पैदल वाघा सीमा पार कर फैज की बेटियों से मिलीं शबाना

'फैज अहमद फैज सेंटीनियल' के बुलावे पर भारत से शबाना आजमी, जावेद अख्तर, एम.एस. सथ्यू, शमा जैदी, अतुल तिवारी, राजेंद्र गुप्ता और लुबना आरिफ सहित 10 रंगमंच कलाकार एक सप्ताह के लिए पाकिस्तान पहुंचे थे। इन लोगों ने पैदल वाघा सीमा पार कर इतिहास रचा है।
शबाना ने कहा, "फैज मेरे पसंदीदा शायर हैं, अब्बा (कैफी आजमी) भी बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें बहुत अच्छा शायर स्वीकार करते थे। मैं जहां भी जाती हूं, वहां मेरे साथ फैज की शायरी का संग्रह 'सारे सुखन हमारे' जरूर होता है।" फैज की बेटियों के साथ अपने अटूट रिश्ते पर शबाना ने कहा, "सलीमा, मोनीजा हाशमी और मैं एक ही जैसे माहौल में पली-बढ़ी हैं, हम प्रगतिशील लेखक आंदोलन से जुड़े लोगों की बेटियां हैं।"
उन्होंने कहा, "मैं कोलम्बो में शूटिंग कर रही थी इसलिए सबसे जल्दी पाकिस्तान पहुंचने का रास्ता वाघा सीमा पार करके जाना ही था। मेरे लिए यह पहली बार था। एक पतली सी रेखा के इस ओर भारत और उस ओर पाकिस्तान था। दूसरी ओर फैज की बेटियां अपनी बाहें फैलाए और मालाएं लिए हमारा इंतजार कर रही थीं। हम भी बाहें फैलाए और आंखों में आंसू लिए दूसरी ओर पहुंचे, हमने एक-दूसरे को गले लगाया। इस दौरान हमारे इर्द-गिर्द मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।"
शबाना दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्ते चाहती हैं। वह कहती हैं, "हमारे पिता (आजमी और फैज) जिंदगीभर शोषितों के सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करते रहे थे। वे सौहार्दपूर्ण दुनिया का ख्वाब देखते थे।" उन्होंने कहा कि कलाकार केवल शांति और सौहाद्र्र की बात कर सकते हैं क्योंकि कला सीमाएं नहीं जानती।


Click it and Unblock the Notifications











