'स्लमडॉग' के अज़हरुद्दीन को घर मिला

By Staff

'स्लमडॉग मिलियनेयर' के निर्देशक डैनी बॉयल और उनके ट्रस्ट ने फ़िल्म के एक बाल कलाकार अज़हरुद्दीन इस्माइल के लिए एक नया घर ख़रीदा है. इन दिनों मुंबई पहुँचे बॉयल ने नौ वर्षीय अज़हरुद्दीन को बताया कि उसके लिए एक नया घर ख़रीदा गया है.

पिछले दिनों मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने अज़हरुद्दीन की झोपड़ी अवैध बताते हुए ढहा दी थी. फ़िल्म में काम करने वाले बाल कलाकारों के लिए ज़्यादा कुछ नहीं करने का डैनी बॉयल पर आरोप लगता रहा है मगर बॉयल ने इसके लिए प्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, "निश्चित ही ये तनाव और दबाव मीडिया का बनाया हुआ है." बॉयल ने उम्मीद जताई कि जून में होने वाली मॉनसून की बारिश से पहले एक अन्य बाल कलाकार रुबीना अली के लिए भी घर ढूँढ़ लिया जाएगा. रुबीना अली ने 'स्लमडॉग मिलियनेयर' में लतिका का क़िरदार निभाया था. डैनी बॉयल ने कहा, "उन्हें एक असाधारण और ग्लैमर से भरी दुनिया में जाने का मौक़ा मिला और उसके बाद अब वे निश्चित ही चाहते हैं कि उनकी दुनिया पूरी तरह बदल जाए."

नया घर

पाँच-छह महीने हो चुके हैं. मुंबई में तो आपके पास अगर पैसा हो तो सब कुछ संभव है. अगर आप वास्तव में घर दिलाना चाहते हैं तो दो दिन में ये हो सकता है रफ़ीक़ क़ुरैशी, रुबीना अली के पिता

पाँच-छह महीने हो चुके हैं. मुंबई में तो आपके पास अगर पैसा हो तो सब कुछ संभव है. अगर आप वास्तव में घर दिलाना चाहते हैं तो दो दिन में ये हो सकता है

फ़िल्म समाप्त होने के बाद ही बॉयल और फ़िल्म के प्रोड्यूसर क्रिस्टियन कोल्सन ने 'जय हो ट्रस्ट' का गठन किया था और उसका मक़सद बच्चों के 18 साल का होने तक उनकी आर्थिक रूप से मदद करना है.

बॉयल ने कहा, "घर नहीं होना निश्चित ही चिंता का विषय है और यह उन वजहों में से एक है जिसे देखते हुए ट्रस्ट का गठन किया गया था."वहीं कोल्सन ने इस बारे में कहा, "हम परिवारों को फिर से बसाने का काम तेज़ करने में लगे रहे हैं और ट्रस्ट का गठन ऐसी ही आपात स्थितियों से निबटने के लिए किया गया है."

वहीं ट्रस्ट के एक निदेशक ने बताया कि अज़हरुद्दीन का घर अच्छी जगह पर है और उसके स्कूल के पास भी है. रुबीना अली के पिता रफ़ीक़ क़ुरैशी का इस बारे में कहना है कि राज्य सरकार ने दोनों बच्चों को घर देने की बात कही थी मगर उसके बाद से उनकी ओर से कुछ भी नहीं किया गया.

क़ुरैशी ने ककहा, "पाँच-छह महीने हो चुके हैं. मुंबई में तो आपके पास अगर पैसा हो तो सब कुछ संभव है. अगर आप वास्तव में घर दिलाना चाहते हैं तो दो दिन में ये हो सकता है."

दोनों ही बच्चों की झोपड़ियाँ इस महीने की शुरुआत में ढहा दी गई थीं और उसके बाद से रुबीना अपने रिश्तेदारों के साथ रह रही है और अज़हरुद्दीन अपने माता-पिता के साथ एक अस्थाई ठिकाने पर है.

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