखें : आयशा की तस्वीरें

कहानी : फिल्म की कहानी केन्द्रित है 'आएशा' बनी सोनम कपूर पर जिसके लिए ज़िन्दगी बहुत ही हसीन है । उसकी ज़िन्दगी का एक ही मकसद है दूसरों को ख़ुशी बांटना। आएशा भव्य जीवनशैली में विश्वास रखती है और अपनी शर्तों पर जीने में यकीन रखती है और इसी वजह से उसकी लव लाइफ ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाती। अर्जुन(अभय देओल)एक बैंक में काम करने वाला नौजवान युवक है और वह आएशा का बचपन का साथी है।

अर्जुन को चीज़ बहुत ही संयोजित ढंग से करने की आदत है वहीं आएशा हमेशा कुछ न कुछ नया करने में यकीं रखती है। दोनों की विचारधारा एकदम अलग है। दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं मगर यह बात समझने में उन्हें काफी वक़्त लग जाता है। अर्जुन और आएशा अपनी अपनी ज़िन्दगी को दूसरे लोगों के साथ जीते हैं।

अर्जुन की मुलाक़ात जहाँ आरती से होती है वहीं आएशा को मिलता है ध्रुव, दोनों अपने रिश्ते निभाने की कोशिश तो करते हैं मगर तभी आएशा को एहसास होता है कि अर्जुन ही वह युवक है जिसके साथ वह अपनी ज़िन्दगी बिताना चाहती है।

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