हर भारतीय का सपना है 'शंघाई'

भ्रष्ट पॉलिटिक्स की वजह से अपनी पहचान खोते भारत मे एक बदलाव लाने का सपना दिखाया है निर्देशक दिवाकर ने। यह फिल्म 1960 में एक ग्रीक लेखक वासीलिकोस द्वारा लिखी गई पुस्तक 'z' से प्रेरित है। 'शंघाई'में निर्देशक ने दर्शकों का ध्यान भारत में मौजूद भ्रष्टाचार की तरफ ले जाने का प्रयास किया है।
'शंघाई' फिल्म में अभय देओल ने एक आईएएस ऑफिसर की भूमिका निभाई है और इमरान हाशमी ने एक फोटोग्राफर और जर्नलिस्ट की । कल्की एक इंडियन आर्मी जनरल की बेटी बनी है जिसका कोर्ट मार्शल हो गया था। कल्र्की आधी ब्रटिश और आधी भारतीय है।
कास्ट को लेकर दिवाकर का कहना है " आप कभी अभय देओल और इमरान हाशमी को एक साथ नहीं देखेंगे और ना ही काल्की के साथ इमरान को। मैं एक बिल्कुल अलग जोड़ियों को एक दूसरे के साथ काम करते देखना चाहता था ताकि वो एक कभी न भूल सकने वाला अनुभव कर सकें। "
'खोसला का घोंसला' और 'लव सेक्स और धोखा' जैसी फिल्मों का निर्देशन करने के बाद अब दिवाकर 'शंघाई' जैसी मर्डर मिस्ट्री और पॉलिटिकल थ्रीलर लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म के लिए दिवाकर ने एक लाइन भी कही है - चारों तरफ मंहगाई है फिर भी हम शंघाई हैं।
दिवाकर ने यह भी कहा है कि पॉलिटिकल थ्रीलर होने के बावजूद इस फिल्म में किसी भी पॉलिटिशियन को नहीं दिखाया गया है और जहां तक नाम का सवाल है तो शंघाई सिर्फ एक सपना है इसलिए इस फिल्म में शंघाई शहर की झलक तक नहीं है।


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