रितेश ने पूरा किया अपने पिता विलासराव का सपना

"विलासराव देशमुख के लिए उनकी जिंदगी ने कुछ और ही सोच रखा था और एक्टर बनने का सपना लिए वो पॉलिटिक्स की दुनिया में आ गए और फिर तो पॉलिटिक्स में ही उन्होने अपनी पहचान बनाई। विलासराव ने एक बार मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था अपने कॉलेज टाईम से मैं एक्टर बनने के सपने देखता था। लेकिन उस समय का दौर कुछ और था तब समाज में फिल्मों में करियर बनाने वालो को बुरा समझा जाता था।"
"पहले मैं अपने नाम विलासराव देशमुख के नाम से जाना जाता था लेकिन आजकल लोग मेरे पास से गुजरते हैं तो कहते हैं कि वो देखो रितेश देशमुख के पिता।" विलासराव देशमुख को लीवर कैंसर की समस्या थी। कैंसर के चलते उनकी किडनियां खराब हो गईं थीं और किडनी ट्रांसप्लैंट के लिए भी कोशिश की जा रही थी। रितेश देशमुख जो की अपने पिता के बेहद करीब थे ने अपने पिता की जान बचाने के लिए अपनी किडनी तक देने को तैयार हो गये। लेकिन इतनी कोशिशों के बावजूद विलासराव को बचाया नहीं जा सका।
विलासराव देशमुख संगीत प्रेमी भी थे और उन्हें लता मंगेशकर के गाने बहुत पसंद थे। उनके निधन के बाद लता मंगेशकर ने मीडिया से विलासराव देशमुख के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि वो लता के हर कॉन्सर्ट में आते थे और उनके गाने की तारीफ भी करते थे। लता ने कहा कि विलासराव देशमुख बहुत साधारण इंसान थे और महाराष्ट्र के सीएम होने के बावजूद उनमें किसी बात का कोई घमंड नहीं था।


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