एकल पर्दे वाले थियेटर ज्यादा बेहतर

देश में मल्टीप्लेक्स संस्कृति की अगुवाई करने वाले फिल्मकार मनमोहन शेट्टी अब महसूस करते हैं कि एक पर्दे वाले थियेटर अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। बॉबी बेदी ने भी मल्टीप्लेक्स में फिल्मों के बहुत अधिक टिकट के खिलाफ रोष व्यक्त किया है।
नोएडा में स्पाइस सिनेमा के प्रबंधक अमित अवस्थी का कहना है, "एकल पर्दे वाले थियेटर बॉक्स ऑफिस संग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देश के ज्यादातर राज्यों में मल्टीप्लेक्स नहीं हैं, जहां फिल्में एकल पर्दे वाले थियेटर में ही दिखाई जाती हैं।"
वेब सिनेमा को कॉरपोरेट प्रमुख योगेश रायजादा का कहना है, "जनता के लिए हमेशा से ही फिल्म के टिकट का मूल्य एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।"
वहीं डिलाइट सिनेमा के निदेशक पीयूश रायजादा ने आईएएनएस से कहा, "एकल पर्दे वाले नए थियेटर शुरू करने के लिए जमीन कहां है?"
मोती सिनेमा के मालिक कीरतभाई देसाई का कहना है, "आजकल जमीन बहुत मंहगी है इसलिए कोई भी एकल पर्दे वाले थियेटरों में ज्यादा निवेश नहीं करेगा। यह व्यवहारिक नहीं है। एकल पर्दे वाले थियेटर बनाने में किसी की रुचि नहीं है।"
वांटेड फिल्म ने देशभर से 38 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इसमें से 70 प्रतिशत कमाई केवल फिल्म के एकल पर्दे वाले थियेटर में चलने से हुई थी।
देसाई का कहना है, "आजकल की फिल्में मल्टीप्लेक्स के लिए बनाई जाती हैं और इसलिए एकल पर्दे वाले थियेटर अच्छा व्यापार नहीं कर पाते हैं। निर्माताओं को मल्टीप्लेक्स से अच्छा कर प्राप्त होता है और इसलिए हमें वेक अप सिड या रॉक ऑन या पा जैसी फिल्में नहीं मिलती क्योंकि ये फिल्म विशेष दर्शक वर्ग के लिए बनी हैं ना कि आम दर्शकों के लिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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